10 साल की सजा, 5 करोड़ जुर्माना और 3 महीने में सुनवाई... संशोधित पेपर लीक विधेयक की बड़ी बातें
सरकार ने नीट पेपर लीक मामले के बाद सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक लोकसभा में पेश किया है। ...और पढ़ें

पेपर लीक विधेयक लोकसभा में पेश। (संसद टीवी)
HighLights
पेपर लीक पर 10 साल तक की कैद और 5 करोड़ जुर्माना।
जांच 2 महीने, सुनवाई 3 महीने में फास्ट ट्रैक कोर्ट में।
निजी एजेंसियों को 8 साल तक ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने सोमवार को भारी हंगामे के बीच पेपर लीक सहित परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ी को सख्ती से रोकने के लिए प्रस्तावित संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया। हालांकि हंगामे के चलते विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। माना जा रहा है कि मंगलवार को इस पर छह घंटे की चर्चा कर पारित कराया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को विधेयक को पेश किया। इस विधेयक के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों में अब दस साल की अधिकतम सजा और दस करोड़ की जुर्माना होगा। इस दौरान जांच और सुनवाई दोनों साथ चलेगी। जिसमें जांच दो महीने में और सुनवाई तीन महीने में पूरी कर सजा का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में पांच अहम बदलाव
- इस विधेयक के बाद 2024 के विधेयक में जो पांच अहम बदलाव होंगे। उसमें 2024 के कानून में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल तक की सजा व अधिकतम 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान था, जबकि 2026 के प्रस्तावित विधेयक में पांच से दस साल की सजा और 50 लाख तक का जुर्माना होगा।
- 2024 के कानून में पेपर लीक व परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले संगठित अपराध के मामले में जहां पांच से दस साल की जेल और एक करोड़ तक के जुर्माने का प्रविधान था, वहीं 2026 के विधेयक में ऐसे में मामले में सात से दस साल की सजा और पांच करोड़ तक का जुर्माना होगा।
- 2024 के कानून में ऐसे मामलों की जांच के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं थी व सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी, जबकि 2026 के विधेयक में जांच दो महीने और सुनवाई तीन महीने के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में पूरी करनी होगी।
- 2024 के कानून में ऐसे मामलों की जांच सामान्यतः केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा करायी जाती थी, जबकि 2026 के प्रस्तावित विधेयक में इन मामलों की जांच के लिए एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का प्रस्ताव किया गया है।
- पहले निजी एजेंसियों को दोषी पाए जाने पर ऐसे मामलों में चार साल तक के लिए ब्लैक लिस्टेट करने का प्रविधान था, जबकि 2026 के कानून में इसे बढ़ाकर आठ साल कर दिया गया है।
इस कानून के बाद भी परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों को रोक पाने की रहेगी चुनौती
नंदन नीलकेणि की अध्यक्षता में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने टास्क फोर्स गठित किया है जो अपनी रिपोर्ट देगा। लेकिन उसे भी जमीन पर उतारने में काफी मशक्कत करनी होगी। देश में परीक्षा माफिया की जड़ें जिस तरीके से गहरी है, उनमें आगे भी परीक्षाओं को किसी गड़बड़ी से बचाने की चुनौती रहेगी।
सूत्रों की मानें तो यह चुनौती इसलिए भी रहेगी क्योंकि पिछले 77 सालों से देश में परीक्षा माफिया को फलने-फूलने को पूरा मौका मिला। उसे रोकने के लिए कोई कानून था ही नहीं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी करने पर भी उसके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती थी।
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अब जब कानून को सख्त बनाया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी वह जिस तरह से इसे लेकर नए-नए हथकंडे अपना रहे है, उससे निकल पाना मुश्किल है। केंद्र और हर राज्य को अपने स्तर पर प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करने होंगे, पेशेवरों की भर्ती करनी होगी और कानून के सही पालन के जरिए यह भय बिठाना होगा कि पेपर लीक के अपराध से कोई बच नहीं पाएगा।