निमिषा प्रिया मामला, SC ने सार्वजनिक बयानों पर रोक लगाने की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने यमन में हत्या के आरोप में फांसी की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में असत्यापित सार्वजनिक बयानों पर रोक लगाने के निर्देश की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने सरकार के इस मामले पर बोलने की बात कही है किसी और को नहीं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यमन में हत्या के आरोप में फांसी की लंबित सजा वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में 'असत्यापित सार्वजनिक बयानों' पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता के.ए. पाल को बताया कि अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने केवल सरकार के इस मामले पर बोलने की बात कही है और कोई और नहीं। पीठ ने पूछा, "क्या आप चाहते हैं कि कोई भी मीडिया से कुछ न कहे? अटार्नी जनरल ने कहा है कि भारत सरकार सुनिश्चित करेगी कि कोई भी मीडिया को ब्रीफ न करे। और आप क्या चाहते हैं?"
मामला लिया गया वापस
वेंकटरमणि ने कहा कि यह 'बहुत संवेदनशील मामला' है और वह सुनिश्चित करेंगे कि जब तक यह समाप्त नहीं होता, कोई मीडिया ब्रीफिंग न हो। यह मामला वापस लिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मामले में कुछ व्यक्तियों द्वारा झूठे बयान दिए जा रहे हैं। पिछले महीने शीर्ष अदालत को सूचित किया गया था कि 16 जुलाई को निर्धारित प्रिया की फांसी स्थगित कर दी गई थी।
यमन में जेल में है बंद
18 जुलाई को केंद्र ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि प्रयास जारी हैं और सरकार प्रिया को सुरक्षित बाहर लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। वह यमन की राजधानी सना में एक जेल में बंद है।
(समाचार एजेंसी PTI के इनुपट के साथ)
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