महिलाओं की सुरक्षा: तीसरी आंख से होगी निगरानी, गांवों के संवेदनशील क्षेत्रों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए 'निर्भया फंड' से 'निर्भय रहो' प्रोजेक्ट को 752.26 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। ...और पढ़ें

संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगेंगे

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जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में घूंघट की ओट से निकलकर और पितृसत्तात्मक अवधारणा की संकुचित देहरी लांघकर महिलाएं किस तरह राजनीतिक क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रही हैं, उसे यह आंकड़े पुष्ट करते हैं कि देश के कुल निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में उनकी भागदारी 46 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
इसके बावजूद तमाम अध्ययन यह इशारा कर चुके हैं कि खास तौर पर ग्रामीण महिलाओं में अब भी संकोच है, असुरक्षा की भावना है और आत्मविश्वास की कमी है। चूंकि पंचायतीराज मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान में अभी तक महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित कोई प्रविधान नहीं है, इसलिए पहली बार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के 'निर्भया फंड' से 'निर्भय रहो' प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई है।
संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगेंगे
इसके तहत गांवों के संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। 'निर्भय रहो' प्रोजेक्ट के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 752.26 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
नोडल मंत्रालय पंचायतीराज मंत्रालय होगा, क्योंकि यह परियोजना पंचायत स्तर पर लागू की जानी है। इस प्रोजेक्ट के तीन घटक हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह कि गांवों के संवेनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाकर महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्र के रूप में वह स्थान चिन्हित किए जाएंगे, जहां किसी न किसी काम से महिलाओं को जाना होता है और वहां सामान्य आवाजाही कम होती है यानी सुनसान क्षेत्र।
महिला प्रतिनिधियों को कानूनी सुरक्षा का प्रशिक्षण मिलेगा
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चूंकि मंत्रालय ने महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को ध्यान में रखते हुए ही वूमन फेंडली माडल ग्राम पंचायत की योजना शुरू की है, इसलिए सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे ऐसी पंचायतों के ही अधीन आने वाले गांवों में लगाए जाएंगे, जिन्होंने खुद को वूमन फेंडली ग्राम पंचायत के संकल्प में शामिल किया है।
इस श्रेणी में अभी 14,176 ग्राम पंचायतें हैं। इसके बाद देश की अन्य पंचायतों के गांवों में भी इस परियोजना को बढ़ाने का विचार है। इसके अलावा इस परियोजना के दूसरे घटक में 'हिंसा से मुक्ति: महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा संबंधी कानूनी प्रविधानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण'। इसके तहत लगभग 14.50 लाख महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस मद में 343.43 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही तीसरे घटक में 'महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा सहित महिलाओं से संबंधित मुद्दों के प्रति पुरुषों की संवेदनशीलता' को रखा गया है। इसके तहत लगभग 17.5 लाख पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को संवेदनशीलता के प्रति जागरूक करने के लिए 408.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
पुरुष प्रतिनिधियों को लैंगिक मुद्दों पर जागरूक किया जाएगा
इस प्रोजेक्ट की विशेषता यह भी है कि पंचायत स्तर ट्रेनिग ईकोसिस्टम और ट्रेनिग माड्यूल की कमी को भी रेखांकित किया गया है। निर्भय रहो प्रोजेक्ट के तहत तय किया गया है कि देश के सभी राज्यों में ऐसे पेशेवरों की अस्थायी नियुक्ति की जाएगी, जो महिला संबंधी मुद्दों और महिलाओं से संबंधित कानूनों के जानकार हैं।
राज्यों को जिलों की संख्या के अनुसार इतने पेशेवरों की टीम बनानी होगी कि ब्लाक स्तर तक महिला पंचायत प्रतिनिधियों को महिला हिंसा या अपराध होने की दशा में विधिक परामर्श मिल सके और प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी बेहतर ढंग से संचालित हो सके।
यही पेशेवर पुरुष जनप्रतिनिधियों को भी महिला संबंधी मुद्दों पर भी संवेदनशील बनाते हुए जागरूक करेंगे, ताकि ग्राम पंचायत विकास योजना में महिला सुरक्षा-संरक्षा संबंधी मुद्दों को शामिल किया जाए। मंत्रालय का मानना है कि यह पहल गहरी जड़ें जमा चुके लैंगिक और पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रहों को कम करने में भी सहायक होगी।
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