शिक्षा से जुड़ा बजट बढ़ाएं केंद्र और राज्य, GDP के छह प्रतिशत तक पहुंचाएं; संसदीय समिति ने की सिफारिश
संसदीय समिति ने शिक्षा बजट को जीडीपी के 6% तक बढ़ाने की सिफारिश की है, ताकि नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। समिति ने 11.7 लाख स्कूल ...और पढ़ें

शिक्षा से जुड़ी संसदीय समिति ने की सिफारिश (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। शिक्षा से जुड़ी संसदीय समिति ने कहा कि शिक्षा के बजट को बढ़ाए बगैर उसे उस ऊंचाई पर नहीं ले जाया जा सकेगा, जिसकी कल्पना नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई है। समिति ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा पर केंद्र और राज्य की ओर से बढ़ाए गए बजट पर खुशी जाहिर की, हालांकि इसे और बढ़ाने पर जोर दिया।
साथ ही कहा कि 2030 तक जीडीपी का छह प्रतिशत तक शिक्षा पर खर्च करने के लिए केंद्र व राज्य दोनों को मिलकर एक रोडमैप तैयार करना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति ने बुधवार को दी गई रिपोर्ट में यह सिफारिश की है।
स्कूलों पर कितना खर्च किया गया?
समिति के मुताबिक 2024-25 में स्कूली शिक्षा पर जीडीपी का 4.12 प्रतिशत खर्च किया गया था, वहीं उच्च शिक्षा पर जीडीपी का करीब चार प्रतिशत खर्च किया गया था। समिति ने स्कूली शिक्षा से बाहर 11.7 लाख बच्चों को लेकर चिंता जताई। कहा कि इन्हें स्कूली शिक्षा से जोड़ने के लिए जरूरी कदम उठाया जाए।
वहीं देश में सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे 1.10 लाख स्कूलों को लेकर भी समिति ने अपनी गहरी चिंता जताई है। कहा है कि ऐसे स्कूल ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में है। ऐसे में शिक्षकों के बीमार पड़ने या नहीं आने पर बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो जाती होगी।
समिति ने ऐसे स्कूलों में कम-से-कम दो शिक्षकों की तैनाती के सुझाव दिए हैं। समिति ने उच्च शिक्षा को लेकर भी कई अहम सुझाव दिए हैं। इनमें देश में तेजी से खुल रहे विदेशी विश्वविद्यालयों को लेकर नियम प्रक्रियाओं को सख्त बनाने की सिफारिश की है।
समिति ने क्या सिफारिश की?
कहा है कि कुछ ऐसी व्यवस्था की जाए कि वे अपनी आय का एक बड़ा भाग देश में ही निवेश करें। समिति ने स्कूली बच्चों को दिए जाने वाले पीएम पोषण को पहले नौवीं कक्षा तक और अगले पांच वर्षों में बारहवीं कक्षा तक मुहैया कराने की सिफारिश की है।
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