Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Exclusive Interview: डील में किसानों की नाराजगी और हमारी शर्मिंदगी वाला एक भी फैसला नहीं, भारत अमेरिका ट्रेड पर पीयूष गोयल ने क्या-क्या कहा?

    By Ashutosh Jha and Rajiv KumarEdited By: Deepak Gupta
    Updated: Sun, 08 Feb 2026 08:38 PM (IST)

    वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर विपक्ष के कृषि क्षेत्र को खोलने के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेयरी, जीए ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू।

    आशुतोष झा और राजीव कुमार। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर साझा बयान जारी होते ही भारत को तत्काल रूप से 25 प्रतिशत के शुल्क में राहत मिल गई और अगले तीन-चार दिनों में अमेरिका में भारतीय वस्तुओं पर सिर्फ 18 प्रतिशत का शुल्क रह जाएगा। लेकिन इस बात को लेकर भी काफी शोर है कि भारत ने कृषि सेक्टर को अमेरिका के लिए खोल दिया, इससे देश का नुकसान होगा।

    समझौते से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से दैनिक जागरण के राजनीतिक संपादक आशुतोष झा और सहायक संपादक राजीव कुमार के साथ विस्तृत बातचीत की। पेश है इसके अंश:

    प्रश्न: पिछले कुछ महीनों में आपने कई मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किए, अमेरिका के साथ समझौते को लेकर काफी असमंजस चल रहा था, कब आपको लगा कि अब डील पक्की है?

    उत्तर: ईमानदारी से कहे तो कभी संदेह नहीं था इस डील को लेकर। हम दोनों दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों के संबंध काफी मजबूत है, एक-दूसरे के यहां निवेश हैं। वे टेक्नोलॉजी में मजबूत है और हमारे यहां रोजगारपरक सेक्टर का बड़ा काम है। दोनों देश भरोसेमंद पार्टनर के साथ व्यापार करना चाहते हैं। इन सब वजहों से समझौता हुआ है।

    piyush goel1

    प्रश्न: अब यह धारणा बन रही है कि भारत ने अमेरिका के लिए अपना कृषि सेक्टर पूरी तरह से खोल दिया है, डील के ब्यौरे के बाद से इस पर काफी शोर चल रहा है?

    उत्तर: विपक्ष के पास झूठ और फरेब फैलाने के अलावा कोई काम नहीं है। कांग्रेस व उनके साथी राजनीतिक दलों के पास देशहित और जनहित को लेकर कोई सोच नहीं है। उन्हें किसानों को गुमराह करने की जगह सामने सच्चाई रखना चाहिए। सच्चाई यह है कि कृषि के जितने भी संवेदनशील सेक्टर है, उन सभी को संभाला गया है उनमें कोई रियायत नहीं दी गई है।

    डेरी के सारे उत्पाद डील से बाहर है। ऐसे ही जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) उत्पाद को हम देश में आने नहीं देते हैं। पोल्ट्री, मांस और सोया व मक्का को बाहर रखा है। इसी प्रकार चावल, चीनी, गेहूं, ज्वार बाजरा, रागी, कोदो, कई सारे फल स्ट्राबेरी, केला, चेरी, अमरूद सभी सिट्रस फ्रूटस कुछ दाल, मूंग, काबुली चना, ग्रीन टी, मधु, तंबाकू, तिलहन, गैर अल्कोहलिक पेय पदार्थ, एथनाल ऐसे अनगिनत आइटम है जिसे बाहर रखा गया है। इसके बाद तो किसानों के लिए चिंता की बात ही नहीं है।

    कुछ आइटम ऐसे हैं जिनकी हमें जरूरत है। कांग्रेस के समय से सोयाबीन, सोया आयल हम बाहर से खरीद रहे हैं। आज भी लगभग पांच अरब डॉलर मूल्य के सोयाबीन ऑयल का हम आयात कर रहे हैं। ऐसे में हमने सोयाबीन ऑयल के लिए अमेरिका को कोटा दे दिया है तो अच्छा है, आयातकों के बीच प्रतिस्पर्धा होगी।

    हमारे लिए किसानों का हित सर्वोपरि है। एक भी ऐसा फैसला नहीं लिया गया है जिससे किसानों को नाराजगी हो या हमें शर्मिंदा होना पड़े। पोल्ट्री सेक्टर के लिए डिस्टिलर्स ड्रायड ग्रेन्स सोलुबल (डीडीजीएस) का थोड़ा कोटा दिया है ताकि पशुओं को पौष्टिक आहार मिल सके।

    piyush goel2

    प्रश्न: विपक्ष आलोचना कर रहा है कि पशु चारे के आयात को लेकर अमेरिका के लिए गेट खोल दिया तो अब अन्य देशों के लिए भी खोलना पड़ेगा?

    उत्तर: भारत में आज पशुचारा की भारी मांग है। हर साल यह मांग 6-8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए भारत में आज हरियाली वाली जमीन नहीं है, इतनी छोटी सी ओपनिंग से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा। भारत में सालाना 500 लाख टन पशु चारे की खपत है और अमेरिका को सिर्फ पांच लाख टन मतलब सिर्फ एक प्रतिशत के आयात का कोटा दिया गया है।

    हम पहले से ही श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड जैसे देशों से छह लाख टन के पशु चारे का आयात कर रहे हैं। वैसे ही हम छह लाख टन के सोयाबीन तो नौ लाख टन के कार्न का आयात करते हैं। अब विपक्ष को लग रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए के नेतृत्व में इतने जनहित और लोकहित के काम होंगे तो उन्हें 25 नहीं, कहीं 50 साल न विपक्ष में बैठना पड़े।

    प्रश्न: कोई भी व्यापार समझौता होता है तो लेना और देना दोनों शामिल होता है, लेकिन दोनों देशों को लगता है कि हम अधिक फायदे में हैं, ऐसे में अमेरिका के साथ इस डील में भारत कहां पर खड़ा है?

    उत्तर: यह व्यापार का वसूल भी है कि जब तक दोनों पक्षों के लिए संतुलित और बराबरी की डील नहीं है और दोनों को साझा लाभ नहीं होता है और जो दोनों के लिए अच्छा नहीं है तो डील बहुत दिनों तक नहीं चल सकती। पहले की डील में यह गलती रही है जिसके लिए हमारे उद्योग जगत काफी पछता रहे हैं। इसकी आलोचना हो रही है। अमेरिका के साथ की डील दोनों देशों के लिए विन-विन वाली है।

    piyush goel

    प्रश्न: किसानों को डील पर क्या संदेश देना चाहेंगे?

    उत्तर: उन्हें हमारे साथ बातचीत करनी चाहिए, देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह से बात करनी चाहिए, लेकिन उन्हें विपक्ष के झूठे बयानों से गुमराह नहीं होना चाहिए। रोजाना टीवी पर अखबारो में सभी बातें आ रही हैं।

    प्रश्न: पूर्व के किसान आंदोलन के दौरान किसानों के साथ बातचीत से जुड़ी कमेटी में आप रहे हैं, क्या आपको लगता है वे बातचीत के लिए आएंगे?

    उत्तर: देखिए, अगर राजनीति से प्रेरित होंगे और राजनीति करनी होगा तो अलग बात है। आप व्यापार समझौते की सूची देखिए, कैसे सोची समझी रणनीति के साथ हमने समझौता किया है। किसानों को नाराज होने का सवाल ही नहीं है। हमने अमेरिका के बाजार में किसानों के लिए अवसर खोले हैं। कई चीजों पर जीरो ड्यूटी कर दिया गया है जैसे चाय, काफी, मसाले, खोपरा, नारियल तेल, विभिन्न प्रकार के नट्स, कई फल व सब्जी, आम, केला, किवी, पपिता, मशरूम, कोका उत्पाद। इन सब पर जीरो हो गया। किसानों के लिए तो अपार अवसर है।

    प्रश्न: हाल ही में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ओमान, ईयू और अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किए गए, इससे भारत का निर्यात कितना बढ़ता हुआ आप देख रहे हैं?

    उत्तर: निर्यात बढ़ाना उद्योग, निर्यातक व किसानों के हाथ में है। मेरा विश्वास है कि हमारे कोपरेटिव, किसान संघ और निर्यातक समझ रहे हैं कि विश्व का बाजार अब हमारे लिए खुल गया है और इस मौके को वे गंवाना नहीं चाहेंगे। मुक्त व्यापार समझौते से यह लाभ मिलता है कि उन्हें पता होता है कि उस देश में निर्यात करने पर यही रेट होगा, यह बदलेगा नहीं, इससे निवेश भी आता है।

    प्रश्न: स्मार्टफोन के लिए जैसे एप्पल ने भारत में निवेश किया है तो क्या अन्य सेक्टर की अमेरिकी कंपनियां भी भारत में निवेश करेंगी?

    उत्तर: मुझे पूरा विश्वास है जेम एंड डायमंड जिसमें अब जीरो ड्यूटी है, स्मार्टफोन पर, फार्मा पर जीरो ड्यूटी है। मेरे कहने का तात्पर्य है कि अमेरिका 30 ट्रिलियन डालर का बाजार है। अमेरिका के बाजार में हमें बढ़त मिलने पर निवेशकों को बड़ा फायदा होगा, इसलिए निवेश बड़े पैमाने पर आएगा।

    प्रश्न: वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए क्वालिटी जरूरी है, पिछले कुछ दिनों में सरकार ने कई उत्पादों के क्वालिटी नियम को वापस ले लिया है तो इससे क्या हमारे उत्पाद को लाभ मिलेगा?

    उत्तर: आज के हालात में कुछ विभागों को लगा होगा कि क्वालिटी कंट्रोल नहीं रहने पर वह सेक्टर तेजी से बढ़ेगा। इसलिए ऐसा किया गया। हम नहीं चाहते कि क्वालिटी कंट्रोल के लिए जबरदस्ती किया जाए। कई बार लोग सुधरते नहीं है, सस्ते के चक्कर में विदेश से खराब चीजें आने लगती है तो हमें कड़ा रुख अपनाना पड़ता है।

    प्रश्न: ट्रंप ने कहा है कि रूस से तेल खरीदारी बंद नहीं करने पर फिर से 25 प्रतिशत वाला शुल्क लगा दिया जाएगा, आपका क्या कहना है ?

    उत्तर: इस विषय को विदेश विभाग देखता है, वहीं इसका जवाब देंगे।