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    KC त्यागी के सहारे RLD ने बिछाई सियासी बिसात, संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर 'मिशन यूपी' के लिए खेला बड़ा दांव

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 09:37 PM (IST)

    रालोद ने वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त कर 'मिशन यूपी' के लिए बड़ी राजनीतिक बिसात बिछाई है। ...और पढ़ें

    केसी त्यागी के सहारे RLD ने बिछाई नई सियासी बिसात।

    केसी त्यागी के सहारे RLD ने बिछाई नई सियासी बिसात।

    HighLights

    1. केसी त्यागी रालोद संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बने।

    2. 'मिशन यूपी' के लिए रालोद की बड़ी रणनीतिक पहल।

    3. युवा नेतृत्व और अनुभव का संतुलन साधने का प्रयास।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर मिशन उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा संदेश दिया है। करीब तीन महीने पहले रालोद में शामिल हुए केसी त्यागी को इतनी जल्दी बड़ी जिम्मेदारी देकर जयंत चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह युवा नेतृत्व एवं अनुभव का संतुलन बनाकर बढ़ना चाहते हैं।

    किसान राजनीति, जाट-त्यागी सामाजिक समीकरण एवं गठबंधन की राजनीति को देखते हुए केसी त्यागी पर दांव रालोद की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच पार्टी को उम्मीद है कि केसी त्यागी का अनुभव एवं राजनीतिक स्वीकार्यता उसके मिशन उत्तर प्रदेश को नई मजबूती देगी। जदयू में रहते हुए उन्होंने नीतीश कुमार की सियासत को राष्ट्रीय फलक पर ताकत देने के लिए जो काम किया अब वही भूमिका जयंत के लिए निभाएंगे।

    रालोद में केसी त्यागी को बड़ी जिम्मेदारी

    रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने जिस संसदीय बोर्ड का गठन किया है, उसमें सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। खुद जयंत चौधरी भी इसके सदस्य हैं। बोर्ड में उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान एवं दिल्ली के नेताओं को शामिल किया गया है। त्यागी की नई जिम्मेवारी को रालोद में अहम माना जा रहा है।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने में जुटी रालोद

    केसी त्यागी को मिली इस जिम्मेदारी के पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को साधने की रणनीति भी दिखाई देती है। त्यागी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं और पश्चिमी यूपी में त्यागी समाज की प्रभावी संख्या है। उनके अनुभव और सामाजिक स्वीकार्यता से पार्टी किसान राजनीति के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण भी मजबूत कर सकती है।

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    जयंत चौधरी ने जब केसी त्यागी को जनता दल (यूनाइटेड) छोड़ने के बाद रालोद में शामिल कराया था, तभी साफ संकेत दे दिए थे कि उन्हें पार्टी में बड़ी भूमिका दी जाएगी। उस समय केसी त्यागी ने जयंत चौधरी को चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाला नेता बताया था। जयंत ने भी कहा था कि हर राजनीतिक दल में एक केसी त्यागी जैसा अनुभवी नेता होना चाहिए।

    केसी त्यागी गठबंधन की राजनीति के माहिर खिलाड़ी

    दरअसल, केसी त्यागी को गठबंधन की राजनीति का माहिर माना जाता है। करीब पांच दशक के राजनीतिक जीवन में उन्होंने संसद, संवैधानिक मुद्दों और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ संवाद की मजबूत पहचान बनाई है। वे राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं और लंबे समय तक जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं।

    किसानों, सामाजिक न्याय, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी स्पष्ट और संतुलित राय उन्हें अलग पहचान दिलाती रही है। ऐसे समय में जब रालोद उत्तर प्रदेश से बाहर भी अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, तब केसी त्यागी का अनुभव पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच केसी त्यागी का अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता रालोद के मिशन उत्तर प्रदेश को नई मजबूती देगी।

    संसदीय दल में जयंत भी शामिल

    रालोद संसदीय दल में केसी त्यागी के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी, मेजर जनरल बिशम्बर दयाल, तारीफ सिंह, मुंशी राम, पूर्व मंत्री अशोक यादव, पूर्व सांसद मलूक नागर, सांसद राजकुमार सांगवान, उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता सदन राजपाल बलियान, पूर्व विधायक अब्दुल सगीर खान, योगेश चौधरी, विधायक सुभाष गर्ग, डॉ. यशपाल बघेल, अनिल दुबे, रमा नागर और बबीता तोमर को सदस्य बनाया गया है।

    वहीं किसान नेता युद्धवीर सिंह, विजय पुनिया, सुखबीर गठीना और चंद्रबली यादव को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।