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    रूस से तेल खरीदने से भारत को ज्यादा फायदा नहीं, हर साल होती है केवल इतने डॉलर की बचत

    Updated: Thu, 28 Aug 2025 08:34 PM (IST)

    ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए के अनुसार रूसी तेल आयात से भारत को होने वाला लाभ मीडिया द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। रियायती दरों पर रूसी तेल के आयात से भारत को प्रति वर्ष केवल 2.5 अरब डॉलर का लाभ होने का अनुमान है। यह पहले अनुमानित 10-25 अरब डॉलर से काफी कम है।

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    रूसी आयात बंद करने पर भारत को सीमित विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ेगा (फोटो: रॉयटर्स)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए के मुताबिक, मीडिया ने रूसी तेल आयात से होने वाले भारत के लाभ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। रियायती दरों पर रूसी तेल के आयात से भारत को प्रति वर्ष केवल 2.5 अरब डॉलर का लाभ होने का अनुमान है। यह पहले अनुमानित 10-25 अरब डॉलर से काफी कम है।

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    रूसी तेल आयात बंद करने से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता भारत को सीमित विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती हैं। सीएलएसए ने कहा कि रियायती रूसी कच्चे तेल से होने वाला शुद्ध लाभ मीडिया रिपोर्टों की तुलना में बहुत कम है।

    ब्रेंट क्रूड की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर

    रिपोर्ट में कहा गया है कि दुबई क्रूड की तुलना में रूसी कच्चे तेल के लिए मुख्य मूल्य छूट इसकी 60 डॉलर की मूल्य सीमा के कारण बड़ी प्रतीत होती है। खासकर ऐसे समय में जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो जाती है।

    रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारतीय आयातकों को होने वाला शुद्ध लाभ इस दिखने वाली छूट से कहीं कम है, क्योंकि रूसी कच्चे तेल के लिए शिपिंग, बीमा और पुनर्बीमा संबंधी कई प्रतिबंध हैं। इसलिए, भारतीय कंपनियां लागत, बीमा और माल ढुलाई के आधार पर रूसी कच्चे तेल का आयात करते हैं। इस तरह, रूसी कच्चे तेल की पहुंच कीमत बहुत कम छूट पर है।'

    भारतीय तेल कंपनियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में रूसी कच्चे तेल की छूट औसतन लगभग 8.5 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह छूट घटकर 3-5 डॉलर रह गई और हाल के महीनों में घटकर लगभग 1.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई है।

    रूस से एक प्रतिशत कच्चा तेल होता था आयात

    यूक्रेन युद्ध के बाद भारत का रूसी तेल आयात नाटकीय रूप से बढ़ गया। युद्ध से पहले जहां भारत रूस से एक प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता था, वहीं यह बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया। यह तीव्र वृद्धि कुछ पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के लिए मास्को को दंडित करने हेतु की गई खरीदारी के बाद रूस द्वारा दी गई भारी छूट के कारण हुई।

    वर्तमान में, भारत अपनी तेल जरूरतों का 36 प्रतिशत रूस से आयात करता है। 2024-25 में 54 लाख बैरल प्रतिदिन आयात में से 36 प्रतिशत (18 लाख बैरल) कच्चा तेल रूस से आया। भारत को कच्चे तेल के अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता सऊदी अरब (14 प्रतिशत), इराक (20 प्रतिशत), संयुक्त अरब अमीरात (9 प्रतिशत) और अमेरिका (4 प्रतिशत) हैं।

    (न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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