'डेड नहीं, भारत एक मजबूत अर्थव्यवस्था', अमेरिकी रेटिंग एजेंसी S&P ने ही लगा दी मुहर
एस एंड पी ग्लोबल ने भारत की संप्रभुता रेटिंग को बीबीबी निगेटिव से बीबीबी कर दिया है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इसका अर्थ है कि भारत में ऋण और निवेश सुरक्षित हैं। एजेंसी ने भारत की अल्पकालिक रेटिंग को भी अपग्रेड किया है जिससे विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। अगले तीन वर्षों में भारत की औसत वृद्धि दर 6.8% रहने का अनुमान है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कुछ दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत करार दे दिया था। अब उन्हीं के देश की वैश्विक रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ग्लोबल ने भारत की संप्रभुता रेटिंग को अपग्रेड करते हुए बीबीबी निगेटिव से बीबीबी कर दिया है।
इसका मतलब यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ सही दिशा में जा रही है और इस देश को ऋण देने से लेकर यहां निवेश करने में जोखिम नहीं है। यह रिपोर्ट हालांकि वित्तीय है लेकिन यह तय है कि इसका असर घरेलू राजनीति पर भी दिखेगा। विपक्ष और खासतौर से राहुल गांधी ने ट्रंप के मृत अर्थव्यवस्था वाले बयान का समर्थन किया था। अब सत्तापक्ष आक्रामक होगा।
क्या है बीबीबी रेटिंग का मतलब?
किसी देश की क्रेडिट रेटिंग उस देश की वित्तीय सेहत को दर्शाता है जो यह बताता है कि इस देश को कर्ज देना या इस देश में निवेश करना कितना सुरक्षित है। बीबीबी रेटिंग का मतलब है कि भारत को अगर कोई देश या वित्तीय एजेंसी कर्ज देती है या कोई निवेशक यहां निवेश करता है तो उसके डूबने का जोखिम बिल्कुल कम है।
इससे भारत में विदेशी निवेश में तेजी आएगी और वैश्विक स्तर पर भारत पर लोगों को भरोसा और मजबूत होगा। गुरुवार को एस एंड पी की तरफ से जारी क्रेडिट रिपोर्ट में भारत की शार्ट टर्म रे¨टग को ए-3 से अपग्रेड करते हुए ए-2 कर दिया गया है।
ए-2 क्रेडिट रेटिंग का मतलब होता कि अगर भारत कोई अल्पकालिक ऋण लेता है तो उस ऋण के समय पर भुगतान की काफी अधिक संभावना है। ए-3 का मतलब भी ऋण की सुरक्षा से है, लेकिन ए-2 और अधिक सुरक्षा को दर्शाता है। किसी देश की पूरी वित्तीय रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के बाद उस देश की रेटिंग तय की जाती है।
अगले तीन साल में भारत की औसत वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान
एस एंड पी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका की तरफ से भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाने से भारत की विकास दर नाममात्र का फर्क पड़ेगा जिसे आसानी से समायोजित किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 प्रतिशत रह सकती है।
आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था और मजबूत होने वाली है। तभी एंड पी ने कहा है कि अगले तीन साल में भारत की औसत वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का अमेरिका में होने वाला निर्यात भारत के जीडीपी का दो प्रतिशत है। भारत के फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को 50 प्रतिशत के टैरिफ से बाहर रखा गया है।
ऐसे में जीडीपी का सिर्फ 1.2 प्रतिशत निर्यात ही अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से प्रभावित होगा। भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है जो 60 प्रतिशत विकास दर घरेलू खपत पर निर्भर है। महंगाई दर काबू में है और पिछले तीन महीनों से यह तीन प्रतिशत से कम चल रही है। जुलाई की खुदरा महंगाई दर 1.55 प्रतिशत के साथ आठ साल के निचले स्तर पर आ गई है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था का शानदार प्रदर्शन रहा है जो यह सब भारत की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी, वित्तीय कर्ज को कम करने और सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार लाने की वजह से संभव हो सका है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत अपने जीडीपी का 3.1 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने वाला है। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि सरकार का सामान्य घाटा जीडीपी के 7.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2029 में 6.6 प्रतिशत हो जाएगा।यूं तो अमेरिकी टैरिफ को लेकर अभी भी थोड़ा असमंजस बना हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि इससे निर्माताओं और निर्यातकों में भी थोड़ा जज्बा बढ़ेगा।
जबकि सत्तापक्ष की ओर से जनता तक यह संदेश देने की कोशिश होगी कि जब विदेशी रेटिंग एजेंसी को भी भारत के सामर्थ पर भरोसा है, कांग्रेस और राहुल गांधी को भारत की शक्ति पर विश्वास नहीं है।
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