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    'अदालतें ध्यान रखें, जो छिन गया वह सिर्फ शारीरिक क्षमता नहीं; बच्चे का भविष्य है', दुर्घटना मुआवजे पर बोला सुप्रीम कोर्ट

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 11:02 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना में स्थायी रूप से विकलांग हुए बच्चों के मुआवजे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। ...और पढ़ें

    दुर्घटना मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी।

    दुर्घटना मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी।


    HighLights

    1. मानव गरिमा जीवन का अभिन्न हिस्सा, सुप्रीम कोर्ट का मत।

    2. विकलांग बच्चे का भविष्य, केवल शारीरिक क्षमता नहीं।

    3. मुआवजा ₹45.40 लाख से बढ़कर ₹83.38 लाख किया गया।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मानव गरिमा जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है और मोटर दुर्घटना मुआवजे से संबंधित कानून के तहत खासकर स्थायी या लगभग पूर्ण विकलांगता का सामना करने वाले बच्चों के मामले विशेष श्रेणी बनाते हैं।

    कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में मुआवजे का निर्धारण करते समय न्यायालयों को ध्यान रखना चाहिए कि जो कुछ छिन गया है, वह केवल शारीरिक क्षमता नहीं है, बल्कि बच्चे का पूरा भविष्य है।

    यह टिप्पणियां सोमवार को जस्टिस उज्जल भुइयां और एनवी अंजरिया की पीठ से एक ऐसे बच्चे के बारे में आईं जो एक सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका संबंधी बेहद गंभीर चोटों का शिकार होकर पूर्ण रूप से विकलांग हो गया।

    पीठ ने उसको मिलने वाले मुआवजे को 45.40 लाख रुपये से बढ़ाकर 83.38 लाख रुपये कर दिया। पीठ ने नोट किया कि जब यह दुर्घटना जून, 2015 में हुई, तब बच्चा केवल छह महीने का था और उसके द्वारा सहन की गई विकलांगता स्थायी और अपरिवर्तनीय थी।

    पीठ ने कहा, "मानव गरिमा जीवन का अभिन्न हिस्सा है। जब एक विनाशकारी चोट एक बच्चे को स्वतंत्र रूप से सामान्य कार्य करने की क्षमता से वंचित कर देती है, तो इससे होने वाला नुकसान शारीरिक विकलांगता के क्षेत्र से परे चला जाता है और गरिमा के निरंतर वंचन के रूप में आकार ले लेता है।"

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    पीठ ने कहा,"इसलिए, चोट केवल शरीर को ही नहीं बल्कि जीवन के अनुभव को भी प्रभावित करती है।" सर्वोच्च न्यायालय ने उस अपील पर अपना निर्णय सुनाया जो बच्चे की मां द्वारा ओडिशा उच्च न्यायालय के जनवरी 2023 के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने मुआवजे को 30.12 लाख रुपये से बढ़ाकर 45.40 लाख रुपये कर दिया था, जिसे कटक में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने अप्रैल 2022 में निर्धारित किया था।

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय को ऐसा दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है जो यथार्थवादी, मानवतावादी और मोटर वाहन अधिनियम (1988) के तहत मुआवजे के लिए स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप हो।

    कार्यात्मक विकलांगता 100 प्रतिशत

    पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में कानून का घायल बच्चों से संबंधित दावों का मूल्यांकन उसी दृष्टिकोण से नहीं कर सकता जो सामान्यतः वयस्कों के मामलों में लागू किया जा सकता है।

    पीठ ने नोट किया कि विकलांगता प्रमाण पत्र के अनुसार, बच्चे को दुर्घटना के कारण 90 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ा है। उसकी कार्यात्मक विकलांगता कुल 100 प्रतिशत है। इसने बीमा कंपनी द्वारा अपीलकर्ता को मिलने वाले मुआवजे को 83.38 लाख रुपये तक बढ़ा दिया।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)