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    'कानून की नजर में अपराध, लेकिन लड़की...', सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दी रेप के दोषी की सजा; जानिए पूरा मामला

    Updated: Fri, 23 May 2025 10:36 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग बलात्कार के एक मामले में अभियुक्त की सजा माफ कर दी है भले ही उसे दोषी ठहराया गया था। अदालत ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए यह फैसला सुनाया क्योंकि पीड़िता ने अभियुक्त से शादी कर ली थी और उनका एक बच्चा भी है। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास का आदेश दिया।

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    सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दी रेप के दोषी की सजा। (फाइल फोटो)

    माला दीक्षित, नई दिल्ली। कई बार कानून धरा रह जाता है और कोर्ट को मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कानून से परे जाकर न्याय करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा ही फैसला सुनाया है। नाबालिग से दुष्कर्म कानून की निगाह में गंभीर अपराध है, लेकिन पीड़िता ऐसा नहीं मानती।

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    पीड़िता ने तो उसे बचाने के लिए ऐड़ी चोटी एक कर दी। कर्ज लेकर लाखों रुपये कानूनी लड़ाई में खर्च कर दिए, छोटी बच्ची साथ लिए दर-दर भटकी। पीडि़ता का संघर्ष देख कर सुप्रीम कोर्ट का दिल पसीज गया। कोर्ट ने अभियुक्त को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी तो ठहराया लेकिन उसकी सजा माफ कर दी है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

    शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 में प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सभी की आंखे खोलने वाला है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में राइट टु प्राइवेसी ऑफ एडोल्सेन्ट के नाम से स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा था। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कानून के मुताबिक, उसके पास अभियुक्त को सजा देकर जेल भेजने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है लेकिन इस मामले में पीड़ता के परिवार ने, समाज ने और कानूनी तंत्र ने पीड़िता के साथ पहले ही बहुत अन्याय किया है, पीड़िता ने बहुत तनाव और कष्ट झेला है अब उसके पति को जेल भेज कर कोर्ट उसके साथ और अन्याय नहीं कर सकता।

    जानिए क्या है पूरा मामला?

    पश्चिम बंगाल के इस मामले में 14 वर्षीय पीड़िता से 25 वर्षीय युवक ने दुष्कर्म किया था जिसके लिए निचली अदालत ने पोक्सो कानून में 20 साल की सजा सुनाई थी। लेकिन केस के तथ्यों के मुताबिक पीड़िता युवक से प्यार करती थी और वह स्वयं घर से भागी थी। उसने अभियुक्त से शादी कर ली है और उसकी अब एक छोटी बच्ची भी है और अब उसकी सारी चिंता अपने पति को बचाने और छोटे से परिवार को साथ रखने की है। ये फैसला न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्जवल भुइयां की पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दाखिल अपील और स्वत: संज्ञान लेकर की जा रही सुनवाई में दिए।

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने की थी विवादित टिप्पणी

    इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने विवादित टिप्पणी की थी और कहा था कि लड़कियों को अपनी सेक्स इच्छा पर नियंत्रण रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस टिप्पणी के आदेश को रद कर दिया था। उस आदेश में हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के जुर्म में पोक्सो कानून में निचली अदालत से अभियुक्त को सुनाई गई 20 साल की कैद की सजा रद कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2024 को विस्तृत फैसला दिया था और हाई कोर्ट का सजा रद करने का आदेश खारिज कर दिया था और निचली अदालत का सजा का आदेश बहाल कर दिया था लेकिन सजा निलंबित रखी थी और तीन सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी बनाई थी उससे रिपोर्ट मांगी थी।

    कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट देखने और न्यायमित्र के सुझाव देखने के बाद यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि कमेटी की रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि पीड़िता घटना को गंभीर अपराध नहीं मानती जिसके कारण उसे इतना झेलना पड़ा। ये सब इसलिए हुआ क्योंकि पीड़िता को शुरुआत में जानकारी नहीं दी गई। ये हमारे समाज की, हमारे कानूनी तंत्र की, और उसके परिवार की खामियों को उजागर करता है।

    पीड़िता के पुनर्वास का कोर्ट ने दिया आदेश

    कोर्ट ने कहा कि मामले को देखने के बाद उन्हें लगता है कि अगर अभियुक्त को जेल भेजा गया तो सबसे ज्यादा पीड़िता ही भुगतेगी। 2018 में जब की यह घटना है उससे अब वह बेहतर स्थिति में है और अपने छोटे से परिवार में आराम से है। वह अभियुक्त के साथ अपनी बेटी पर ध्यान दे रही है और उसे अच्छी शिक्षा देना चाहती है। पीड़िता स्कूल जाने लगी है और आगे पढ़ना चाहती है। कोर्ट ने पीड़िता के पुनर्वास का आदेश देते हुए अभियुक्त की आगे की सजा माफ कर दी। हालांकि कोर्ट ने कहा है कि यह केस भविष्य के लिए नजीर नहीं होगा।

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