टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में साइबर सेंध, एपल और टेस्ला के ट्रेड सीक्रेट्स चुराए
एपल की प्रमुख आपूर्तिकर्ता टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पर वर्ल्डलीक्स रैनसमवेयर समूह ने साइबर हमला किया है। समूह ने डार्क वेब पर एपल और टेस्ला के 2 लाख से अधि ...और पढ़ें

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में साइबर सेंध। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पर वर्ल्डलीक्स रैनसमवेयर समूह का साइबर हमला।
एपल और टेस्ला के 2 लाख से अधिक गोपनीय फाइलें चोरी।
डार्क वेब पर 630 जीबी डेटा पोस्ट करने का दावा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में एपल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में साइबर सेंध का मामला प्रकाश में आया है। वर्ल्डलीक्स नामक रैनसमवेयर समूह ने डार्क वेब पर 2,00,000 से अधिक फाइलें पोस्ट करने का दावा किया है, जिसमें कथित तौर पर एपल और टेस्ला के गोपनीय ट्रेड सीक्रेट्स और स्पेसिफिकेशन शामिल हैं।
हालांकि, समूह ने दावा किया है कि इस साइबर हमले का उसके कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि एपल इस साइबर सेंध की जांच कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि टाटा से इस संबंध में फिरौती मांगी गई थी। हालांकि, जब इस संबंध में टाटा से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उसने कोई जवाब नहीं दिया।
टाटा चीन के बाहर एपल के सबसे जरूरी मैन्यूफैक्चरिंग पार्टनर्स में से एक के तौर पर उभर रहा है। यह एक ऐसा विस्तार है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने के प्रयासों का एक अहम हिस्सा है।
पिछले साल टाटा के ब्रिटिश जगुआर लैंड रोवर समूह पर साइबर हमला हुआ था, जिसके चलते छह सप्ताह तक उत्पादन रुका रहा। भारत के सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाली इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम से जब इस संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। यह टीम साइबर हमलों पर नजर रखती है।
खबरें और भी
इससे पहले वर्ल्ड लीक्स ने नाइकी में सेंधमारी की जिम्मेदारी ली थी। उसने अपनी डार्क नेट वेबसाइट पर कहा कि वह टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से चुराया गया डेटा पब्लिश कर रही थी। वर्ल्ड लीक्स वेबसाइट का कहना है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े डाटा में दो लाख से ज्यादा फाइलें हैं, जिनका कुल आकार 630 गीगाबाइट से ज्यादा है। इसकी वेबसाइट पर एक डेटाबेस में कई कथित एपल फाइलें और फोल्डर्स दिखते हैं।
वर्ल्ड लीक्स से जुड़ी वेबसाइट डार्क वेब या डार्क नेट पर ही एक्सेस की जा सकती है और सर्च इंजन की पहुंच से बाहर है। डेटा डंप की समीक्षा करने वाले एक सिक्योरिटी रिसर्चर राकेश कृष्णन ने बताया कि यह फाइलें 10 जून से डार्क वेब पर एक्सेस की जा रही थीं।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)