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    'लोकतंत्र अंधेरे में मर जाता है...' चार पन्नों की स्याही और वॉटरगेट विस्फोट, वाशिंगटन पोस्ट ने व्हाइट हाउस भी हिलाया

    Updated: Thu, 12 Feb 2026 06:44 PM (IST)

    1877 में चार पन्नों से शुरू हुआ द वॉशिंगटन पोस्ट महामंदी के संकट से उभरा, पेंटागन पेपर्स और वाटरगेट जैसी ऐतिहासिक रिपोर्टिंग से सत्ता को चुनौती दी और ...और पढ़ें

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    ‘Democracy Dies in Darkness’ की कहानी (फोटो: जागरण)

    गुरप्रीत चीमा, नई दिल्ली। The Washington Post… 150 साल का उतार-चढ़ाव से भरा, लेकिन समृद्ध इतिहास... दमदार खबरें, राजनीति की दशा-दिशा बदलने वाली इन्वेस्टिवगेटिव स्टोरीज, जनता को सोचने पर विवश करने वाले लेख। दुनिया में अमेरिका की एक पहचान के तौर पर शामिल रहा The Washington Post इस वक्त अपनी पुरानी पहचान बनाए रखने या नई पहचान के साथ आगे बढ़ने की कशमकश के बीच दोराहे पर खड़ा दिख रहा है

    “Democracy Dies in Darkness.”

    यह सिर्फ एक टैगलाइन नहीं, बल्कि The Washington Post की आत्मा मानी जाती है। 1877 में शुरू हुए इस अखबार ने बहुत कुछ देखा है... कभी दिवालिया हुआ, फिर दोबारा खड़ा हुआ, राष्ट्रपति को पद छोड़ने पर मजबूर किया, सुप्रीम कोर्ट में प्रेस की आजादी की लड़ाई जीती और अब 2026 में एक बार फिर संकट से जूझता दिखाई दे रहा है। दुनिया भर में इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।  

    यह कहानी सिर्फ एक अखबार की नहीं, बल्कि उस ‘पहरेदार’ की है जिसने व्हाइट हाउस को भी हिला दिया था।

    CHAPTER 1: चार पन्ने और एक छोटा-सा सपना (1877-1932)

    तारीख थी 6 दिसंबर 1877 और जगह - अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डी.सी.।  वॉशिंगटन की गलियों में पहली बार एक नाम गूंजा The Washington Post. स्टिलसन हचिंस नाम के एक पत्रकार ने इसकी शुरुआत की थी। उस वक्त यह महज चार पन्नों का छोटा-सा अखबार था, जिसकी कीमत केवल 3 सेंट थी।

    यह कोई विशाल साम्राज्य नहीं, बल्कि स्याही से सनी एक छोटी-सी प्रेस थी, जिसका लक्ष्य था राजधानी की राजनीति का चिट्ठा जनता के सामने रखना। शुरुआती दौर में यह अखबार स्थानीय राजनीति और गपशप का मिश्रण था। लेकिन जैसे-जैसे वॉशिंगटन अमेरिका की शक्ति का केंद्र बना, पोस्ट की अहमियत भी बढ़ती गई।

    सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन फिर वक्त का पहिया घूमा। 1930 के दशक में आई ‘महामंदी’ (Great Depression) ने पूरे अमेरिका को हिला दिया। लोग भूखे मर रहे थे, ऐसे में भला अखबार कौन खरीदता? विज्ञापन बंद हो गए, छपाई का खर्च निकालना मुश्किल हो गया। पोस्ट कर्ज के बोझ तले दब गया और नौबत यहां तक आ गई कि अदालत ने इसे नीलाम करने का आदेश दे दिया।

    Washington Post

    1 जून 1933 को वॉशिंगटन डी.सी. में नीलामी के माध्यम से अखबार खरीदने के बाद यूजीन मेयर को द वॉशिंगटन पोस्ट का नया मालिक घोषित किया गया। (Courtesy: The Washington Post's official Website)

    CHAPTER 2: नीलामी की मेज और एक नई उम्मीद (1933–1954)

    जून 1933 की एक सुबह, यह अखबार एक चौराहे पर खड़ा था। इसकी बोली लग रही थी। हर किसी को लगा कि अब यह कहानी यहीं दफन हो जाएगी। तभी एक शांत और गंभीर शख्स भीड़ से आगे आया, यूजीन मेयर। मेयर एक अमीर बैंकर थे, लेकिन वे इसे केवल बिज़नेस के लिए नहीं खरीद रहे थे।

    मेयर ने इसे 8 लाख डॉलर में खरीदा और इसमें नई जान फूंकी। उन्होंने एक ऐतिहासिक वादा किया: “अखबार का काम सिर्फ खबरें बेचना नहीं, बल्कि बिना डरे और बिना किसी का पक्ष लिए सच बोलना है।” उन्होंने इसे एक ‘पब्लिक ट्रस्ट’ की तरह चलाया। 1940 में उन्होंने इसकी कमान अपने दामाद फिलिप ग्रैहम को सौंपी, जिन्होंने प्रतिद्वंद्वी Times-Herald को खरीदकर पोस्ट को राजधानी का मानो बेताज बादशाह बना दिया।

    CHAPTER 3: एक निडर महिला: जब सत्ता से टकराई कलम (1963-1971)

    कहानी में सबसे बड़ा बदलाव 1963 में आया। फिलिप ग्रैहम की अचानक मौत हो गई और पूरे कारोबार की जिम्मेदारी उनकी पत्नी कैथरीन ग्रैहम पर आ गई। उस समय अखबारों और बड़ी कंपनियों के दफ्तरों में महिलाओं का नेतृत्व करना असामान्य माना जाता था। लोगों को लगा कि कैथरीन यह सब नहीं संभाल पाएंगी। उन्हें कमज़ोर समझा गया।

    लेकिन कैथरीन ने हार नहीं मानी। उन्होंने साबित कर दिया कि वे भीतर से बेहद मजबूत और निडर हैं।

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    कैथरीन ग्राहम (Courtesy: The Washington Post's official Website)

    1971 में उनके सामने पहली बड़ी परीक्षा आई “पेंटागन पेपर्स”। ये सरकार के वे गुप्त दस्तावेज़ थे, जो वियतनाम युद्ध से जुड़े झूठ की पोल खोलते थे। सरकार ने अखबार को धमकी दी कि यदि यह खबर छापी गई, तो अखबार बंद कर दिया जाएगा और कैथरीन को जेल भेज दिया जाएगा।

    कैथरीन ने एक पल के लिए अपनी टीम की ओर देखा और कहा, “छाप दो।”
    यह प्रेस की आज़ादी के लिए एक ऐतिहासिक जीत थी।

    यह भी पढ़ें: भारी छंटनी के बाद वाशिंगटन पोस्ट के CEO विल लुईस ने दिया इस्तीफा, विवादों से रहा पुराना नाता

    CHAPTER 4: ‘वाटरगेट' जिसने राष्ट्रपति को गिरा दिया (1972-1974)

    पेंटागन पेपर्स का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि 1972 में एक नई घटना घटी। वॉशिंगटन की वाटरगेट बिल्डिंग में चोरी करते हुए पांच लोग पकड़े गए। शुरुआत में इसे एक मामूली चोरी माना गया।

    लेकिन अखबार के दो युवा रिपोर्टर्स बॉब वुडवर्ड और कार्ल बर्नस्टीन को शक हुआ कि इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। उन्होंने हार नहीं मानी और एक गुप्त सूत्र की मदद से सच की तह तक जाना शुरू किया।

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    (Courtesy: The Washington Post's official Website)

    जांच में सामने आया कि इस चोरी के तार सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन से जुड़े थे। व्हाइट हाउस ने रिपोर्टरों को डराया, उनकी जासूसी करवाई और हर तरह का दबाव बनाया। लेकिन कैथरीन ग्रैहम अपनी टीम के पीछे चट्टान की तरह खड़ी रहीं।

    नतीजा? 9 अगस्त 1974 को राष्ट्रपति निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा। इतिहास में पहली बार एक अखबार ने दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया था।

    CHAPTER 5: बेजोस का आगमन और डिजिटल क्रांति (2013–2020)

    समय बदला और खबरों की दुनिया कागज से निकलकर स्मार्टफोन की स्क्रीन तक सिमटने लगी। 2013 में एक और बड़ा मोड़ आया, जब अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस ने 250 मिलियन डॉलर में The Washington Post को खरीद लिया।

    Washington Post Owners

    ग्रैहम परिवार के लिए यह विदाई भावुक थी, लेकिन बेजोस ने इस पुराने संस्थान में नई पीढ़ी की डिजिटल रफ्तार और वैश्विक दृष्टि का संचार किया।

    उन्होंने पोस्ट को स्याही और कागज के दायरे से बाहर निकालकर एक ‘ग्लोबल डिजिटल प्लेयर’ के रूप में स्थापित किया। 2016 में जब डोनाल्ड ट्रंप और पोस्ट के बीच वैचारिक टकराव बढ़ा, तो अखबार ने अपनी नई पहचान गढ़ी, “Democracy Dies in Darkness”.

    यह महज एक टैगलाइन नहीं, बल्कि सत्ता की मनमानी के खिलाफ अखबार का ऐलान-ए-जंग था। लोगों को पोस्ट का यह बेबाक अंदाज़ इतना पसंद आया कि लाखों की तादाद में नए पाठक जुड़े और अखबार एक बार फिर सफलता के शिखर पर चमकने लगा।

    CHAPTER 6: 2026 अंधेरा या नई सुबह?

    आज हम 2026 में खड़े हैं और विडंबना देखिए, इतिहास मानो खुद को दोहरा रहा है। जिस अखबार ने राष्ट्रपतियों को चुनौती दी, वह आज अपनी ही बैलेंस शीट से जूझ रहा है। सोशल मीडिया और एआई (AI) के शोर में विज्ञापन का बाजार पूरी तरह बदल चुका है।

    फरवरी 2026 की शुरुआत न्यूज़रूम के लिए दुखद रही। 300 से अधिक अनुभवी पत्रकारों की छंटनी और सीईओ विल लुईस के इस्तीफे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बेजोस का ‘टेक मॉडल’ पत्रकारिता की रूह को बचा पाएगा?

    आज वॉशिंगटन के उस आलीशान दफ्तर में छाई खामोशी 1933 के उस संकट की याद दिलाती है, जहां से एक बार पुनर्जन्म हुआ था।

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    खबर का स्त्रोत: The Washington Post's official Website