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    UGC के नए नियमों पर क्यों मचा घमासान? सेंटर, कमेटी या स्क्वॉड... समझिए न्यू रूल्स से कैसे होगा काम

    Updated: Tue, 27 Jan 2026 08:58 PM (IST)

    UGC New Equity Regulations 2026: Why the Controversy? यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातीय भेदभाव रोकने के लिए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 ...और पढ़ें

    डिजिटल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  (UGC) के नए नियमों का देश भर में विरोध हो रहा है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्‍ली समेत कई राज्‍यों में सवर्ण समाज के संगठनों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। यूजीसी हेडक्वार्टर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कैंपस के बाहर भारी बैरिकेडिंग की गई है।

    रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने नियमों के विरोध में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं।  बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया पर कवि कुमार विश्वास समेत कई सार्वजनिक हस्तियों ने नए नियमों पर तीखा तंज कसा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सरकार का पक्ष रखा है।

    यूजीसी के नए नियमों पर क्यों बवाल मचा है, क्‍या है पूरा विवाद? यूजीसी नियमों को लेकर अपने सभी सवालों के जवाब यहां पढ़ें...

    क्‍या है मामला, क्यों चर्चा में है यूजीसी?

    यूजीसी ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए  13 जनवरी को नए नियमों - 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026' को नोटिफाई किया था।

    इसमें जातीय भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए। मॉनिटरिंग टीमें और विशेष समितियां स्पेशली एससी-एसटी और ओबीसी स्टूडेंट्स की शिकायतों को देखेंगी और सुनेंगी।

    केंद्र सरकार का कहना है कि नियमों में बदलाव उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं, जबकि सवर्ण छात्रों का कहना है कि नए नियम विश्वविद्यालय और कॉलेजों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देंगे। इससे कॉलेजों में अराजकता का माहौल बनेगा।

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    यूजीसी के नए नियम क्‍या हैं?

    • हर एक विश्वविद्यालय और कॉलेज में समान अवसर केंद्र  (Equal Opportunity Centre - EOC) बनाना अनिवार्य।
    • EOC वंचित व पिछड़े स्टूडेंट्स  अकादमिक, आर्थिक और सामाजिक मदद करेगी। भेदभाव की शिकायतें भी देखेगी।
    • हर संस्‍थान को समता समिति  (Equity Committee) बनानी होगी।
    • कमेटी के अध्‍यक्ष -विश्वविद्यालय/कॉलेज प्रमुख होंगे।
    • सदस्‍य - वरिष्ठ प्रोफेसर, गैर-शिक्षक कर्मचारी और नागरिक समाज प्रतिनिधि होंगे।
    • कमेटी में  SC/ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग प्रतिनिधियों को भी रखा जाएगा।
    • Equity Committee का कार्यकाल दो साल का होगा।
    • विश्वविद्यालय/कॉलेज  में एक इक्विटी स्क्वॉड भी बनाया जाएगा, जो भेदभाव पर नजर रखेगा।
    • हर विभाग /हॉस्टल में इक्विटी एंबेसडर (Equity Ambassador) नॉमिनेट करने होंगे।
    • सभी उच्च संस्थानों में 24×7 ओपन रहने वाली इक्विटी हेल्पलाइन होनी चाहिए।
    • सभी उच्च संस्थानों को ऑनलाइन पोर्टल बनाना होगा, जहां लिखित या ई-मेल दर्ज की जा सके।

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    शिकायत कैसे होगी?

    पीड़ित ऑनलाइन पोर्टल, ई-मेल  या फिर समता समिति के पास जाकर लिखित शिकायत कर सकता है। इक्विटी हेल्पलाइन कॉल करके भी शिकायत दर्ज करवा सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

    एक्शन की टाइमलाइन क्या है?  

    • भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग करना अनिवार्य होगी।
    • कमेटी को जांचकर 15 दिन के भीतर रिपोर्ट संस्‍थान प्रमुख (कमेटी प्रमुख) को देनी होगी।
    • कमेटी प्रमुख को रिपोर्ट मिलने के 7 दिन के भीतर आगे की कार्रवाई करनी होगी।
    UGC New Rules

    नए नियम के तहत क्‍या कार्रवाई होगी?

    • संस्थान अपने नियमों के तहत दोषियों पर एक्‍शन लेगा।
    • जरूरत पड़ने पर अन्य UGC कमेटी या कानून के तहत जांच कराई जाएगी।
    • अगर आपराधिक मामला बनता है तो तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी।
    • समान अवसर केंद्र हर 6 महीने में कॉलेज को रिपोर्ट देगा।
    • सभी संस्‍थानों को जातीय भेदभाव पर हर साल यूजीसी को रिपोर्ट भेजनी होगी।

    नियम तोड़ने पर क्या होगा?

    • यूजीसी नेशनल मॉनिटरिंग कमेटी बनेगी, जो UGC कैंपस का निरीक्षण कर सकती है।
    • नियम तोड़ने पर विश्वविद्यालय/कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है।
    • विश्वविद्यालय/कॉलेज की डिग्री, ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स पर रोक लगाई जा सकती है।
    • गंभीर मामलों में यूजीसी की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
    • अगर मामला गंभीर है तो दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।

    झूठी शिकायत पर क्या सजा है?

    यूजीसी के नए नियमों में झूठी शिकायत पर अलग से सजा का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

    पीड़ित फैसले से असंतुष्ट नहीं हो तो?

    अगर शिकायतकर्ता फैसले से असंतुष्ट नहीं है तो वह 30 दिन के भीतर लोकपाल (Ombudsperson) के पास अपील कर सकता है।

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    यूजीसी के नए नियमों का क्‍यों हो रहा विरोध?

    भेदभाव की एकतरफा परिभाषा: नए नियमों में एससी/एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग शामिल हैं, लेकिन जनरल कैटेगरी के सदस्य को समति में नहीं रखा गया है। यानी कि जनरल कैटेगरी को पीड़ित नहीं माना गया है, सिर्फ आरोपी माना जा सकता है। इससे कमेटी के फैसले एकतरफा होने का डर जताया जा रहा है।

    झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान नहीं: नए नियम के तहत झूठी अथवा फर्जी शिकायत करने वालों के लिए न कोई जुर्माना का प्रावधान है और न सजा का। ऐसे में नियमों को गलत तरीके से इस्तेमाल करने की आशंका जताई जा रही रही है।

    24 घंटे में एक्शन का नियम: शिकायत पर 24 घंटे के भीतर बैठक कर कार्रवाई शुरू करने का नियम है। विरोध करने वालों का कहना है कि जल्दबाजी में फैसले और गलत आरोपों का खतरा बढ़ेगा।

    सजा का डर, संस्‍थान और सही फैसला: नियम का उल्लंघन होने पर संस्थान की ग्रांट रोकने और मान्यता रद्द करने का प्रावधान है। ऐसे में माना जा रहा है कि ग्रांट और मान्‍यता रद्द होने के चलते संस्थान इमोशंस देखकर फैसला दे सकता है, फैक्‍ट अथवा कॉलेज मेरिट के आधार पर निर्णय लेने से बच सकते हैं।

    यूजीसी एक्ट 1956 से बाहर जाने का आरोप: नए नियमों का विरोध करने वालों का कहना है कि यूजीसी एक्ट अकादमिक मानकों तक सीमित है। एक्ट में जातीय भेदभाव या उत्पीड़न पर सीधे नियम बनाने की बात नहीं है।

    बिंदु UGC गाइडलाइंस 2012 2026 के नए बदलाव (प्रस्तावित/संशोधित)
    उद्देश्य  एससी/एसटी छात्रों के खिलाफ भेदभाव रोकना। सभी प्रकार के भेदभाव (जाति, ओबीसी, धर्म, जेंडर, दिव्यांग, जातीयता, जन्म स्थान आदि) को रोकना।
     कवर समूह मुख्यतः एससी/एसटी छात्र।  एससी, एसटी,  ओबीसी, जेंडर माइनॉरिटी, दिव्यांग।
     संस्थागत ढांचा केवल Anti-Discrimination Officer और Equal Opportunity Cell ईओसी, समता कमेटी, Equity Squads, Equity Ambassadors और 24×7 हेल्पलाइन
     रिपोर्टिंग सिस्टम अनिवार्य सार्वजनिक रिपोर्ट का प्रावधान नहीं UGC को सालाना रिपोर्ट और हर 6 महीने में सार्वजनिक रिपोर्ट देना अनिवार्य
    दंड प्रावधान कमजोर या केवल सांकेतिक दंड फंडिंग रोकना, डिग्री देने का अधिकार खत्म करना और मान्यता रद्द करना जैसे सख्त कदम
    कानूनी स्थिति केवल परामर्शदात्री कानूनी रूप से बाध्यकारी


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