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    'ट्रंप का टैरिफ अटैक भी नहीं रोक सकता भारत की स्पीड', अमेरिकी एजेंसी ने बताई चौंकाने वाली वजह

    Updated: Thu, 14 Aug 2025 09:26 AM (IST)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर भारी टैरिफ लगाने के बावजूद SP ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार भारत की आर्थिक प्रगति पर कोई खास असर नहीं होगा। भारत का सॉवरेन रेटिंग आउटलुक सकारात्मक बना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था इस झटके को आसानी से झेल लेगी क्योंकि अमेरिका को निर्यात जीडीपी का सिर्फ 2% है।

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    पिछले साल मई में S&P ने भारत की सॉवरेन रेटिंग 'BBB-' को सकारात्मक आउटलुक दिया था। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर भारी भरकम टैरिफ लगाए हैं। इसके बाद भारतीय निर्यातकों में मायूसी छा गई है, लेकिन S&P ग्लोबल रेटिंग्स के डायरेक्टर यीफार्न फुआ का कहना है कि इससे भारत की आर्थिक तरक्की पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भारत का सॉवरेन रेटिंग आउटलुक सकारात्मक बना रहेगा।

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    गौरतलब है कि रूस से तेल खरीदने की पेनाल्टी के तौर पर अमेरिका ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। 25 फीसदी टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो चुका है और बाकी 25 फीसदी 28 अगस्त से शुरू होगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था इस झटके को आसानी से झेल लेगी।

    फुआ ने बुधवार को एशिया-पैसिफिक सॉवरेन रेटिंग्स पर वेबिनार में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था व्यापार पर ज्यादा निर्भर नहीं है। अमेरिका को भारत का निर्यात जीडीपी का सिर्फ 2 फीसदी है। इसलिए इन टैरिफ का भारत की आर्थिक रफ्तार पर कोई बड़ा असर नहीं होगा।

    क्यों नहीं पड़ेगा भारत पर असर?

    पिछले साल मई में S&P ने भारत की सॉवरेन रेटिंग 'BBB-' को सकारात्मक आउटलुक दिया था। इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक तरक्की थी।

    S&P की ताजा भविष्यवाणी के मुताबिक, भारत की जीडीपी ग्रोथ इस वित्तीय वर्ष में 6.5 फीसदी रहेगी। ये पिछले साल के बराबर है। फुआ ने बताया कि फार्मास्यूटिकल्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे बड़े निर्यात क्षेत्रों को टैरिफ से छूट दी गई है।

    उन्होंने कहा, "लंबे समय में हमें नहीं लगता कि ये टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होंगे। इसलिए भारत का सकारात्मक आउटलुक बरकरार रहेगा।"

    निवेश पर भी असर नहीं

    जब फुआ से पूछा गया कि क्या अमेरिकी टैरिफ भारत में निवेश को प्रभावित करेंगे, तो उन्होंने कहा कि 'चीन प्लस वन' रणनीति के तहत कंपनियां पिछले कुछ सालों से भारत में कारोबार बढ़ा रही हैं। ये कंपनियां ज्यादातर भारत की विशाल घरेलू मांग को पूरा करने के लिए यहां आ रही हैं, न कि सिर्फ अमेरिका को निर्यात करने के लिए।

    फुआ ने कहा, "कई कंपनियां भारत में इसलिए निवेश कर रही हैं क्योंकि यहां मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ रहा है। जो लोग भारत में निवेश कर रहे हैं, उनका मकसद सिर्फ अमेरिकी बाजार नहीं है।"

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