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    ट्रंप के टैरिफ से घर, बिजनेस और कर्मचारियों पर क्या होगा असर? जानिए क्या कहती है रिपोर्ट

    By Agency Edited By: Prince Gourh
    Updated: Mon, 11 Aug 2025 06:56 PM (IST)

    रियल्टी कंसल्टेंट एनाराक के अनुसार अमेरिकी टैरिफ से छोटे व्यवसायी और उनके कर्मचारियों की आय प्रभावित होगी जिससे किफायती घरों की बिक्री पर असर पड़ सकता है। MSME में बनाई जाने वाली वस्तुएं अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले माल का एक बड़ा हिस्सा हैं और टैरिफ से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी। कोरोना के बाद किफायती घरों की बिक्री में पहले ही गिरावट दर्ज की गई है।

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    अमेरिकी टैरिफ का किफायती घरों के बाजार पर क्या होगा असर (फाइल फोटो)

    पीटीआई, नई दिल्ली। भारतीय निर्यात पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ से किफायती घरों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। रियल्टी कंसल्टेंट एनाराक के अनुसार, टैरिफ से छोटे व्यवसायी और उनके कर्मचारियों की आय प्रभावित होगी। यही वह वर्ग है जो 45 लाख रुपये तक की आवासीय संपत्तियों के प्रमुख खरीदार होता है।

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    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) में बनाई जाने वाली वस्तुएं अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले माल का एक बड़ा हिस्सा हैं। इन पर उच्च टैरिफ का मतलब होगा कि उनके उत्पाद कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में व्यावसायिक आर्डर कम होंगे और बदले में इन उद्यमों में काम करने वाले कर्मचारियों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

    कोरोना के बाद गिरावट दर्ज

    एनाराक ने बताया कि कारोना महामारी के बाद किफायती घरों की बिक्री और लांच में पहले ही गिरावट है। एनाराक के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में सात प्रमुख शहरों में बेची गई 1.9 लाख आवास इकाइयों में से केवल 34,565 इकाइयां ही किफायती श्रेणी में थीं।

    एनाराक ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एमएसएमई वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत और निर्यात में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

    अमेरिकी टैरिफ से क्या प्रभाव पड़ेगा

    अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से एमएसएमई और उनके कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। सलाहकार ने कहा कि भारत के एमएसएमई और एसएमई में कार्यरत कर्मचारी किफायती आवास के प्राथमिक ग्राहक हैं।

    टैरिफ के चलते इस विशाल कार्यबल की भविष्य की आय में व्यवधान के कारण, किफायती आवास की मांग पटरी से उतर सकती है और इस अत्यधिक आय-संवेदनशील सेगमेंट में बिक्री को और प्रभावित कर सकती है। प्रशांत ठाकुर, कार्यकारी निदेशक, एनाराक

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