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    WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मचा बवाल, सरकार ने अब टेलीग्राम और सिग्नल को भी भेजा नोटिस

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 10:59 PM (IST)

    सरकार ने यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की जांच का दायरा बढ़ाया है, जिसके तहत व्हाट्सएप के बाद अब टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजे गए हैं। ...और पढ़ें

    (यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूजरनेम फीचर को लेकर वाट्सएप को नोटिस भेजने के बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अब टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों प्लेटफार्मों के मौजूदा यूजरनेम फीचर पर सवाल उठाए गए हैं और पूछा है कि ये प्लेटफार्म धोखाधड़ी और नकली पहचान से जुड़ी चिंताओं को कैसे दूर कर रहे हैं।

    केंद्र सरकार ने बुधवार को वाट्सएप पर यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया था। इसमें चिंता जताई गई थी कि इससे आनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और नकली पहचान की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हो सकती है।

    सरकार ने वाट्सएप को यह फीचर तब तक रोकने का निर्देश भी दिया था जब तक कि इस मुद्दे पर "सरकार की संतुष्टि" तक विचार-विमर्श पूरा न हो जाए। सरकार ने अब अपनी जांच का दायरा दूसरे मैसेजिंग प्लेटफार्म तक भी बढ़ा दिया है।

    सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम और सिग्नल को नोटिस भेजा है, जिनमें पहले से ही यूजरनेम फीचर मौजूद है। नोटिस में सरकार ने पूछा है कि उन्हें यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए और वे धोखाधड़ी व नकली पहचान से जुड़ी चिंताओं का समाधान कैसे कर रहे हैं।

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    गौरलतब है कि भारत सरकार ने हाल में टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक रोक लगा दी थी। इसकी वजह यह थी कि यह प्लेटफार्म लीक हुए और फर्जी नीट पेपर, गुमराह करने वाली सामग्री और इस परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का प्रसार रोकने में नाकाम रहा था। हालांकि, रोक हटने के बाद भारत में यह प्लेटफार्म फिर चालू हो गया है।

    वाट्सएप ने किया साफ, वैकल्पिक होगा यूजरनेम फीचर

    मेटा के मैसेजिंग प्लेटफार्म वाट्सएप ने स्पष्ट किया है कि उसका आगामी यूजरनेम फीचर वैकल्पिक होगा। साथ ही दोहराया कि नकली पहचान, घोटाले और अनचाहे संपर्क को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

    वाट्सएप 'एक्स' पर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के जवाब दिए। कंपनी ने कहा कि यूजर्स के लिए यूजरनेम बनाना जरूरी नहीं होगा। साथ ही मौजूदा इंस्टाग्राम व फेसबुक यूजरनेम और मशहूर हस्तियों, सेलिब्रिटी, सरकारी संस्थाओं और मेटा वेरिफाइड अकाउंट्स के यूजरनेम रिजर्व कर लिए गए हैं, ताकि उन पर सिर्फ उनके असली मालिक ही दावा कर सकें।

    कंपनी ने आनलाइन फैल रही उन बातों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि मशहूर यूजरनेम कोई भी रिजर्व कर सकता है। कंपनी ने कहा कि मशहूर हस्तियों के नाम और उनसे मिलते-जुलते नामों पर सिर्फ उनके असली मालिक ही दावा कर पाएंगे।

    वाट्सएप के मुताबिक, यूजरनेम अभी मैसेजिंग के लिए उपलब्ध नहीं हैं। जब इस वर्ष के अंत में यह फीचर लांच होगा, तो अनजान यूजर के मैसेज का जवाब देने का फैसला करने से पहले यूजर्स को कुछ जानकारी प्रदर्शित की जाएगी, जैसे भेजने वाले का देश, क्या अकाउंट नया है और क्या वे कामन ग्रुप्स में हैं।

    इसके अलावा कंपनी ने बताया कि फोन नंबर की तरह यूजरनेम को सर्च नहीं किया जा सकेगा। साथ ही यूजर्स एक अतिरिक्त "यूजरनेम-की" भी सक्रिय कर सकेंगे, जिसके लिए किसी के कांटैक्ट शुरू करने से पहले यूजरनेम और यूजरनेम-की, दोनों की जरूरत होगी।

    वाट्सएप के नए फीचर से खड़ी हो सकती हैं नई मुसीबतें : दुग्गल

    साइबर सुरक्षा कानून पर अंतरराष्ट्रीय आयोग के चेयरमैन पवन दुग्गल ने गुरुवार को चेतावनी दी कि अगर वाट्सएप का प्रस्तावित यूजरनेम फीचर भारत के नए और कड़े डाटा सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन नहीं करता है, तो इससे निजता उल्लंघन की कई नई समस्याएं (पैंडोरा बाक्स) खड़ी हो सकती हैं।

    दुग्गल ने कहा कि वाट्सएप को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका यूजरनेम फीचर इन्फारमेशन टेक्नोलाजी एक्ट, 2000 और डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 व इसके 2025 के नियमों के मुताबिक हो। उन्होंने कहा कि सरकार की चिंता बहुत साफ है, वह नहीं चाहती कि भारतीयों को बड़ी टेक कंपनियों की प्रयोगशालाओं में प्रयोग का जरिया बनाया जाए।

    वाट्सएप के बहुत बड़े यूजर बेस (भारत में 50 करोड़) की वजह से भारतीय कानून के तहत इसे 'महत्वपूर्ण इंटरनेट मीडिया इंटरमीडियरी' माना जाता है। इस श्रेणी में आने की वजह से प्लेटफार्म को मिलने वाली सामान्य छूट खत्म हो जाती है और उस पर सख्त नियामक निगरानी लागू होती है।

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