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    815 सीटें और 272 महिला सांसद: 8 आसान पॉइंट्स में समझें महिला आरक्षण का वो गणित, जो सब बदल देगा

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 05:36 PM (IST)

    भारत की संसद अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है। लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 815 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ...और पढ़ें

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    आसान पॉइंट्स में समझें महिला आरक्षण का पूरा गणित। फोटो- AI जेनरेटेड

    डिजिटल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। देश की आधी आबादी को सत्‍ता में बराबरी का हक दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने आज यानी गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन अहम बिल लोकसभा में पेश कर दिए हैं, जिन पर फिलहाल चर्चा जारी है। इन तीनों विधेयकों पर वोटिंग कल होगी।

    संशोधन विधेयकों के जरिए राजनीति में महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने, सीटों के परिसीमन और संरचना में बदलाव की तैयारी है।

    ये विधेयक इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं, क्‍योंकि अभी तक महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सीमित रही है। ऐसे में यह केवल कानून का संशोधन नहीं, बल्कि महिलाओं की राजनीतिक ताकत और प्रतिनिधित्व को नई दिशा देने वाला बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

    अब सवाल आता है कि महिला आरक्षण में क्या बदलाव हो रहा है और यह क्‍यों जरूरी है? आइए इसे आठ बिंदुओं में सरल भाषा में समझते हैं।

    क्‍या है महिला आरक्षण बिल?

    प्रस्‍तावित महिला आरक्षण संशोधन विधेयक यानी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (106वां संविधान संशोधन ) और परिसीमन विधेयक-2026 दोनों बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का अधिकार देता है।

    Women Reservation Bil

    ये क्‍यों इतना जरूरी हैं?

    आजादी को 79 साल होने वाले हैं, लेकिन देश की आधी आबदी का संसद अभी प्रतिनिधित्व मात्र 14 प्रतिशत के आसपास ही है। महिलाओं के नीति निर्धारण में करने में पुरुषों का ही बहुमत रहता है। ऐसे में जरूरी है कि नीति निर्धारण में लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    बिल पास हुए और कानून बना तो क्‍या बदलेगा?

    अगर संसद में तीनों विधेयक पारित हो जाते हैं और कानून बन जाते हैं तो सबसे बड़ा बदलाव संसद में नजर आएगा। अभी लोकसभा में 543 सीटें है और वर्तमान में लोकसभा में केवल 78 महिला सांसद हैं। बिल पास होने के बाद लोकसभा सीटों की संख्‍या बढ़ाकर 815 की जाएगी।

    नए नियम के मुताबिक,  815 सीटों वाली लोकसभा में 272 महिला सांसद होंगी। यह बदलाव भारत को दुनिया के सबसे बड़े महिला प्रतिनिधित्व वाले लोकतंत्र में शामिल कर देगा।

    Women Reservation

    लोकसभा सीटें कैसे बढ़ेंगी?

    लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 815 करने के लिए  जनसंख्या के आधार पर परिसीमन (Delimitation) कराया जाएगा और यह काम परिसीमन आयोग द्वारा होगा।

    पहले क्‍यों नहीं बढ़ाई गई सीटें?

    देश के पहले लोकसभा चुनाव 489 सीटों पर हुए थे। इसके बाद समय-समय पर जनसंख्‍या और राज्‍यों के पुनर्गठन के साथ सीटों की संख्या बढ़ाई गई।

    • 1957 दूसरा चुनाव -  494 सीटें
    • 1962 तीसरा चुनाव - 494 सीटें
    • 1967 चौथा चुनाव -  520 सीटें
    • 1971 पांचवां चुनाव - 518 सीटें
    • 1977 छठवा चुनाव -  542 सीटें
    • 1980  सातवां चुनाव  - 543 सीटें


    1976 में परिवार नियोजन कार्यक्रमों के कारण राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सीटों की संख्या को 2001 तक के लिए फ्रीज कर दिया गया था। 2001 में फिर से समय सीमा बढ़ाकर 2026 तक के लिए कर दी गई थी। साल 1971 की जनगणना के बाद से अब तक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में तो बदलाव हुआ, लेकिन कुल सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई।

    Parliament session

    महिला आरक्षण कब से लागू होगा?

    केंद्र सरकार का लक्ष्‍य महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरी तरह लागू करना है। आज संसद के विशेष सत्र में विधेयक पेश कर दिए गए हैं और कल यानी 17 अप्रैल को इन पर वोटिंग होगी।

    क्या पहले नहीं हुई इसके लिए कोशिशें?

    • 1996 में केंद्र की देवेगौड़ा सरकार ने पहली बार संसद में महिला आरक्षण बिल पेश किया था, लेकिन बिल पास नहीं हुआ था।
    • 1998-2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कई बार प्रयास किए , लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते बिल पास नहीं हो सका था।  
    • 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार के समय महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पास हुआ, लेकिन लोकसभा में अटक गया था।
    • 2023 में नरेंद्र मोदी सरकार ने नए संसद भवन में पारित कराया।

    अब संसद में पेश क्‍यों हो रहा है?

    केंद्र सरकार ने संशोधन विधेयक में परिसीमन को साल 2011 की जनगणना से जोड़कर और 2026 के बाद वाली जनगणना की अनिवार्य शर्त को हटाकर इसे फास्ट ट्रैक कर दिया है। इसके साथ ही सीटों की संख्या बढ़ाकर इसे राजनीतिक रूप से अधिक स्वीकार्य बनाया गया है ताकि पुरुष सांसदों की सीटें भी न छिनें।

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