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    युमनाम खेमचंद सिंह ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की शुरुआत

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 02:00 AM (IST)

    मणिपुर में लगभग एक वर्ष से जारी राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया है। भाजपा नेता युमनाम खेमचंद ¨सह ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण क ...और पढ़ें

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    मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म, भाजपा के नेतृत्व में बनी नई सरकार (फोटो- एक्स)

    पीटीआई, इंफाल। मणिपुर में लगभग एक वर्ष से जारी राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया है। भाजपा नेता युमनाम खेमचंद ¨सह ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की। वह अनुभवी राजनेता, कुशल प्रशासक और ताइक्वांडो ब्लैक बेल्ट हैं। कुकी समुदाय के भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक एल. दिखो ने उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

    मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण पिछले वर्ष नौ फरवरी को बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। तब से यह अशांत राज्य राष्ट्रपति शासन के अधीन था।

    राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के कुछ घंटों बाद बुधवार शाम यहां लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 62 वर्षीय खेमचंद को शपथ दिलाई।

    भाजपा के गोविंददास कोंथौजम और नेशनल पीपुल्स पार्टी के के. लोकेन सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली। उपमुख्यमंत्री के तौर पर किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअली शपथ ली।

    इससे पहले मंगलवार को मणिपुर के भाजपा विधायक दल ने नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में खेमचंद सिंह को अपना नेता चुना था। बैठक में भाजपा के 37 में से 35 विधायकों के अलावा पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी संबित पात्रा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी आदि भी शामिल हुए थे।

    दो विधायक बीमारी के कारण बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन में एक और बैठक हुई थी, जिसमें मणिपुर में राजग के घटक दलों नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के छह, नाग पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के पांच और तीन निर्दलीय विधायकों के अलावा भाजपा विधायक शामिल हुए थे।

    गौरतलब है कि मणिपुर में तीन मई, 2023 को तब जातीय हिंसा शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। यह मार्च मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में निकाला गया था। तब से इस हिंसा में कुकी व मैतेई दोनों समुदायों के सदस्यों और सुरक्षाकर्मियों समेत 260 लोग मारे गए हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हुए हैं।

    लंबे समय तक आरएसएस पदाधिकारी रहे हैं खेमचंद

    खेमचंद सिंह लंबे समय से आरएसएस के पदाधिकारी और संगठन पर ध्यान देने वाले नेता रहे हैं। राजनीति के अलावा वह ताइक्वांडो फेडरेशन आफ इंडिया के उपाध्यक्ष रहे हैं और पूर्वोत्तर में इसे बढ़ावा देने में शामिल रहे हैं। वह दशकों से राजनीति में हैं, लेकिन वह पहली बार 2017 में इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई सीट से विधायक बने थे।

    मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के पहले कार्यकाल में वह विधानसभा स्पीकर चुने गए थे। 2022 में उनके दूसरे कार्यकाल में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 2012 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार से हार गए थे। 2013 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे।