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    ओडिशा के सोनपुर कॉलेज के छात्र 100 में 105 अंक देख चौंके छात्र, परिणाम की गड़बड़ी से भविष्य पर संकट

    By Santosh Kumar PandeyEdited By: Shashank Baranwal
    Updated: Thu, 26 Feb 2026 07:00 AM (IST)

    ओडिशा के सुबर्नपुर जिले के सोनपुर कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षा परिणामों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। छात्रों को 100 में से 105 अंक तक मिले, जबकि कई के ...और पढ़ें

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    सोनपुर कॉलेज के छात्र

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    जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के सुबर्नपुर जिले के सोनपुर कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षा परिणाम में भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद छात्र-छात्राओं में रोष व्याप्त है। 100 अंकों के प्रश्नपत्र में 102, 103 यहां तक कि 105 अंक दर्ज होने से विद्यार्थियों के होश उड़ गए। वहीं कई छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) के अंक कम कर दिए जाने की भी शिकायत सामने आई है।

    यह मामला राजेंद्र यूनिवर्सिटी ,बलांगीर से संबद्ध प्रथम सेमेस्टर परीक्षा परिणाम से जुड़ा है। परिणाम जारी होते ही छात्रों ने अंक तालिका में असामान्य आंकड़े देखे। कुछ छात्रों को पूर्णांक से अधिक अंक दिए गए हैं, जबकि कई के इंटरनल अंक बिना स्पष्ट कारण घटा दिए गए हैं।

    इतिहास ऑनर्स की छात्रा स्मिता रानी होता ने बताया कि उनके एक पेपर में 100 में 101 अंक अंकित हैं, जबकि 40 अंकों के आंतरिक मूल्यांकन में पांच अंक कम दर्शाए गए। छात्र सुमंत जगदला ने भी कहा कि नियमित कक्षाओं में उपस्थिति और बेहतर प्रदर्शन के बावजूद इस प्रकार की त्रुटि समझ से परे है। छात्रों का आरोप है कि शिकायत करने पर भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    कॉलेज के प्राचार्य राधाकांत नाइक ने स्वीकार किया कि परिणाम में तकनीकी त्रुटियां हुई हैं। उन्होंने बताया कि छात्रों से प्राप्त विवरण विश्वविद्यालय को भेज दिया गया है। विश्वविद्यालय स्तर पर जांच के बाद लगभग 15 दिनों के भीतर त्रुटियों को सुधारने का आश्वासन दिया गया है। प्रारंभिक तौर पर इसे डेटा एंट्री या पोर्टल अपलोड की गलती माना जा रहा है।

    भविष्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

    शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही छात्रों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन तथा प्लेसमेंट के दौरान अंकतालिका महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। यदि अंकपत्र में त्रुटि बनी रहती है तो छात्रों को सत्यापन के समय कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

    छात्रों ने मांग की है कि न केवल इस बार की त्रुटि तत्काल सुधारी जाए, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए मूल्यांकन और परिणाम प्रकाशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया जाए। इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और अभिभावकों में भी चिंता बढ़ा दी है।

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