Commonwealth Games 2026: उम्मीद से बढ़कर रहा मुक्केबाजों-जूडोकाओं का प्रदर्शन, पैरा एथलीट्स ने भी दिलाई जबरदस्त सफलता
ग्लास्गो में संपन्न कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 मेडल जीते। भारतीय मुक्केबाजों और जूडोकाओं ने खूब प्रभावित क ...और पढ़ें

मुक्केबाजों और जूडोकाओं ने किया प्रभावित

समय कम है?
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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों का मेला ग्लास्गो से उठ चुका है, अब मुलाकात होगी चार साल बाद अहमदाबाद में। आनन-फानन में मेजबानी मिलने के बाद ग्लास्गो ने इन खेलों का साइज आधा कर दिया, लेकिन भारतीय मुक्केबाजों और जूडोकाओं ने इसका असर पदक तालिका पर नहीं पड़ने दिया और इनकी रिकॉर्ड तोड़ सफलता को साथ मिला पैरा एथलीट्स का।
भारतीय दल ग्लास्गो से 39 पदकों के साथ घर लौटा। ग्लास्गो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को सबसे ज्यादा पदक दिलाने वाले कुश्ती, निशानेबाजी, बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेल नहीं थे। खेलों की शुरुआत से पहले कम ही लोगों ने सोचा था कि भारतीय दल इस बार शीर्ष-5 में रह पाएगा, लेकिन 122 सदस्यों वाले भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीत, ऐसी आशंकाओं को निर्मूल साबित कर दिया।
खूब गूंजी मुक्कों की धमक
ग्लास्गो खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। हालांकि, लोग कहते हैं कि इन खेलों में मुक्केबाजी का स्तर बहुत ऊंचा नहीं होता, लेकिन हमारे मुक्केबाज जो सामने आएगा उसी से तो खेलेंगे ना? यही हुआ और जो भी सामने पड़ा, खूब पिटा।
भारत ने यहां सात स्वर्ण पदक अपने नाम किए, लवलीना बोर्गोहाइन और जादुमणी सिंह नहीं हारते तो यह आंकड़ा नौ तक पहुंच जाता। राष्ट्रमंडल खेलों में दांव पर 14 स्वर्ण पदक थे यानी भारत ने आधे पदक अकेले ही जीत लिए।
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जूडो के दांव भी चले
भारतीय प्रशंसकों को लंबे समय से जूडो में एक धमाकेदार प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन ये प्रदर्शन आ नहीं पा रहा था और इस बार खेलों से ठीक पहले जब दो जुडोका डोप के चलते बाहर हो गए तो लगा कि इस बार भी उम्मीदें पूरी नहीं होंगी, लेकिन ग्लास्गो पहुंचे भारतीय जुडोकाओं के इरादे अलग थे।
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदक जीत इतिहास रचा तो यामिनी मौर्या ने चांदी और उन्नति शर्मा ने कांसा कमाया।
पैरा का पावर
पैरा एथलीटों ने ग्लास्गो खेलों में भारतीय पैरा खेलों के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सात पदक जीते। इसमें तीन स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक शामिल रहे। भारत ने इन खेलों के इतिहास में इससे पहले कुल सात पदक ही जीते थे और इस बार एक ही राष्ट्रमंडल में हमने इतने पदक अपने नाम कर लिए।
ट्रैक एंड फील्ड का हाल
ट्रैक एंड फील्ड में भारतीय दल का हाल ठीकठाक ही रहा। स्वर्ण पदक की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा का चांदी जीतना निराशाजनक रहा तो तेजस्विन शंकर ने घुटने की चोट से जूझते हुए डेकाथालान में कांसा जीतकर दिल खुश कर दिया। गुलवीर सिंह ने दो पदक जीते तो मुरली श्रीशंकर ने राष्ट्रमंडल खेलों में एक बार फिर से चांदी जीती। ट्रैक एंड फील्ड से भारत ने इस बार पांच रजत और इतने ही कांस्य पदक जीते।
इनके अलावा भारत ने भारोत्तोलन में आठ पदक जीते, मीराबाई चानू के खाते में स्वर्ण (आना ही था) आया जबकि ऋषिकांत सिंह, अजय बाबू और लवप्रीत ने खेलों का रिकॉर्ड बनाते हुए चांदी जीती।
हालांकि, इन खेलों में आए ज्यादातर पदकों का एशियाड या ओलिंपिक पदक में बदलना पक्का नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में आए पदकों को नकारा भी नहीं जा सकता।
कम क्यों हुए खिलाड़ी?
भारत शुरुआत में 125 सदस्यीय दल भेजने वाला था, लेकिन अंत में हमारे 122 एथलीट ही ग्लास्गो खेलों में गए। डोपिंग के चलते अरुण कुमार और व्हेयरअबाउट फेल्यार के चलते तूलिका मान के रूप में दो जुडोका को दल से बाहर किया गया जबकि दिलबाग सिंह को भारत के चार भारोत्तोलकों के डोपिंग में फेल होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।
इन भारोत्तोलकों के चलते नियमानुसार भारतीय भारोत्तोलन दल का एक स्लॉट कम हो गया और दिलबाग मेरिट पर क्वालिफाई करने के बावजूद राष्ट्रमंडल खेलों में भाग नहीं ले पाए।
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