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    CWG 2026: 'सिल्‍वर गर्ल' ज्ञानेश्‍वरी यादव के संघर्ष की कहानी आंखें कर देगी नम, कड़ी तपस्‍या करके भारत को दिलाई सफलता

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 07:56 PM (IST)

    राजनांदगांव की अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 53 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता है। यह जीत उनके और उनक ...और पढ़ें

    ज्ञानेश्वरी यादव

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    विक्रम बाजपेयी, राजनांदगांव, जागरण। सोमवार को ग्लास्गो (स्कॉटलैंड) में कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में 53 किग्रा वर्ग के वेटलिफ्टिंग मुकाबले पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं। बारबेल पर वजन भले कितने भी किलो का होगा, लेकिन उसे उठाने के पीछे वर्षों का संघर्ष, पिता का पसीना और पूरे परिवार का त्याग भी साथ होगा।

    राजनांदगांव की अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने वर्ष 2022 से अब तक हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई है। वह वर्ष 2023 में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। उन्होंने अब भारत को एक बार फिर सिल्वर मेडल दिलाया है।

    ग्यानेश्वरी की जर्नी में पिता का रोल रहा अहम

    ज्ञानेश्वरी की खेल यात्रा किसी बड़े स्टेडियम से नहीं, बल्कि पिता दीपक यादव के साथ राजनांदगांव स्थित जय भवानी व्यायामशाला से शुरू हुई। दीपक खुद बॉडी बिल्डिंग करते थे। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली ज्ञानेश्वरी भी उनके साथ व्यायाम करने लगी। बेटी की लगन देखकर दीपक ने कोच अजय लोहार से उसे वेटलिफ्टिंग सिखाने का आग्रह किया। उस दिन हाथ में उठाया बारबेल आज तक उसके हाथों से नहीं छूटा।

    परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक थी। दीपक इलेक्ट्रिशियन का काम कर महीने में तीन से पांच हजार रुपये कमाते थे। इसी आय से घर, दो बच्चों की पढ़ाई और ज्ञानेश्वरी की महंगी डाइट, जूते, किट और प्रतियोगिताओं का खर्च चलता था। कई बार परिवार ने अपनी जरूरतें टाल दीं, लेकिन बेटी के प्रशिक्षण में कोई कमी नहीं आने दी।

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    हर रोज चलाते थे 8 किमी साइकिल

    ग्राम भोड़िया से रोज सुबह आठ किमी साइकिल चलाकर दीपक बच्चों को लेकर राजनांदगांव आते। बच्चे स्कूल जाते, फिर व्यायामशाला में घंटों अभ्यास करते। रात करीब 11 बजे पूरा परिवार एक साइकिल में ही गांव लौटता। घर पर मां दुर्गा यादव पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए इस चिंता में दिन बिताती थीं कि सीमित साधनों में अगला दिन कैसे निकलेगा।

    दीपक बताते हैं कि उन्होंने 20-20 घंटे तक काम किया, लेकिन बेटी की डाइट और तैयारी से कभी समझौता नहीं किया। पासपोर्ट बनवाने से लेकर प्रतियोगिताओं में भेजने तक हर तैयारी पहले से करते रहे। उन्हें भरोसा था कि संघर्ष ही बेटी को मजबूत बनाएगा।

    ग्रीस में ग्यानेश्वरी ने जीता गोल्ड मेडल

    आज ज्ञानेश्वरी पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान में प्रशिक्षण ले रही हैं। वर्ष 2022 में ग्रीस में आयोजित जूनियर विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सहायक उप निरीक्षक पद पर नियुक्त किया। इसके बावजूद परिवार का संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। राजनांदगांव में लिया गया घर अब भी ऋण पर है और उसकी किस्त पूरा परिवार मिलकर चुका रहा है। यही कारण है कि ज्ञानेश्वरी की हर जीत केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे परिवार के संघर्ष का सम्मान बन जाती है।

    पहला पदक बना टर्निंग प्वाइंट

    वर्ष 2017 में दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में ज्ञानेश्वरी ने पहला कांस्य पदक जीता। इसी सफलता ने परिवार का भरोसा मजबूत किया कि बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है। इसके बाद वर्ष 2022 में भुनेश्वर में आयोजित जूनियर महिला वेटवेटलिफ्टिंग में स्वर्ण जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी का चयन पटियाला स्थित अकादमी के लिए हो गया। इसी वर्ष कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई।

    जन्मदिन से ज्यादा जरूरी था अभ्यास

    ज्ञानेश्वरी के पिता बताते हैं कि परिवार कभी उनका जन्मदिन भी ठीक से नहीं मना सका। दोस्तों के साथ समय बिताना, पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होना और सामान्य जीवन की कई खुशियां उन्होंने खुद छोड़ दीं। वर्षों तक उनकी दुनिया केवल स्कूल, व्यायामशाला और बारबेल के बीच सिमटी रही। आज उसी त्याग ने उन्हें देश की सबसे भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल कर दिया।

    इन पदकों के साथ बढ़ता गया जीत का वजन

    • 2023 में एशियन यूथ एवं जूनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक।
    • कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक।
    • 2024 विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व।
    • 2025 राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक।
    • 2026 एशियाई सीनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।
    • 2026 कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल।

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