रोज 6 मुर्गे खाना, कई लीटर दूध पीना और 15 घंटे कसरत; वो 'खूंखार' पहलवान जिसने लड़ी हजारों कुश्तियां लेकिन कभी नहीं मिली हार
भारत के महान पहलवान गामा, जिनका असली नाम गुलाम हुसैन था, अपने पूरे करियर में कभी नहीं हारे। वे रोजाना 15 घंटे अभ्यास करते थे और उनकी खुराक में 6 मुर्ग ...और पढ़ें

द ग्रेट गामा

समय कम है?
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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई ऐसी हस्तियों का जन्म हुआ है, जिन्होंने अपना लोहा विदेश में भी मनाया है। भारत के इतिहास में एक ऐसा पहलवान हुआ, जो अपने पूरे करियर में कभी नहीं हारा। हालांकि, आजादी के बाद उन्होंने भारत को छोड़ दिया और पाकिस्तान में बसने का फैसला किया। वे कोई और नहीं बल्कि गामा पहलवान हैं, जिनका असली नाम गुलाम हुसैन था।
गामा बचपन से ही कुश्ती में रुचि रखते थे और आगे चलकर वे पहलवान बने, तो कभी कोई कुश्ती नहीं हारे। उनके खुराक को सुनकर भी तमाम लोग हैरान रह जाते थे। वो दिन में 15 घंटे प्रैक्टिस करते थे। रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि वे हर रोज 6 मुर्गे खाते थे, जिसको सुनकर किसी को भी जल्दी भरोसा नहीं होता था।
गामा के अंदर बचपन से ही कुश्ती का था जुनून
गामा का जन्म 22 मई 1878 को दतिया रियासत में हुआ था, जो आज मध्य प्रदेश का हिस्सा है। उनका असली नाम गुलाम हुसैन था। उनके पिता भी पहलवान थे, लेकिन गामा के बचपन में ही उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके मामा और परिवार के अन्य पहलवानों ने उन्हें कुश्ती की बारीकियां सिखाईं।
कम उम्र में ही गामा ने अपनी असाधारण ताकत का परिचय देना शुरू कर दिया था। कहा जाता है कि सिर्फ 10 साल की उम्र में उन्होंने सैकड़ों पहलवानों के बीच आयोजित प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया था। तभी से लोगों को एहसास हो गया था कि यह लड़का आगे चलकर बड़ा नाम कमाएगा।
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15 घंटे करते थे कसरत
गामा की सफलता के पीछे उनकी कठोर मेहनत सबसे बड़ा कारण थी। वो रोजाना घंटों तक अभ्यास करते थे। उनकी दिनचर्या किसी आम इंसान के लिए कल्पना से भी परे थी। बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वह प्रतिदिन हजारों दंड-बैठक लगाते थे। इसके अलावा भारी मुगदर घुमाना, लंबी दौड़ लगाना और अखाड़े में घंटों अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। सुबह से लेकर देर शाम तक वह शरीर के अलग-अलग हिस्सों की कसरत करते थे। कुल मिलाकर वह रोज लगभग 15 घंटे मेहनत करते थे। उनकी इस अनुशासित जीवनशैली ने उन्हें दुनिया का सबसे ताकतवर पहलवान बना दिया।
द ग्रेट गामा की हैरान करने वाली खुराक
इतनी कड़ी मेहनत के लिए शरीर को भरपूर ऊर्जा की जरूरत होती थी। गामा की खुराक भी उतनी ही चर्चित थी जितनी उनकी ताकत। कहा जाता है कि वह रोजाना कई लीटर दूध पीते थे। इसके साथ घी, मक्खन, बादाम और फलों का सेवन करते थे। उनकी डाइट में रोजाना 6 मुर्गे भी शामिल होते थे। उनकी खुराक सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं, लेकिन यही भोजन उन्हें अखाड़े में अजेय बनाए रखता था।
भारत से लेकर विदेश तक मनवाया अपना लोहा
गामा ने भारत के लगभग सभी बड़े पहलवानों को हराकर अपनी पहचान बनाई। रहीम बख्श जैसे दिग्गज पहलवानों के साथ उनके मुकाबले लंबे समय तक चर्चा में रहे। साल 1910 में गामा लंदन पहुंचे, जहां उन्होंने दुनिया के नामी पहलवानों को चुनौती दी। वहां उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को हराकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया।
पोलैंड के मशहूर पहलवान स्टैनिस्लाव जबिशको के साथ उनका मुकाबला विशेष रूप से याद किया जाता है। पहले मुकाबले में कोई नतीजा नहीं निकला, लेकिन बाद में गामा ने जबिशको को बेहद कम समय में चित कर दिया। इस जीत के बाद उन्हें विश्व स्तर पर पहचान मिली और 'रुस्तम-ए-जमां' के रूप में सम्मानित किया गया।
अपने करियर में कभी नहीं हारे 'द ग्रेट गामा'
गामा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी हार नहीं मानी। माना जाता है कि उन्होंने हजारों कुश्तियां लड़ीं और हर बार विजेता बनकर उभरे। उनकी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास के सामने बड़े-बड़े पहलवान टिक नहीं पाते थे। यही वजह थी कि उन्हें दुनिया का सबसे महान पहलवान माना गया।
आखिरी दिनों तक रहा पहलवानी का जुनून
भारत के विभाजन के बाद गामा पाकिस्तान के लाहौर में बस गए। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उनका कुश्ती से लगाव कभी कम नहीं हुआ। जीवन के अंतिम वर्षों में भी वह दुनिया के पहलवानों को चुनौती देने की बात करते थे। 23 मई 1960 को इस महान पहलवान का निधन हो गया। उनकी विरासत आज भी जीवित है।
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