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    Archery World Cup: चीन के मुंह से भारत ने छीनी जीत, सीधा सोने पर मारा तीर

    Updated: Sun, 10 May 2026 06:30 PM (IST)

    भारतीय महिला रिकर्व टीम ने शंघाई तीरंदाजी विश्व कप के दूसरे चरण में मेजबान चीन को रोमांचक शूटऑफ में हराकर स्वर्ण पदक जीता। दीपिका कुमारी, अंकिता भकत औ ...और पढ़ें

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    भारतीय महिला टीम ने जीता स्वर्ण पदक

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    पीटीआई, शंघाई: दीपिका कुमारी, अंकिता भकत और कुमकुम मोहोद की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने रविवार को तीरंदाजी विश्व कप के दूसरे चरण में मेजबान और खिताब के प्रबल दावेदार चीन को शूटऑफ में हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

    रोमांचक फाइनल में भारत ने पहला सेट जीता लेकिन चीन ने वापसी करते हुए मुकाबला बराबर कर दिया। निर्धारित चार सेट के बाद स्कोर बराबर रहने के कारण शूटऑफ कराया गया। भारतीय तिकड़ी ने निर्णायक क्षणों में संयम बनाए रखते हुए 5-4 (28-26) से जीत दर्ज की।

    दीपिका का अनुभव आया काम

    अनुभवी दीपिका ने दबाव के बीच अंतिम शूटऑफ तीर पर अहम नौ अंक जुटाकर भारत को 2021 के बाद पहला विश्व कप स्वर्ण पदक दिलाया। हालांकि सिमरनजीत कौर के लिए यह दिल तोड़ने वाला अनुभव रहा जब उन्हें सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी और बाद में चैंपियन बनीं दक्षिण कोरिया की कांग चेयांग के विरुद्ध सीधे सेट में 6-0 हार का सामना करना पड़ा।

    इसके बाद कांस्य पदक के लिए हुए प्लेऑफ में उन्हें एक और कोरियाई खिलाड़ी जांग मिनही के विरुद्ध 4-6 से हार मिली।

    भारत के हिस्से आए दो पदक

    इस तरह भारत ने अपने अभियान का समापन दो पदक (एक स्वर्ण, एक कांस्य) के साथ किया। शनिवार को पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड वर्ग में साहिल जाधव ने कांस्य पदक जीता था। इससे पहले भारतीय महिला रिकर्व टीम ने सेमीफाइनल में रिकार्ड 10 बार के ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को हराकर बड़ा उलटफेर किया था।

    ग्वाटेमाला सिटी और पेरिस में 2021 में भारत की विश्व कप जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रहीं दीपिका के नाम 2010 से अब तक सात विश्व कप टीम स्वर्ण पदक हो गए हैं। यह भारतीय महिला रिकर्व टीम का तीन साल में पहला विश्व कप पदक भी है। इससे पहले टीम 2023 में पेरिस में चरण चार में पोडियम पर पहुंची थी जिसमें अंकिता पदक जीतने वाली टीम की सदस्य थीं। नियुक्तियों को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच बिना किसी पूर्णकालिक राष्ट्रीय कोच के यात्रा करते हुए बेहद अनुभवी दीपिका ही थीं जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और लगातार अपनी टीम की साथियों का हौसला बढ़ाया।

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