'अब पहले जैसा नहीं रहा', जसपाल राणा के निधन पर फूट-फूटकर रोईं मनु भाकर, हर जीत और पदक को किया कोच के नाम
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर अपने मेंटर और कोच जसपाल राणा के निधन से बेहद दुखी हैं, जिन्हें वह सिर्फ गुरु नहीं बल्कि दोस्त मानती थीं। उन्होंने ...और पढ़ें

जसपाल राणा के निधन पर भावुक हुईं मनु भाकर
HighLights
मनु भाकर ने मेंटर जसपाल राणा के निधन पर दुख जताया
राणा को सिर्फ कोच नहीं, दोस्त और मार्गदर्शक मानती थीं
उनके बिना शूटिंग रेंज अब पहले जैसी नहीं रहेगी- मनु
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर अपने मेंटर जसपाल राणा के निधन की खबर पर विश्वास नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा है कि ये उनके लिए बहुत बड़ी हानि है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। राणा की कोचिंग में ही मनु ने पेरिस ओलंपिक-2024 में दो पदक जीते थे।
अपने सख्त अनुशासन और बेहतरीन कोचिंग शैली के लिए मशहूर राणा का गुरुवार रात निधन हो गया है। उनके निधन की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया। मनु ने जब ये खबर सुनी तो वह विश्वास नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा कि राणा के बिना उनके लिए शूटिंग रेंज अब वैसा नहीं रहेगा जैसा पहले था। मनु देहरादून राणा को अंतिम विदाई देने पहुंची। इस दौरान वह काफी रोती हुई नजर आईं। वह राणा के भाई से चिपककर जमकर रोईं।
'मुझे नहीं हो रहा विश्वास'
मनु ने Olympics.com से बात करते हुए कहा, "मैं अभी तक इस पर विश्वास नहीं कर पा रही हूं। ये अविश्वसनीय खबर है। मैं इस बात को पचा नहीं पा रही हूं। वह सिर्फ मेरे कोच नहीं थे बल्कि मेंटर, और गाइड थे। इससे भी ज्यादा वह मेरे दोस्त थे जो मुझे दूसरों से ज्यादा समझते थे।"
उन्होंने कहा, "शूटिंग रेंज अब दोबारा पहले जैसी नहीं होगी। उनकी आवाज, उनकी सलाह, उनकी मौजूदगी, ये मेरे जीवन के हर दिन का हिस्सा थीं। ये सोचना कि अब वह मेरे पास खड़े नहीं होंगे बहुत दर्द देता है।"
VIDEO | Dehradun, Uttarakhand: Double Olympic medallist Manu Bhaker arrives at the residence and shooting academy of her coach, Jaspal Rana, in Poundha to pay her respects after the mortal remains of the Indian shooting legend were brought there.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 12, 2026
Rana passed away on Friday… pic.twitter.com/xvbmJnt8q1
हमेशा बेस्ट चाहते थे
मनु ने कहा कि ऐसा भी समय था जब राणा उनके साथ बहुत सख्ती से व्यवहार करते थे, लेकिन वह हमेशा चाहते थे कि मनु अपना बेस्ट दे। मनु ने कहा,"ऐसा भी समय था जब वह काफी सख्त होते थे और कई बार सिर्फ सुनते थे। वह हमेशा चाहते थे कि मैं अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं। मैं कई बार उनकी बात नहीं समझती थी, लेकिन अब जब मैं मुड़कर देखती हूं तो जो भी उन्होंने मुझे सिखाया उसका कुछ न कुछ उद्देश्य रहता था।"
हर पदक दिलाएगा याद
मनु ने आगे कहा कि हर सफलता, हर उपलब्धि, हर मेडल उन्हें अब राणा की याद दिलाएगा। उन्होंने कहा, "हर मेडल, हर सफलता और पोडियम पर हल पल अब मुझे उनकी याद दिलाएंगे। उन जीतों का एक हिस्सा उनके नाम है क्योंकि उन्होंने मुझ पर कभी विश्वास करना बंद नहीं किया, मेरे करियर के सबसे बुरे दौर में भी।"