मोहम्मद अली: खेल की दुनिया का वो 'द ग्रेटेस्ट' जिसने रिंग के अंदर और बाहर मचाया कोहराम, झुकना नहीं था पसंद
महान मुक्केबाज मोहम्मद अली का जन्मदिन 17 जनवरी को है। तीन बार के विश्व हैवीवेट चैंपियन अली रिंग के अंदर और बाहर दोनों जगह लड़े। उन्होंने नस्लवाद और वि ...और पढ़ें

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। खेल की दुनिया में एक से एक दिग्गज हुए हैं जिन्होंने अपने खेल से जमकर नाम कमाया और दूसरों को भी प्रेरित किया। हालांकि, बहुत कम ही ऐसे हुए हैं जिन्होंने मैदान के बाहर भी कुछ ऐसा किया जिसे आज तक याद किया जाता है। उनमें से ही एक हैं मशहूर मुक्केबाज मोहम्मद अली। मोहम्मद अली का आज यानी 17 जनवरी को जन्मदिन है। तीन जून 2016 को इस दिग्गज मुक्केबाज ने आखिरी सांस ली थी।
अली जब तक रिंग में रहते थे अपने दमदार पंजों से विपक्षी को तोड़ देते थे। वह रिंग में इस तरह से पंच बरसाते थे कि सामने वाला चारों खाने चित हो जाता था। यही काराण था कि मोहम्मद अली तीन बार विश्व हैवीवेट चैंपियन बने। लेकिन ये मुक्केबाज सिर्फ रिंग में नहीं लड़ा बल्कि रिंग के बाहर भी समाज में हो रहे गलत के लिए खड़ा रहा। उनकी नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई हो या फिर वियतनाम वॉर का विरोध। उन्होंने समाज के हक में आवाज उठाने से कभी भी कदम पीछे नहीं लिए। साल 1967 में जब उन्होंने अमेरिका की तरफ से वियतनाम में हो रही लड़ाई में जाने से इनकार कर दिया तो इसका खामियाजा उन्हें अपना खिताब छीने जाने, पासपोर्ट जब्त हो जाने और कई सालों तक मुक्केबाजी से बैन किए जाने के तौर पर चुकाना पड़ा।
अली पर बैन तब आया था जब वह अपने करियर के स्वर्णिम दौर में थे। उस समय उन्होंने कहा था, "मैं अपने जमीर के खिलाफ नहीं जाऊंगा।" उनकी इसी हिम्मेद ने उन्हें दुनिया ने 'द ग्रेटेस्ट' कहा। बाद में अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया, वे फिर से रिंग में लौटे। फिर से अपनी बादशाहत कायम की।
इस तरह शुरू की मुक्केबाजी
पढ़ाई में अली शुरू से ही अच्छे नहीं थे, लेकिन खेल की दुनिया उन्हें भाती थी। उनके अंदर गुस्सा बचपन से ही थी और यही उनके मुक्केबाज बनने का कारण बना। वह जब 12 साल के थे तब उनकी साइकिल चोरी हो गई थी। इस बात से वह काफी गुस्सा हुए थे और शिकायत करने पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे। पुलिस स्टेशन जाकर उन्होंने चोर को पीटने की बात भी कही थी। इस दौरान उनकी मुलाकात पुलिस अधिकारी जो मार्टिन से हुई। मार्टिन मुक्केबाज के साथ-साथ ट्रेनर भी थे। अली को देखकर मार्टिन ने उन्हें मुक्केबाजी सीखने की सलाह दी और यहीं से अली का मुक्केबाज बनने का सफर तय हो गया। अपने करियर में उन्होंने तमाम उपलब्धियां हासिल कीं जिनमें तीन बार हैवीवेट चैंपियन बनने के अलावा। 1960 में वह रोम ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे।
इस तरह करते थे ट्रेनिंग
अली अपनी ट्रेनिंग पर बहुत ध्यान देते और इसकी नतीजा रिंग में देखने को मिलता था। वह सुबह पांच बजे उठते और 10 किलोमीटर तक दौड़ते। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता था कि मौसम कैसा है। वह किसी भी स्थिति में अपना रूटीन नहीं बदलते थे। वह ऐसा अपनी रिंग में अपनी स्टैमिना को बढ़ाने के लिए किया करते थे।
ऐसे बने विश्व चैंपियन
1960 में जब वह अली जो उस समय कैसियस थे, ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता तो उन्हें तेज बोलने वाला समझा जाता था। इसका कारण ये था कि वह अक्सर रिंग के बाहर ऐसे बयान देते थे तो उनके आत्मविश्वास को दर्शाते थे। वह कई बार मजाक भी किया करते थे। वह खुद को द लुइविल लिप कहा करते थे। 1964 में जब उन्होंने उस समय के सबसे महान और खतरनाक मु्क्केबाजों में गिने जाने वाले सनी लिस्टन को हरा दिया तो पूरी दुनिया हैरान रह गई और उनकी तारीफ करने लगी।
'रंबल इन द जंगल'
अली के जीवन में कई मुकाबले रहे जिन्हें ऐतिहासिक कहा जा सकता है लेकिन इनमें अगर सबसे ज्यादा चर्चित और अभी तक याद किया जाने वाला मुकाबला कहा जाए तो वह 'रंबल इन द जंगल' होगा। बात साल 1974 की है। मोहम्मद अली का सामना जॉर्ज फोरमैन से था। वह उस समय विश्व के सबसे खतरनाक मुक्केबाज थे। मोहम्मद अली जानते थे कि वह सीधी लड़ाई में इस मुक्केबाज को मात नहीं दे सकते और यहीं उन्होंने अपने दिमाग का उपयोग किया।
वह जानबूझकर रस्सियों से टिक गए और फोरमैन के पंच खाते रहे। इसके पीछे उनकी रणनीति फोरमैन को थकाने की थी। इसके बाद मोहम्मद अली ने एक सटीक पंच मारा और फोरमैन को नीचे गिरा दिया। इसी लड़ाई को'रंबल इन द जंगल' कहा गया।
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