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    राम गोपाल कोठारी ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, वोल्‍केनो मैराथन पूरी करने वाले बने पहले भारतीय

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 06:43 PM (IST)

    राम गोपाल कोठारी ने वोल्‍केनो मैराथन पूरी करके बड़ी उपलब्धि हासिल की। कोठारी वोल्‍केनो मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय बने। ...और पढ़ें

    राम गोपाल कोठारी

    राम गोपाल कोठारी

    HighLights

    1. राम गोपाल कोठारी ने पूरी की वोल्‍केनो मैराथन

    2. 42.195 किमी लंबी वोल्‍केनो मैराथन का आयोजन रनबुक ने किया

    3. राम गोपाल कोठारी ने अपनी उपलब्धि पर खुशी जताई

    स्‍पोर्ट्स डेस्‍क, नई दिल्‍ली। राम गोपाल कोठारी ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। ज्‍योग्राफिक नॉर्थ पोल पर पूरी मैराथन के एक साल से भी कम समय बाद कोठारी ने वोल्‍केनो मैराथन पूरी की। ठाकुर वोल्‍केनो मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय बने।

    बता दें कि 42.195 किलोमीटर लंबी वोल्केनो मैराथन का आयोजन रनबुक द्वारा किया गया। इसी संस्था द्वारा प्रतिष्ठित नॉर्थ पोल मैराथन का भी आयोजन किया जाता है। कोठारी रनबुक की दोनों प्रतिष्ठित मैराथनों को पूरा करने वाले पहले भारतीय बने।

    80 देशों की यात्रा पूरी की

    पता हो कि दुनिया के सबसे दूरस्थ आबाद द्वीपों में से एक, प्रशांत महासागर स्थित ईस्टर आइलैंड पहुंचने के लिए कोठारी ने कोलकाता से मुंबई, इस्तांबुल और सैंटियागो होते हुए लगभग 24,000 किमी की यात्रा की। सफर के दौरान उन्‍होंने 80 देशों की यात्रा पूरी की।

    वोल्‍केनो मैराथन के लिए कुल 21 धावकों ने पंजीकरण कराया था, जबकि 20 धावकों ने दौड़ शुरू की और सफलतापूर्वक पूरी की। प्रतिभागियों ने एशिया, यूरोप, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और ओशिनिया का प्रतिनिधित्व किया।

    कोठारी ने क्‍या कहा

    ईस्टर आइलैंड पर वोल्केनो मैराथन पूरी करने वाला पहला भारतीय बनना मेरे लिए गर्व की बात है। मेरी पहली फुल मैराथन मुझे भौगोलिक उत्तरी ध्रुव तक ले गई, जहां मैं दुनिया के शीर्ष पर मैराथन पूरी करने वाला पहला भारतीय बना। मेरी दूसरी मैराथन मुझे दुनिया के सबसे दूरस्थ आबाद द्वीपों में से एक तक ले आई। मेरे लिए यह उपलब्धि केवल दौड़ पूरी करने तक सीमित नहीं है। यह उस लड़के की कहानी है, जिसने कोलकाता के एक छोटे से एस्बेस्टस की छत वाले कमरे से जीवन की शुरुआत की और आज सातों महाद्वीपों के 80 देशों की यात्रा करते हुए दुनिया की दो सबसे असाधारण मैराथनों में इतिहास रच दिया। यह साबित करता है कि आपकी शुरुआत कभी भी आपकी मंजिल तय नहीं करती।

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    राम गोपाल कोठारी

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    वोल्‍केनो मैराथन में क्‍या किया

    वोल्केनो मैराथन कोठारी के लिए अब तक की सबसे कठिन एंड्योरेंस रेसों में से एक साबित हुई। शुरुआती 21 किलोमीटर तक लगातार चढ़ाई और उतराई वाले पक्के रास्तों पर दौड़ना पड़ा, जहां रास्ते में खुले घूम रहे घोड़े और मवेशी भी कई बार सामने आ जाते थे। आधी दूरी के बाद रेस बेहद कठिन ट्रेल मैराथन में बदल गई, जहां ज्वालामुखीय चट्टानों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कई हिस्से इतने खड़े और तकनीकी थे कि वहां चलना भी मुश्किल हो गया।

    लगभग 30वें किलोमीटर पर धावकों को पक्के और कच्चे रास्तों के मिश्रण से गुजरते हुए शानदार ओरोंगो ज्वालामुखी क्रेटर तक चढ़ाई करनी पड़ी, जहां समुद्र तल से लगभग 600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना था। तकनीकी ट्रैक ने कई प्रतिभागियों को चौंका दिया और सामान्य रोड रनिंग जूते पहनने वाले कई धावक फिसल गए। शुरुआत और फिनिश लाइन के बीच कहीं भी शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिससे यह चुनौती और भी कठिन हो गई।