थॉमस कप में भारतीय टीम ने जीता था कांस्य पदक, सात्विक बोले- सभी खेलों की सफलता का जश्न मने
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने कहा कि थॉमस कप में भारतीय टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने के बाद जनता की फीकी प्रतिक्रिया पर की गई उनकी हालिया टिप्पणी का उद्द ...और पढ़ें
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सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी
नई दिल्ली, पीटीआई। स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि थॉमस कप में भारतीय टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने के बाद जनता की फीकी प्रतिक्रिया पर की गई उनकी हालिया टिप्पणी का उद्देश्य पैसे या भव्य स्वागत की मांग करना नहीं था, बल्कि लोगों से सभी खेलों में हर छोटी-बड़ी जीत का जश्न मनाने की अपील करना था। विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज एशियाई खेलों के चैंपियन सात्विक और चिराग शेट्टी की जोड़ी हाल ही में डेनमार्क में आयोजित थॉमस कप में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थी।
हालांकि, सात्विक ने स्वदेश लौटने पर इंटरनेट मीडिया पर उनकी उपलब्धि को अपेक्षित पहचान न मिलने को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं। डेनमार्क से वापस आने के बाद सात्विक ने लिखा था कि अब घर वापस आ गया हूं। हमेशा की तरह पिछले दो सप्ताहों में क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं है और ऐसा लगता है कि किसी को वास्तव में इसकी परवाह भी नहीं है।
इस 25 साल के खिलाड़ी ने शुक्रवार को अपने विचारों को और स्पष्ट करने के लिए एक और इंटरनेट मीडिया पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों में थॉमस कप कांस्य पदक को लेकर मेरी टिप्पणियों पर काफी ध्यान दिया गया। मैं लोगों के समर्थन और प्रोत्साहन के लिए आभारी हूं, लेकिन मैं अपने इरादे को स्पष्ट करना चाहता हूं क्योंकि कई लोग मूल मुद्दे से भटकते नजर आ रहे हैं।
— Satwik SaiRaj Rankireddy (@satwiksairaj) May 8, 2026
उन्होंने लिखा कि मेरे शब्द व्यक्तिगत प्रसिद्धि पाने या किसी और की उपलब्धियों का श्रेय कम करने की भावना से नहीं आए थे। मैं हर उस खिलाड़ी का बेहद सम्मान करता हूं जो किसी भी खेल में भारत का नाम रोशन करता है। सात्विक ने कहा कि मेरा संदेश केवल इतना था कि हमें ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जहां हर छोटी या बड़ी जीत का उत्साहपूर्वक से जश्न मनाया जाए।
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उन्होंने कहा कि थामस कप जैसे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन खिलाड़ियों के वर्षों के त्याग और कठिन मेहनत का परिणाम होता है और जब ऐसी उपलब्धियों पर चुप्पी छा जाती है तो यह बेहद निराशाजनक लगता है। उन्होंने लिखा कि चाहे वह विश्व कप का पदक हो या थॉमस कप जैसे वैश्विक टूर्नामेंट में पोडियम फिनिश, ये पल वर्षों की मेहनत और बलिदान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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