मल्लिकार्जुन खरगे की बढ़ीं मुश्किलें: पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर विशेषाधिकार हनन का नोटिस
संसदीय लोकतंत्र में शब्दों की गरिमा ही उसकी आत्मा होती है, लेकिन जब इस गरिमा पर ही ठेस पहुंचे, तो आक्रोश स्वाभाविक है। नई दिल्ली में राजनीति के गलियार ...और पढ़ें

पीएम मोदी पर 'अपमानजनक' टिप्पणी को लेकर खरगे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस (फोटो- एक्स)
HighLights
भाजपा के छह सांसदों ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर जताई आपत्ति
अब सबकी नजरें उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता वाली विशेषाधिकार समिति की जांच रिपोर्ट पर हैं
पीटीआई, नई दिल्ली। संसदीय लोकतंत्र में शब्दों की गरिमा ही उसकी आत्मा होती है, लेकिन जब इस गरिमा पर ही ठेस पहुंचे, तो आक्रोश स्वाभाविक है। नई दिल्ली में राजनीति के गलियारों से एक बड़ी और भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ की गई कथित "अपमानजनक, अमर्यादित और अनादरपूर्ण" टिप्पणियों को लेकर भाजपा के छह सांसदों ने गहरी आपत्ति जताई है।
सांसदों का मानना है कि ऐसे बयानों से न केवल देश के शीर्ष पद, बल्कि पूरे संसद और उसके सदस्यों की गरिमा को गहरी ठेस पहुंची है।
उन्होंने खरगे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। चेयरमैन ने समिति को सौंपा मामला इस आहत भावना और संसदीय मर्यादा की रक्षा के लिए भाजपा सांसद बृजलाल, मिथिलेश कुमार, सुमित्रा बाल्मीक, शिवेश कुमार, सिकंदर कुमार और नागेंद्र राय ने संयुक्त रूप से एक विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।
यह नोटिस राज्यसभा के प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमों के नियम 188 के तहत दाखिल किया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने 16 जून 2026 को इस शिकायत को नियम 203 के तहत 'विशेषाधिकार समिति' के पास जांच, परीक्षण और रिपोर्ट के लिए भेज दिया है।
हरिवंश करेंगे पूरे मामले की जांच राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सदन के उपसभापति हरिवंश इस विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष हैं, जो अब इस पूरे मामले की कड़ियों और बयानों की गंभीरता की जांच करेगी।
इस समिति में सुधांशु त्रिवेदी, दीपक प्रकाश, सुमेर सिंह सोलंकी, सुरेंद्र सिंह नागर, मनन कुमार मिश्रा (सभी भाजपा) और निर्दलीय सांसद कार्तिकेय शर्मा जैसे वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं।
राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब शब्दों की मर्यादा टूटती है, तो वह लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर को भी झकझोर देती है। अब सबकी नजरें समिति की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।