परिसीमन विधेयक पर राहुल गांधी मुखर, बोले- विपक्षी दलों से एकजुट होकर विफल करें बिल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि सभी राष्ट्रीय और तमिल पार्टियों को मिलकर केंद्र के संसद में परिसीमन विधेयक को पारित करने के प् ...और पढ़ें

परिसीमन विधेयक पारित कराने का प्रयास सबको मिलकर विफल करना चाहिए : राहुल गांधी (फाइल फोटो)
HighLights
कांग्रेस नेता ने कहा- इसके जरिये तमिलनाडु के लोगों की आवाज संसद में कम करना चाहती है सरकार
राहुल ने नीट पेपर लीक मसले पर आत्महत्या करने वाले पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की
पीटीआई, नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि सभी राष्ट्रीय और तमिल पार्टियों को मिलकर केंद्र के संसद में परिसीमन विधेयक को पारित करने के प्रयास को विफल करना चाहिए।
इसका उद्देश्य दक्षिण भारतीय राज्यों खासकर तमिलनाडु के लोगों के राजनीतिक अधिकारों और उनकी आवाज को संसद में कम करना है।
ममल्लापुरम में पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिये तमिल लोगों को मताधिकार से वंचित करने और उनकी शक्ति को छीनना चाहती है।
राहुल यहां पार्टी के पुनर्गठन और पुनर्जीवन योजना के तहत प्रशिक्षित जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्षों के साथ मंथन सत्र में भाग लेने आए थे। उन्होंने कहा- "हर तमिल और राष्ट्रीय पार्टी को संसद में परिसीमन विधेयक को नाकाम करना चाहिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि जो कोई भी परिसीमन का समर्थन करता है, वह तमिलनाडु के साथ विश्वासघात कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का समर्थन करने वाले राजनीतिक दल या व्यक्ति तमिलनाडु के लोगों के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने समूहवाद की निंदा की और पार्टी के भीतर एकता की वकालत की। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता सभी को साथ लेकर नहीं चलते और पार्टी के विकास के लिए क्षेत्रीय कार्य पर ध्यान नहीं देते, उनके लिए संगठन में कोई स्थान नहीं है।
राहुल ने नीट पेपर लीक मसले पर आत्महत्या करने वाले पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात की और शिक्षा प्रणाली की खामियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों को एक ऐसे सिस्टम में ईमानदारी से काम करने के लिए कहा जाता है जो खुद उनके साथ ईमानदार नहीं है।
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पेपर लीक और रद की गई परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा-"क्या पीएम मोदी ने कभी एक भी उस दुखी परिवार से मुलाकात की है जिसने अपने बच्चे को खो दिया है या उन लोगों से जिनकी सारी बचत, जिंदगी, समय और सपने पेपर लीक ने छीन लिए हैं? उत्तर नहीं है! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की माफी की आवश्यकता नहीं है बल्कि मोदी को उनसे माफी मांगनी चाहिए।"