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    20 साल पुराना मर्डर केस और उद्धव सेना में संग्राम; कैसे बदल रही महाराष्ट्र की राजनीति

    Updated: Thu, 18 Jun 2026 11:40 PM (IST)

    शिवसेना (यूबीटी) में हो रहे बगावत के बीच एक 20 साल पुराना राजनीतिक हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है। धाराशिव (पूर्व ओस्मानाबाद) से सांसद ओमराजे निंबाल ...और पढ़ें

    20 साल पुराना हत्याकांड उद्धव सेना विद्रोह में बना अहम फैक्टर (फोटो- सोशल मीडिया)

    20 साल पुराना हत्याकांड उद्धव सेना विद्रोह में बना अहम फैक्टर (फोटो- सोशल मीडिया)

    HighLights

    1. ओमराजे निंबालकर उद्धव ठाकरे के वफादार बने रहे

    2. पवनराजे निबालकर की हत्या 2006 में हुई थी

    डिजिटल डेस्क, मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) में हो रहे बगावत के बीच एक 20 साल पुराना राजनीतिक हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है। धाराशिव (पूर्व ओस्मानाबाद) से सांसद ओमराजे निंबालकर उन छह सांसदों में शामिल हैं जो कथित तौर पर उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में जा सकते हैं।

    शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि ओमराजे को उनके पिता के हत्याकांड में अनुकूल फैसला दिलाने का लालच देकर बगावत के लिए तैयार किया जा रहा है।

    क्या है 20 साल पुराना मामला?

    3 जून 2006: कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी नवी मुंबई के कळंबोली में एक स्कोडा कार में यात्रा कर रहे थे।

    अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाड़ी रोकी और गोली मार दी। दोनों की मौके पर मौत हो गई। इस हत्याकांड को राजनीतिक साजिश बताया गया।

    पवनराजे ओस्मानाबाद जिले में एनसीपी के वरिष्ठ नेता पदमसिंह पाटिल के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ उभरते नेता माने जा रहे थे।

    सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली। 2009 में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री पदमसिंह पाटिल को मुख्य साजिशकर्ता बनाया गया। सीबीआई के अनुसार, पवनराजे की बढ़ती लोकप्रियता को पाटिल ने अपना राजनीतिक खतरा माना और 30 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट हत्यारे को दिया गया।

    पाटिल ने सभी आरोपों से इनकार किया है। मामले में कुल 8 आरोपी हैं, जिनमें व्यापारी, पूर्व पार्षद और कथित शूटर शामिल हैं।

    फैसले की अहमियत

    20 साल चली सुनवाई के बाद स्पेशल सीबीआई कोर्ट मंगलवार को फैसला सुनाने वाला था, जिसे अब शनिवार (20 जून) के लिए टाल दिया गया है। इस फैसले का महाराष्ट्र की राजनीति पर असर पड़ सकता है।

    ओमराजे का राजनीतिक सफर

    पिता की हत्या के समय ओमराजे 22 साल के थे। बाद में वे शिवसेना में शामिल हुए और उद्धव ठाकरे के वफादार बने रहे। अब उनकी संभावित बगावत ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

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