कर्नाटक में संग्राम जारी, अपने फार्मूले पर सिद्दरमैया को मनाने में जुटा कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व
कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक में डीके शिवकुमार को स्वतंत्र रूप से सरकार चलाने देने के लिए सिद्धरमैया को अपने फार्मूले पर मनाने की कोशिश कर रहा है। सिद्धरम ...और पढ़ें
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अपने फार्मूले पर सिद्दरमैया को मनाने में जुटा कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व (फाइल फोटो)
HighLights
सिद्धरमैया राष्ट्रीय राजनीति में जाने का प्रस्ताव ठुकरा चुके हैं।
अपने समर्थकों और बेटे के लिए मंत्री पद की मांग की।
आलाकमान डीके शिवकुमार को कर्नाटक में स्वतंत्र कमान देना चाहता है।
नीलू रंजन, जागरण, नई दिल्ली। कर्नाटक में डीके शिवकुमार के हाथ में सत्ता का हस्तांतरण सही तरह से हो और उन्हें इस तरह सरकार चलाने का अवसर मिले कि तीन साल की सत्ता विरोधी लहर को कम किया जा सके, इसके लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया को अपने फार्मूले पर मनाने की कोशिश में जुटा है।
लेकिन सिद्धरमैया अपनी कुछ शर्तें पूरी करवाना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश सिद्दरमैया को कर्नाटक से दूर कर राष्ट्रीय राजनीति में लाने की है ताकि डीके शिवकुमार को सरकार चलाने के लिए फ्रीहैंड मिल सके। लेकिन वह प्रदेश में मौजूद रहना चाहते हैं जो शिवकुमार के लिए मुश्किलें पैदा करेगा।
ठुकराया राज्यसभा का ऑफर
सिद्दरमैया शीर्ष नेतृत्व की ओर से राज्यसभा का आफर ठुकरा चुके हैं। एनसीआर में आंधी-बारिश के कारण गुरूवार की देर रात में दिल्ली पहुंचे सिद्दरमैया ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। सोनिया गांधी के घर पर हुई मुलाकात में राहुल गांधी ने सिद्दरमैया को ओबीसी राजनीति का अहम चेहरा बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका निभाने की जरूरत बताई।
लेकिन बताया जाता है कि सिद्दरमैया ने इस मुद्दे को टाल गए। बातचीत में सिद्दरमैया ने नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार को पूरी तरह से सहयोग करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने नई सरकार में उन्होंने अपने मंत्रिमडल के सहयोगियों को स्थान दिये जाने पर जोर दिया।
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सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया ने अपने बेटे यतिन्द्र को भी डीके शिवकुमार मंत्रीमंडल में अहम स्थान सुनिश्चत किये जाने की मांग की। बताया जाता है कि सिद्दरमैया अपने बेटे को कैबिनेट मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया ने कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल को डीके शिवकुमार सरकार में संभावित मंत्रियों की सूची अपनी ओर से सौंपी।
बाद में वेणुगोपाल ने राहुल गांधी से इस सूची को लेकर चर्चा की। लेकिन शनिवार को संभावित शपथग्रहण में इनमें कितने मंत्री बनेंगे, यह साफ नहीं है। इसके साथ ही चर्चा यह भी है कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में सभी पक्षों को साधने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर रहा है।
सिद्दरमैया की सरकार में सिर्फ अकेले डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री थे। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मुलाकात में कर्नाटक में पार्टी संगठन में फेरबदल को लेकर भी चर्चा हुई। तीन सालों से डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष का भी पद संभाल रहे थे।
डीके शिवकुमार की राह आसान नहीं
सिद्दरमैया अब इस पर अपने किसी व्यक्ति को देखना चाहते हैं। लेकिन दो साल के भीतर विधानसभा चुनाव को देखते हुए डीके शिवकुमार संगठन पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते हैं।जाहिर है शीर्ष नेतृत्व की कोशिशों के बावजूद कर्नाटक में डीके शिवकुमार की राह आसान नहीं होगी।
शीर्ष नेतृत्व के दबाव में सिद्दरमैया ने भले ही इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन अब भी वे मुस्लिम, ओबीसी, एससी, एसटी को लेकर बनाए गए अहिंदा समीकरण के सबसे बड़े नेता हैं और अंतिम समय तक कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों का समर्थन भी उन्हें प्राप्त था। शीर्ष नेतृत्व को आशंका है कि कर्नाटक में सिद्दरमैया की उपस्थिति हमेशा डीके शिवकुमार की मुश्किलें बढ़ाता रहेगा।
इसीलिए उन्हें केंद्र में लाने की बात चल रही है। चर्चा तो यहां तक है कि उन्हें राज्यसभा में लाकर मल्लिकार्जुन खरगे की जगह विपक्षा का नेता बनाने का भी आफर किया गया है। आने वाले समय में साफ होगा कि सिद्दरमैया कांग्रेस नेतृत्व के फार्मूले को स्वीकार करते हैं या नहीं।
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