'मोदी सरकार दिखा रही दंभ, छात्र लग रहे देश के दुश्मन', सोनिया गांधी का केंद्र पर तीखा प्रहार
मोदी सरकार के खिलाफ एक तीखे हमले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा कि छात्रों ने जवाबदेही और शैक्षणिक सुधारों की मांग ...और पढ़ें

'मोदी सरकार दिखा रही दंभ, छात्र लग रहे देश के दुश्मन', सोनिया गांधी (फाइल फोटो)
HighLights
कांग्रेस सांसद ने एक लेख में शासन की कार्रवाई को बर्बरता ठहराया
कहा-देश के छात्रों ने मोदी शासन की धोखेबाजी को उजागर किया
पीटीआई, नई दिल्ली। मोदी सरकार के खिलाफ एक तीखे हमले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा कि छात्रों ने जवाबदेही और शैक्षणिक सुधारों की मांग की है, लेकिन वर्तमान शासन ने उनके साहस का जवाब "कायरता और बर्बरता" से दिया है।
उन्हें भविष्य के उत्तराधिकारियों के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्र के दुश्मनों के रूप में देखा है। एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार पर भारत के शिक्षा परिदृश्य का स्तर गिराने का आरोप लगाया और कहा कि देश के छात्रों ने मोदी शासन की धोखेबाजी को उजागर किया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना एक नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने अपने लेख में कहा कि छात्रों का विरोध प्रदर्शन इन आपस में जुड़े कारकों का स्वाभाविक परिणाम है। आज का निराशाजनक शिक्षा परिदृश्य मोदी सरकार के दंभ और जवाबदेही या रचनात्मकता की अनिच्छा को उजागर करती है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री के सीधे अधिकार के तहत कार्यरत पुलिसकर्मियों द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों पर की गई 'बर्बरता' इस शासन के लिए कोई नई बात नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा पत्र लीक और शिक्षा प्रणाली में समग्र गिरावट के खिलाफ भारत भर में छात्रों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध हाल के हफ्तों में तेजी से बढ़ रहा है। उनकी मांगें सीधी और स्पष्ट रही हैं, भारत सरकार से जवाबदेही और शिक्षा सुधार।
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नरेन्द्र मोदी सरकार ने उनके साहस का जवाब कायरता और बर्बरता से दिया है, उन्हें भविष्य के उत्तराधिकारियों के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्र के दुश्मनों के रूप में देखा है।" पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने 20 जुलाई, 2026 को 'अपमान का दिन' बताया।
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का उपयोग करते हुए उन्हें हिंसा के माध्यम से दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पहला मौलिक मुद्दा मोदी सरकार का सार्वजनिक शिक्षा से पीछे हटना है।
इसने स्कूल शिक्षा पर अपने कुल बजट का 50% और उच्च शिक्षा पर 33% खर्च को कम कर दिया है। पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने लगभग एक लाख सार्वजनिक स्कूल बंद कर दिए हैं।"