राज्यसभा में विपक्ष का घमासान, सरकार बेफिक्री से निपटा रही काम
संसद के मानसून सत्र में हंगामे के बीच सरकार विधायी कार्यों को निपटाने में जुटी है जबकि विपक्ष विरोध प्रदर्शन तेज कर रहा है। विपक्ष के कुछ सांसदों ने सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया। सरकार ने लोकसभा से पारित तटीय पोत परिवहन विधेयक-2025 को राज्यसभा से भी पारित करा लिया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: मानसून सत्र पूरी तरह धुलते देख सरकार ने हंगामे के बीच ही विधायी कार्य निपटाना शुरू किया है तो विपक्ष ने भी विरोध प्रदर्शन को लेकर अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं। पीठ से जिस आचरण को सदन की मर्यादा का उल्लंघन बार-बार बताया जाता रहा, विपक्ष के कुछ सांसद उसी पर अडिग रहे।
विधेयक के समर्थन में बोल रहे सदस्यों के पास आकर तेज नारेबाजी और पोस्टर लहराने जैसे विपक्ष के प्रदर्शन के बीच ही सरकार ने लोकसभा से गत दिवस पारित तटीय पोत परिवहन विधेयक-2025 को राज्यसभा से भी गुरुवार को पारित करा लिया। इस तरह फिर संदेश दे दिया कि अब सरकार मजबूरन इसी तरह प्रस्तावित विधायी कार्य निपटाएगी।
राज्यसभा में बीते कुछ दिनों की तरह जैसे ही गुरुवार को जैसे ही उपसभापति हरिवंश ने नियम 267 के तहत कार्य स्थगन के लिए दिए गए प्रस्तावों को अस्वीकार किया, वैसे ही विपक्ष ने बिहार मतदाता सूची विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) पर चर्चा की मांग के साथ हंगामा शुरू कर दिया। इस पर उपसभापति ने दोहराया कि प्रश्नकाल और शून्यकाल महत्वपूर्ण हैं। जो सदस्य बोलना चाहते हैं, वह बोलें।
राज्यसभा में जारी रहा विपक्षी सांसदों का हंगामा
इस पर विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए तो उन्होंने अद्यतन आंकड़ों के साथ दोहराया कि मानसून सत्र में राज्यसभा में अब तक 180 तारांकित प्रश्न, 180 शून्यकाल प्रस्ताव और 180 ही विशेष उल्लेख उठाए जा सकते थे, लेकिन अब तक सिर्फ 13 तारांकित प्रश्न, पांच शून्यकाल प्रस्ताव और 17 विशेष उल्लेख ही हो सके हैं।
इस तरह गुरुवार को दोपहर करीब 11.08 बजे तक 51 घंटे 30 मिनट का समय व्यवधान के कारण बर्बाद हो चुका था। हालांकि, विपक्ष इससे बेफिक्र रहा और हंगामा जारी रहा, जिस पर उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।
सर्बानंद सोनोवाल प्रस्तुत किया विधेयक
फिर दोपहर में कार्यवाही शुरू होते ही सरकार की ओर से पोत पत्तन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तटीय पोत परिवहन विधेयक- 2025 प्रस्तुत कर दिया। पीठासीन उपसभापति घनश्याम तिवारी ने इस पर जैसे ही चर्चा शुरू कराई, विपक्ष ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। वह वेल में तो नहीं आए, लेकिन अपने-अपने आवंटित स्थान से उठकर आगे की ओर आ गए।
विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनि मत से पारित हुआ विधेयक
विपक्षी सांसद मिलकर नारेबाजी के साथ तालियां बजा रहे थे। टीएमसी सदस्य ममता ठाकुर सदन में पोस्टर दिखाने लगीं। उन्हें पीठे से कई बार ऐसा न करने के लिए चेताया गया, लेकिन वह आखिर तक नहीं मानीं।
इसी तरह टीएमसी सांसद सुष्मिता देव सहित कुछ सांसद उन सदस्यों की ओर मुंह घुमाकर जोर-जोर से नारेबाजी कर रहे थे, जो विधेयक के समर्थन में बोलने के लिए खड़े हुए। इसी गहमागहमी के बीच ध्वनि मत से विधेयक पारित कराया गया।
सूत्रों के अनुसार, आगामी बैठकों में अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के तुरंत बाद ही घर में नकदी मिलने के आरोप में घिरे हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि जस्टिस वर्मा की याचिका भी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है।
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