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    पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस में अंदरूनी कलह, मनीष तिवारी को क्यों नहीं किया गया टीम में शामिल?

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 07:44 PM (IST)

    पंजाब कांग्रेस में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अंदरूनी कलह जारी है। मनीष तिवारी को चुनावी टीम से बाहर रखने पर उन्होंने नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. मनीष तिवारी ने चुनावी टीम में अनदेखी पर खुलकर नाराजगी जताई।

    2. कांग्रेस हाईकमान ने नेताओं को अलग-अलग भूमिकाएं देकर संतुलन साधा।

    3. पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले अंदरूनी कलह बनी चुनौती।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को चुस्त-दुरूस्त करने की कसरत में जुटी कांग्रेस के लिए सूबे में पार्टी की अंदरूनी कलह को पूरी तरह खत्म करना अभी भी चुनौती बनी हुई है।

    चुनावी टीम के गठन में पार्टी हाईकमान ने अपनी तरफ से भले ही सूबे के प्रमुख नेताओं को अलग-अलग भूमिका और जिम्मेदारी देकर संतुलन बनाने का प्रयास किया हो मगर इसके बाद भी मामला अभी सुलझा नहीं दिख रहा।

    मनीष तिवारी की नाराजगी

    पंजाब कांग्रेस की चुनावी टीम के बुधवार को हुए एलान के अगले ही दिन पार्टी के वरिष्ठ नेता चंडीगढ से लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने इसमें अपनी अनदेखी पर खुलेआम नाराजगी व्यक्त करने से गुरेज नहीं किया। इतना ही नहीं पंजाब की चुनावी टीम के चयन में काबिलियत को दरकिनार किए जाने को लेकर तंज कसते हुए इसकी कसौटी को लेकर सवाल भी उठाया।

    मनीष तिवारी ने एक्स पर लिखा पोस्ट

    मनीष तिवारी ने एक्स पोस्ट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि काबिल होना ही अपने आप में एक बड़ी कमी है। काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षा की भावना को दूर करने का कोई तरीका होता। कांग्रेस ने पिछले 45 सालों में मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने भी अपनी पूरी जवानी पार्टी की सेवा में समर्पित किया है। किस्मत को कौन टाल सकता है। जो होना है, वह तो होकर रहेगा।

    शीर्ष नेताओं के बीच घमासान

    मनीष तिवारी की नाराजगी पर पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि इसमें उनकी अनदेखी नहीं की गई है, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का सांसद होने के चलते उन्हें पंजाब चुनाव की टीम में शामिल नहीं किया गया। हालांकि, तिवारी के करीबी सूत्रों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और उनका पूरा राजनीतिक जीवन ही पंजाब केंद्रित रहा है। पंजाब के अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी की अपनी संभावनाएं देख रही है, मगर सूबे में पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच आपसी घमासान उसकी सिरदर्दी बना हुआ है।

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    नेताओं से दो दौर की बातचीत

    इस अंदरूनी कलह को थामने के लिए ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बीते दिनों पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई अन्य नेताओं से दो दौर की बातचीत की। चन्नी सरीखे नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वडिंग को हटाने के लिए दबाव बना रहे थे।

    हाईकमान का क्या है फैसला?

    हालांकि, हाईकमान ने वडिंग और बाजवा की भूमिका में कोई बदलाव नहीं किया पर चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाकर संतुलन बनाने की कोशिश की है। इसी तरह वरिष्ठ नेता विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी और अमर सिंह को चुनाव घोषणापत्र समिति का प्रमुख बना अंदरूनी कलह थामने का रास्ता निकाला। साथ ही संतुलन साधने की इसी रणनीति के तहत सुखविंदर सिंह डैनी, राज कुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को पंजाब कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की गई।