संसद में राघव चड्ढा की दहाड़, कर्नाटक पेपर लीक की घटना याद दिला कांग्रेस को किया बेनकाब
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राघव ने उच्च सदन में कहा, 2016 में जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी तो ...और पढ़ें

कर्नाटक पेपर लीक की घटना याद दिला राघव चड्ढा ने कांग्रेस को किया बेनकाब
HighLights
कर्नाटक में ऑनलाइन सिर्फ 200 रुपये में बेचे गए पेपर
कहा- 2016 में कर्नाटक में फिर लीक हो गया दोबारा करवाया गया 12वीं का केमिस्ट्री का पेपर
राघव ने पेपर लीक रोकने वाले विधेयक पर चर्चा का वीडियो किया साझा
एएनआई, नई दिल्ली। भाजपा के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने कर्नाटक में हुई पेपर लीक की घटना याद दिलाकर कांग्रेस को बेनकाब कर दिया। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राघव ने उच्च सदन में कहा, 2016 में जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी तो किस तरह राज्य के मेडिकल शिक्षा मंत्री का पीए पेपर लीक कर रहा था।
राघव ने भाषण के वीडियो का एक हिस्सा एक्स पर साझा किया। राघव चड्ढा ने कहा,पेपर लीक जैसी गंभीर बीमारी का स्थायी इलाज करना होगा। पेपर लीक की तुलना कैंसर से करते हुए कहा कि जैसे कैंसर का इलाज क्रोसिन खिलाकर नहीं किया जा सकता वैसे ही पेपर लीक जैसी समस्या का इलाज संस्थागत समाधान से होगा। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की विस्तार से जानकारी दी।
पेपर लीक करा रहा था मंत्री का पीए
राघव ने कहा, कर्नाटक में 2016 में 12वीं कक्षा का प्री-यूनिवर्सिटी कालेज (पीयूसी) का केमिस्ट्री का पेपर लीक हो गया। यह राज्य बोर्ड की परीक्षा थी। पता लगने के बाद परीक्षा रद कर दी गई। 20 दिन बाद दोबारा परीक्षा करवाई गई तो पेपर फिर लीक हो गया।
अंतथा दोबारा परीक्षा को रद करना पड़ा। इसके बाद सीआइडी जांच के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया उसमें राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण पाटिल का पीए भी शामिल था।
मंत्री का पीए हर पेपर के लिए 10 लाख रुपये लेकर उन्हें लीक कर रहा था। जब मंत्री से कहा गया कि वह इस्तीफा दें, क्योंकि उनके पीए के कामों के लिए उनकी नैतिक और सीधी जिम्मेदारी बनती है—तो उन्होंने जवाब दिया कि इस्तीफे का तो सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि अगर कुछ गलत हुआ तो यह उनके पीए का "निजी मामला" था।
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कमाल है, कार्यालय पद सब कुछ सरकार ने दिया था, लेकिन जब गिरफ़्तारी की बात आई, तो यह "निजी" मामला बन गया। बिडंबना है कि इस समय कर्नाटक में कांग्रेस की ही सरकार है और डॉ. पाटिल इस समय भी मेडिकल शिक्षा मंत्री हैं। ये कांग्रेस की जवाबदेही के मानक हैं।
पंजाब में फार्मेसी आफिसर भर्ती परीक्षा में ब्ल्यूटूथ के जरिये चीटिंग
राघव ने कहा, पंजाब में आम आदमी सरकार बनने के बाद कई परीक्षाओं में चीटिंग हुई। 19 जुलाई को फार्मेसी आफिसर भर्ती परीक्षा में अनियमितता हुई। ब्ल्यूटूथ के जरिये चीटिंग चल रही थी। सिंडिकेट चीटिंग कराने के लिए 13- 13 लाख रुपये ले रहा था।
कहा, नायब तहसीलदार परीक्षा में चीटिंग हुई। पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड का 12वीं कक्षा का अंग्रेजी का पेपर लीक हुआ। स्कूल शिक्षक भर्ती समेत कई पेपर लीक हुए। एक्साइज और टैक्सेशन इंस्पेक्टर की मेरिट लिस्ट को फर्जी नाम डालकर जारी कर दिया गया।
राघव ने कहा, कर्नाटक में जनवरी 2026 में एसएसएलसी की परीक्षा हुई थी। पेपर लीक हो गया और पेपर आनलाइन सिर्फ 200 रुपये में बेच दिया गया। कहा,कांग्रेस के कार्यकाल में हिमाचल राज्य चयन आयोग की भर्ती परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ था।
कहा, 2004 से 2014 तक कांग्रेस में नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान पेपर लीक के दर्जनों मामले सामने आए थे। इनमें 2006 में एम्स पीजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा, 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा, 2011 में एआइईईई, 2013 में एसएससी परीक्षा शामिल हैं।
राघव ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक के संसद से पारित होने के बाद एक्स पर लिखा, मैंने हर उस युवा भारतीय की ओर से बात की जो मानता है कि ईमानदार कोशिश के बदले ईमानदार मौका मिलना चाहिए। भारत का पहला "एंटी-पेपर लीक" बिल पास हो गया है। छात्रों ने बात रखी। सरकार ने सुनी। कार्रवाई हुई। सिस्टम में बदलाव आया।