'ऑपरेशन टाइगर नहीं, कीचड़...' उद्धव गुट के 6 सांसदों के बागी होने पर कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस ने उद्धव गुट के 6 सांसदों के शिंदे खेमे में जाने को 'ऑपरेशन कीचड़' बताया है। पवन खेड़ा ने भाजपा पर संविधान बदलने की मंशा से अन्य दलों के सांस ...और पढ़ें
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उद्धव गुट के 6 सांसदों के शिंदे खेमे में जाने पर कांग्रेस ने कसा तंज (उद्धव ठाकरे फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी और महाराष्ट्र में उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी में मची फूट के बाद देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने सोमवार को भाजपा के सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में उद्धव ठाकरे के खेमे को और कमजोर करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ऑपरेशन टाइगर को ऑपरेशन कीचड़ करार दिया है।
महाराष्ट्र में हुए ऑपरेशन टाइगर को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "यह ऑपरेशन कीचड़ है क्योंकि इन सीटों पर कमल नहीं खिल सका। लेकिन हमारा सवाल यह है कि वे इतने परेशान क्यों हैं? वे 240 सीटों पर ही क्यों रुक गए, 400 सीटें क्यों नहीं मिलीं?
अब वे TMC और शिवसेना जैसी दूसरी पार्टियों से सांसद तोड़ने में क्यों लगे हैं? मकसद क्या है? क्या उनका इरादा वास्तव में संविधान को बदलना है? ... इस डकैती के पीछे क्या मकसद है?..."
शिव सेना यूबीटी के छह सांसदों ने शिंदे गुट में जाने का लिया फैसला
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा नेता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल होने और सत्तारूढ़ एनडीए को समर्थन देने का फैसला लिया है।
महाराष्ट्र में सिर्फ एक ही शिवसेना- अमित शाह
बताते चले कि एकनाथ शिंदे की ओर से उद्धव को दिया गया यह दूसरा झटका है। जब ऑपरेशन टााइगर के तहत उद्धव गुट के सांसद शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं। हाल ही में केंद्रीय में गृहमंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि महाराष्ट्र में सिर्फ एक ही शिवसेना है और उसके प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं।
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महाराष्ट्र में उद्धव से पहले बंगाल में ममता को झटका
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को लगे झटके से पहले बंगाल में ममता बनर्जी को झटका लगा था। जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद ममता बनर्जी ने बड़ी संख्या में सांसद और विधायक खो दिए। टीएमसी के 20 लोकसभा सदस्यों ने ममता बनर्जी के खेमे से अलग होकर त्रिपुरा की एक पार्टी एनसीपीआई में विलय कर लिया, जिसका नेतृत्व काकोली दस्तीदार ने किया।