यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी हलचल, कई जिलों के संगठन में होगा बदलाव? प्रदेश अध्यक्ष पद पर असमंजस
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी में है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद और कई राष्ट्रीय सचिवों की जिम्मेदारी ब ...और पढ़ें

HighLights
हटाए जा सकते हैं कई चुनावों की विफलता के बाद भी जमे राष्ट्रीय सचिव
संगठन पुनर्गठन में कई जिलों में भी बदलाव संभव, अध्यक्ष पद पर असमंजस
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए गर्माते माहौल के बीच कांग्रेस में भी हलचल शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि कुछ राज्यों में पार्टी हाईकमान ने संगठन पुनर्गठन का मन बना लिया है, जिसमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है।
प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अभी असमंजस दिखाई दे रहा है, लेकिन कई चुनावों की विफलता के बाद भी जमे राष्ट्रीय सचिवों का बदला जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही पहले ही आपत्तियों व शिकायतों का संज्ञान ले चुका पार्टी नेतृत्व कई जिलाध्यक्षों को बदलने की तैयारी में है।
तालमेल के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं
- कांग्रेस लोकसभा चुनाव की तरह ही विधानसभा चुनाव भी सपा के साथ गठबंधन में लड़ने का निर्णय कर चुकी है। सीटों को लेकर बातचीत उच्च स्तर पर चल रही है, लेकिन प्रदेश स्तरीय नेताओं के बीच तालमेल के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
- पार्टी सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्षों और प्रभारी महासचिवों के साथ बैठक की थी। इसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुए थे।
- उत्तर प्रदेश की समीक्षा के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने वहां हुए संगठन सृजन पर एक फिर नाखुशी व्यक्त की। इसके बाद से ही दिल्ली से लखनऊ तक चर्चा दौड़ गई कि 18 जून के बाद कभी भी संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
- इनमें खास तौर पर धीरज गुर्जर, तौकीर आलम, राजेश तिवारी और प्रदीप नरवाल की जिम्मेदारी बदली जा सकती है। उल्लेखनीय है कि जब प्रियंका गांधी वाड्रा प्रदेश की प्रभारी महासचिव बनी थीं, तब से यह राष्ट्रीय सचिव जमे हैं।
- चुनावी असफलताओं के बाद प्रदेश अध्यक्ष तक बदल दिए गए, लेकिन टीम प्रियंका बताए जाने वाले यह सचिव नहीं हटाए जा सके। दो सचिव बदले गए और उनके बदले आए सत्यनारायण पटेल और नीलांशु चतुर्वेदी को भी अब काफी समय हो गया है।
- पार्टी प्रभारी महासचिव की भी बदल सकती है जिम्मेदारी
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के सीधे हस्तक्षेप के बाद ही प्रदेश संगठन में मजबूत दखल रखने वाले प्रियंका के करीबी संदीप सिंह को हटाया गया और अब इन सचिवों को भी हटाने की तैयारी है। इसके अलावा जातीय समीकरणों को नए सिरे से सजाने के क्रम में पार्टी प्रभारी महासचिव अविनाश पांडेय की जिम्मेदारी भी बदल सकती है।
अखिलेश यादव-अजय राय का तालमेल ठीक नहीं
पार्टी के कुछ नेताओं का दावा है कि चूंकि सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का तालमेल अपेक्षाकृत ठीक नहीं है, इसलिए गठबंधन को सहज और मजबूत रखने के लिए उनके स्थान पर किसी और को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
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अजय राय पर खेल सकते हैं दांव
तर्क यह भी है कि असमंजस के कारण ही अभी तक अजय राय को इतने समय बाद भी प्रदेश की टीम नहीं दी गई है। वहीं, कुछ नेताओं का कहना है कि अजय राय की छवि संघर्षशील और जुझारू नेता की होने के कारण राहुल गांधी उन्हें और मौका दे सकते हैं।