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    राहुल गांधी के चहेते युवा आदिवासी नेता दीपक बैज बिना टीम बनाए होंगे विदा, छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:02 AM (IST)

    छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 12 जुलाई को समाप्त हो रहा है। कांग्रेसी नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी माने जाने ...और पढ़ें

    राहुल के चहेते युवा आदिवासी नेता दीपक बैज बिना टीम बनाए होंगे विदा

    राहुल के चहेते युवा आदिवासी नेता दीपक बैज बिना टीम बनाए होंगे विदा

    HighLights

    1. गुटबाजी में उलझी कांग्रेस, 12 को पूरा हो रहा बैज का कार्यकाल 

    2. पीसीसी अध्यक्ष की दौड़ में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल

    जेएनएन, रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 12 जुलाई को समाप्त हो रहा है। कांग्रेसी नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी माने जाने वाले बैज ने तीन वर्ष पूर्व प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी।

    आदिवासी चेहरे के रूप में उभरे बैज की तीन वर्ष की यह यात्रा किसी रोमांचक पटकथा से कम नहीं रही, लेकिन अंत में उनके खाते में एक बड़ी कड़वाहट यह दर्ज हो गई कि वे अपनी पूर्ण "कार्यकारिणी" तक नहीं बना पाए।

    बैज के कार्यकाल की समाप्ति के पूर्व भाजपा अब खुलकर आरोप लगा रही है कि कांग्रेस की गुटबाजी के कारण बैज को यह अवसर नहीं मिल पाया। बस्तर में कांग्रेस के प्रमुख आदिवासी चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले बैज ने जुलाई 2023 में प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी।

    इससे पूर्व बस्तर से ही आने वाले मोहन मरकाम के पास पीसीसी का प्रभार था। उस समय पर प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी। बैज पर नियुक्ति वाले वर्ष 2023 में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में विजयश्री दिलाने का बड़ा दायित्व था, लेकिन परिणाम उलट आए। इसके बाद से ही पीसीसी के समीकरण बदल गए।

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    राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत जैसे दिग्गज नेताओं के अपने-अपने खेमे हैं। सूत्रों का कहना है कि इन गुटों के बीच सामंजस्य बैठाना बैज के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ और पूर्ण कार्यकारिणी का उनका सपना, सपना ही रह गया।

    अब सबकी नजरें इस पर टिकी है कि अगला अध्यक्ष कौन होगा। एक तरफ, भावी पीसीसी अध्यक्ष के लिए टीएस सिंहदेव, डॉ. महंत, भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया व उमेश पटेल के नाम की चर्चा है, तो दूसरी तरफ सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि बैज को फिर से मौका मिल सकता है। इसके पीछे का प्रमुख कारण उनका राहुल-प्रियंका का करीबी होना के साथ उनकी करीबी बताई जा रही है।

    गुटबाजी में उलझा रहा कार्यकाल

    राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, बैज का कार्यकाल गुटबाजी में ही उलझा रहा। एक माह पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि यदि पार्टी चाहे तो वे जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं।

    जवाब में बैज ने कह दिया था कि सिंहदेव वरिष्ठ हैं, उनके लिए राज्य छोटा है, उन्हें दिल्ली (राष्ट्रीय राजनीति) में सक्रिय होना चाहिए और अब युवाओं को मौका मिलना चाहिए।

    अभी चर्चा है कि युवा कांग्रेस के चुनाव में दुर्ग संभाग में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भूपेश बघेल खेमे की रस्साकशी ने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं। इस तरह गुटबाजी व जुबानी जंग साफ करती है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

    कमान संभालने के बाद मिली हार

    जुलाई 2023 में जब दीपक बैज को कमान सौंपी गई थी, तब पार्टी ने उन पर बड़ा दांव खेला था। रायपुर में हुए 85वें राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद युवा नेतृत्व को तरजीह देने की रणनीति के तहत 42 वर्षीय बैज को कुर्सी दी गई थी। हालांकि, उनके नेतृत्व में कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीदों के विपरीत रहा।

    2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता हाथ से निकल गई और खुद दीपक बैज भी अपनी चित्रकोट सीट नहीं बचा पाए। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में 11 में से महज एक सीट और नगरीय-पंचायत चुनावों में मिली लगातार हार ने संगठन की कमर तोड़ दी।

    गुटबाजी कांग्रेस के डीएनए में: चंद्राकर

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि संगठन में जो जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं, उन्हें बदला जाएगा। हमने पीसीसी से लेकर बूथ स्तर तक कमेटियां गठित की हैं। हमने जनता के सामने साबित किया कि भाजपा सरकार पूरी तरह विफल है और उद्योगपतियों के हाथों की कठपुतली बनी हुई है।