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    श्रीनगर में गूंजा नालंदा का ज्ञान, LG मनोज सिन्हा बोले- 'विरासत और आधुनिकता को जोड़कर बनेगा विकसित भारत'

    By Digital Desk Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 20 Jun 2026 02:24 PM (IST)

    उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर-नालंदा संवाद में ज्ञान और अध्यात्म की महान विरासत को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को अतीत और आधुन ...और पढ़ें

    श्रीनगर-नालंदा संवाद में LG मनोज सिन्हा: ज्ञान विरासत और आधुनिकता का संगम।

    श्रीनगर-नालंदा संवाद में LG मनोज सिन्हा: ज्ञान विरासत और आधुनिकता का संगम

    HighLights

    1. ज्ञान और अध्यात्म की महान विरासत को पुनर्जीवित करने पर जोर।

    2. युवाओं को अतीत व आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली शिक्षा।

    3. भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देना।

    डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने आज श्रीनगर-नालंदा संवाद में मुख्य भाषण दिया। कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति विभाग जम्मू-कश्मीर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

    इस अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि हमारा लक्ष्य ज्ञान और अध्यात्म की महान विरासत को पुनर्जीवित करना, भारत की सभ्यतागत परंपराओं को मजबूत करना और भविष्योन्मुखी शिक्षा को आकार देना है जो युवाओं को अतीत और आधुनिक तकनीक दोनों से जोड़े।

    उपराज्यपाल ने कहा कि सुशासन सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देता है और दोनों मिलकर समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और मानवीय चरित्र को आकार देते हैं तथा समावेशी नीतियां बनाते हैं।

    उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर और नालंदा के विद्वानों ने मिलकर दुनिया की सबसे पुरानी जीवित सभ्यताओं में से एक को आकार दिया। यह विरासत हमारा मार्गदर्शक प्रकाश है। श्रीनगर-नालंदा संवाद हमारे लिए उस प्रकाश को विवेक, साहस और विकसित भारत के नए दृष्टिकोण के साथ आगे ले जाने का अवसर है।"

    सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति पर जोर

    उपराज्यपाल ने भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने और सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "सदियों पहले भारत के ज्ञान ने दुनिया को एकजुट किया था। आज हम वह पुल बन सकते हैं जिसकी दुनिया को जरूरत है। दुनिया देख रही है। आइए आत्मविश्वास और करुणा के साथ नेतृत्व करें।"

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    युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को भाषाओं, मान्यताओं, कलात्मक परंपराओं, दार्शनिक स्कूलों और जीवन के विविध तरीकों की समृद्ध विरासत मिली है। यह विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

    "बिहार से जम्मू कश्मीर तक, तमिलनाडु के मंदिरों से लद्दाख के मठों तक, काशी के घाटों से कश्मीर की वादियों तक, प्रत्येक क्षेत्र अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान और जीवन की लय को संजोए हुए है। उपराज्यपाल ने कहा, हमारा साझा उद्देश्य इन विविधताओं को एक सामंजस्यपूर्ण एकता में पिरोना होना चाहिए जो राष्ट्र की सामूहिक चेतना को समृद्ध करे

    ज्ञान केंद्रों की परंपरा को पुनर्जीवित करने की बात

    उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता को हमेशा ज्ञान के केंद्रों ने परिभाषित किया है। नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और कई अन्य केंद्र वैश्विक बौद्धिक आदान-प्रदान के केंद्र थे, जहां चीन, कोरिया, जावा, फारस और पश्चिम एशिया से यात्री आते थे।

    "नालंदा अपने समय का एक जीवंत बौद्धिक जगत था। यह आलोचनात्मक सोच और जिज्ञासा का केंद्र था जहां हजारों विद्वान तर्क, व्याकरण, चिकित्सा, गणित, दर्शन, धर्म और कलाओं में गहराई से लगे हुए थे। इसी तरह, जम्मू कश्मीर शिक्षा का अद्वितीय शारदा पीठ था, जो गणित से लेकर संगीत तक के विषयों में शिक्षा के लिए दूर-दूर से लोगों को आकर्षित करता था।

    युवा पीढ़ी को भारत की ज्ञान परंपराओं को समझने की जरूरत है, जिनकी जड़ें सम्राट अशोक के युग में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास बिहार क्षेत्र में मजबूत हुईं। यूरोपीय विद्वानों ने कभी इस विरासत की अनदेखी की थी लेकिन मुझे यह कहते हुए खुशी है कि इस कार्यक्रम का मेजबान शहर, श्रीनगर भी सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किया गया था।

    प्राचीन नगरों को मजबूत करने का आह्वान

    श्रीनगर-नालंदा संवाद हमें याद दिलाता है कि इस परंपरा को एक आधुनिक, प्रासंगिक बौद्धिक परियोजना के रूप में नवीनीकृत करने का समय आ गया है। उपराज्यपाल ने कहा जैसे प्राचीन काल में विद्वान नालंदा से जम्मू कश्मीर तक पांडुलिपियां, दर्शन और वैज्ञानिक विचार लेकर यात्रा करते थे, हमें विचारों के खुले आदान-प्रदान और गहरे जुड़ाव को पुनर्जीवित करना चाहिए

    उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन नगर जीवंत शिक्षा केंद्र हैं और नालंदा, श्रीनगर, जम्मू, पुरमंडल, वाराणसी, हम्पी, सांची, मदुरै, पुरी और तंजावुर जैसे शहर सदियों का अनुभव और ज्ञान रखते हैं। "हमें इन नगरों की भूमिका को मजबूत करना चाहिए। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास, विरासत संरक्षण और श्रीनगर-नालंदा संवाद जैसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के मंचों की आवश्यकता है। हमें लगातार त्योहारों, प्रदर्शनियों और चर्चाओं को बढ़ावा देना चाहिए जो इन नगरों और दुनिया भर के कलाकारों, विद्वानों और नागरिकों को एक साथ लाते हैं

    कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य व्यक्ति

    इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. शफी शौक, पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार के महानिदेशक श्री सुमन बिल्ला, नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के निदेशक श्री चित्तरंजन त्रिपाठी, नालंदा साहित्य महोत्सव की फेस्टिवल चेयरपर्सन सुश्री डी आलिया, फेस्टिवल डायरेक्टर श्री गंगा कुमार, केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. रविंदर नाथ, कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलोफर खान, एसएसपी श्रीनगर डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती, उपायुक्त श्रीनगर श्री अक्षय लाबरू, वरिष्ठ अधिकारी, साहित्यिक हस्तियां, प्रमुख नागरिक और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।