LG सिन्हा ने 1975 के आपातकाल को बताया संविधान पर हमला, लोकतंत्र बहाल करने वाले सत्याग्रहियों के साहस को किया सलाम
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 1975 के आपातकाल को संविधान और गणराज्य की लोकतांत्रिक भावना पर गंभीर हमला बताया। उन्होंने तानाशाही का विरोध कर लोकतंत्र बहाल ...और पढ़ें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि तानाशाही के खिलाफ खड़े सत्याग्रहियों ने बचाया था भारत का लोकतंत्र।
HighLights
उपराज्यपाल सिन्हा ने 1975 के आपातकाल को संविधान पर हमला कहा।
आपातकाल को लोकतांत्रिक भावना पर सबसे गंभीर हमला बताया।
लोकतंत्र बहाल करने वाले सत्याग्रहियों के बलिदान को याद किया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल संविधान और गणराज्य की लोकतांत्रिक भावना पर सबसे गंभीर हमलों में से एक था। उन्होंने उस दौर में तानाशाही शासन का विरोध करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
संविधान हत्या दिवस के अवसर पर इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में उपराज्यपाल सिन्हा ने उन सत्याग्रहियों के बलिदानों को याद किया, जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया और देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Emergency imposed on 25th June 1975 was one of the gravest assaults on the Constitution & democratic ethos of our Republic. On #SamvidhanHatyaDiwas, I pay tributes to all Satyagrahis who resisted authoritarianism with courage & played a vital role in restoring India's democracy.
— Office of LG J&K (@OfficeOfLGJandK) June 25, 2026
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल हमारे गणराज्य के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सबसे गंभीर हमलों में से एक था। संविधान हत्या दिवस पर मैं उन सभी सत्याग्रहियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने साहस के साथ निरंकुशता का विरोध किया और भारत में लोकतंत्र की बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आपको बता दें कि हर वर्ष 25 जून को 1975 में लगाए गए आपातकाल की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में इस अवधि को व्यापक रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक माना जाता है।