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    'मुहर्रम जुलूसों को दें अनुमति, पीएसए बंदियों को करें रिहा', पीडीपी प्रधान महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से की अपील

    By Naveen NawazEdited By: Rahul Sharma
    Updated: Tue, 16 Jun 2026 03:03 PM (IST)

    महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मुहर्रम जुलूसों की अनुमति देने और ईरान से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार युवाओं को रिहा करने की अपील की। ...और पढ़ें

    महबूबा मुफ्ती ने कहा, ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर प्रदर्शन करने वालों को बाहर की जेलों में भेजना गंभीर रूप से चिंताजनक।

    महबूबा मुफ्ती ने कहा, ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर प्रदर्शन करने वालों को बाहर की जेलों में भेजना गंभीर रूप से चिंताजनक।

    HighLights

    1. मुहर्रम जुलूसों की अनुमति दें, यह सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा।

    2. ईरान विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार युवाओं को पीएसए से रिहा करें।

    3. सरकार संवाद करे, कठोर कानूनों से घाव न बढ़ाए।

    राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन से घाटी में मुहर्रम के जुलूसों की अनुमति देने तथा ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के विरोध में प्रदर्शन करने वाले और जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तार किए गए युवाओं को रिहा करने की अपील की।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक जुलूस इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें लोगों की भावनाओं तथा संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

    इस्लामी नववर्ष का पहला महीना मुहर्रम बुधवार से जम्मू-कश्मीर में शुरू होगा और 10वें दिन, 26 जून को, आशूरा के जुलूस निकाले जाएंगे। महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “मुहर्रम आत्मचिंतन, बलिदान और स्मरण का समय है। इमाम हुसैन द्वारा प्रतिपादित मूल्य आज भी लोगों को न्याय, करुणा और मानव गरिमा के लिए खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। सरकार का दायित्व है कि शोक मनाने वाले लोग इन पवित्र दिनों को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से मना सकें।”

    मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं

    उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि क्षेत्र की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, “मुहर्रम जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए गहरा धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है और प्रशासन को शोक मनाने वालों तथा श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करनी चाहिए।” पीडीपी प्रमुख ने प्रशासन से यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएँ, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने का आग्रह किया ताकि धार्मिक सभाएँ और जुलूस सुचारु रूप से आयोजित हो सकें।

    ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के विरोध में प्रदर्शन करने वाले कई युवाओं के खिलाफ कथित रूप से पीएसए के तहत कार्रवाई किए जाने और उन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर की जेलों में भेजे जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त करते हुए महबूबा ने कहा कि ऐसे कदम “गंभीर रूप से चिंताजनक हैं और युवाओं को और अधिक अलग-थलग कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि विशेष रूप से मुहर्रम जैसे पवित्र महीने में युवाओं के खिलाफ “कठोर कानूनों” का इस्तेमाल करना “संवेदनहीन और प्रतिकूल” है।

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    घावों को भरने का प्रयास करना चाहिए

    उन्होंने कहा, “मुहर्रम वह समय है जब लोग कर्बला में दी गई कुर्बानियों को याद करते हैं और उनका शोक मनाते हैं। यह आत्ममंथन, करुणा और पीड़ितों के साथ एकजुटता का समय है। ऐसे संवेदनशील अवसर पर सरकार को लोगों से संवाद करना चाहिए, उनकी चिंताओं को सुनना चाहिए और घावों को भरने का प्रयास करना चाहिए, न कि दंडात्मक कदम उठाकर उनके दुख को और बढ़ाना चाहिए।”

    महबूबा मुफ़्ती ने प्रशासन से ऐसे सभी मामलों की तत्काल समीक्षा करने, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और आगे किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई से बचने की अपील की। 

    उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता की भावनाओं और शिकायतों को समझने तथा उनका समाधान करने के लिए संवाद और सहभागिता सबसे प्रभावी माध्यम हैं।