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    60 साल का सपना साकार, एशिया की सबसे लंबी जोजिला टनल ब्रेकथ्रू; कश्मीर से लद्दाख जाना हुआ आसान

    By Digital Desk Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Tue, 09 Jun 2026 12:53 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, LG मनोज सिन्हा और CM उमर अब्दुल्ला ज़ोजिला टनल पहुंचे। चट्टान की आखिरी दीवार की प्रतीकात्मक खुदाई की गई, यानी टनल का 'ब्र ...और पढ़ें

    HighLights

    1. ज़ोजिला टनल में जुड़े दोनों छोर

    2. गडकरी ने की 'ब्रेकथ्रू' खुदाई

    3. ढाई साल में पूरी आवाजाही

    डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ ज़ोजिला टनल पहुंचे, ताकि वहां चट्टान की आखिरी दीवार की प्रतीकात्मक खुदाई की जा सके। यह टनल एशियाई महाद्वीप में सबसे लंबी दो-तरफ़ा सड़क टनल है।

    वहीं मौके पर मौजूदा लद्दाख सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने कहा, “पिछले 60-70 सालों का सपना अब पूरा होने जा रहा है। मैं लद्दाख की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और नितिन गडकरी का धन्यवाद करता हूं। भाजपा सरकार आने के बाद ही इस सुरंग पर व्यावहारिक रूप से काम शुरू हुआ। नितिन गडकरी ने खुद इस परियोजना की निगरानी की। इसका पूरा श्रेय उनके गतिशील नेतृत्व को जाता है।

    Zozila tunnerl kashmir gadhari

    आपको बता दें कि सामरिक दृष्टि से यह सुरंग बेहद अहम है। 1999 के युद्ध के दौरान सरकार और जनता ने यहां सुरंग की जरूरत को महसूस किया था। इस सुरंग से लद्दाख और कारगिल की आर्थिक तरक्की होगी। हर मौसम में खुली रहने वाली यह सड़क बुजुर्गों, छात्रों और मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी। हमें गडकरी पर पूरा भरोसा है कि यह परियोजना एक साल के भीतर पूरी हो जाएगी।”

    प्रोजेक्ट का लगभग 80% काम हो चुका पूरा 

    वहीं ज़ोजिला प्रोजेक्ट के लिए ICT AIAPL की ओर से अथॉरिटी इंजीनियर यूसुफ़ ने कहा, "मैं ईरान से हूं। मुझे इस बात पर गर्व है। मुझे खुशी है कि प्रोजेक्ट का लगभग 80% काम पूरा हो चुका है। बाकी 20% को पूरी तरह से पूरा होने में शायद 2 साल और लग सकते हैं। फिर भी, टनल के लिए यह 'ब्रेकथ्रू' (सुरंग के दोनों सिरों का आपस में जुड़ना) एक बड़ी घटना है और हमें खुशी है कि मौजूदा सिस्टम के तहत हम इस प्रोजेक्ट को अच्छे से पूरा कर पाए हैं।

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    टनल को पूरी तरह से खुलने में लगभग ढाई साल और लगेंगे। हालांकि, किसी बहुत ज़रूरी इमरजेंसी में, खासकर अगर सेना को इसका इस्तेमाल करना पड़े, तो कुछ समय के लिए टनल का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन आम हालात में अभी इसका इस्तेमाल करना मुमकिन नहीं है।