उमर कैबिनेट में बदलाव की सुगबुगाहट, मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार तय, दावेदारों की लॉबिंग तेज
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसमें तीन रिक्त पदों पर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। ...और पढ़ें

उमर अब्दुल्ला कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज दावेदारों की लॉबिंग बढ़ी।
HighLights
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार जल्द।
तीन रिक्त पदों पर नए चेहरों को मिलेगा मौका।
शिया समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की प्रबल संभावना।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा जल्द ही अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार का संकेत दिए जाने के बाद सत्ताधारी दल में हलचल बढ़ गई है। विभिन्न विधायकों ने अपनी दावेदारी जताते हुए लाबिंग शुरु कर दी है। कोई अनुभव और वरिष्ठता का वास्ता दे रहा है तो कुछ युवा ऊर्जा के साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर अपना दावा ठोंक रहे हैं।
अगर किसी मौजूदा मंत्री को नहीं हटाया जाता है तो सिर्फ तीन ही नए चेहरे शामिल हाेंगे। संभावित नए चेहरों में एक शिया नेता भी बताया जा रहा है, क्योंकि मौजूदा समय में मंत्रिमंढल में एक भी शिया नेता नहीं है। इसके अलावा शिया नेता को शामिल कर उमर शिया मतदाताओं को साधने का प्रयास करेंगे।
आपको बता दें कि अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो दिन पहले पहली बार सार्वजनिक तौर अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि तैयारी हो चुकी है और यह संसद में मानसून सत्र की शुरुआत से पहले या सत्र के दौरान किसी भी समय हो सकता है। अलबत्ताख् सूत्रों के अनुसार, यह कवायद जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में पूरी हो सकती है।
तीन मंत्री पद अब भी खाली
अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने वाली उमर अब्दुल्ला सरकार में वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत कुल छह मंत्री हैं। जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद की निर्धारित संख्या के अनुसार अभी तीन कैबिनेट पद रिक्त हैं। यदि मौजूदा किसी मंत्री को नहीं हटाया जाता है तो इन तीनों पदों पर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
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हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री केवल विस्तार ही नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल में फेरबदल भी कर सकते हैं। ऐसे में कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
दौड़ में कई विधायक
सूत्रों के मुताबिक, नेशनल कान्फ्रेंस (एनसी) के कई विधायक मंत्री पद हासिल करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। इनमें कुछ विधायक तो तीसरी बार तो कुछ सातवीं बार भी सदन में पहुंचे हैं और पहले मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक भी मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री के सामने क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। ऐसे में विस्तार और फेरबदल दोनों को ध्यान में रखते हुए व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर विचार किया जा रहा है।
कांग्रेस को लेकर असमंजस की स्थिति
मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती सहयोगी दल कांग्रेस को लेकर है। विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं, लेकिन पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी।
कांग्रेस के इस रुख के कारण मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अलग तरह की राजनीतिक स्थिति बनी हुई है। यदि कांग्रेस अपने रुख पर कायम रहती है तो रिक्त पदों पर केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस अथवा समर्थक विधायकों को ही अवसर मिल सकता है।
शिया प्रतिनिधित्व पर भी मंथन
सूत्रों का कहना है कि इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में शिया समुदाय को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना काफी प्रबल है। जम्मू-कश्मीर की पूर्ववर्ती सरकारों में भी शिया समुदाय को मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व दिया जाता रहा है और इस परंपरा को जारी रखने पर विचार किया जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए शिया नेतृत्व को मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
नया चेहरा उभर सकता है
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित विधायकों में से किसी एक को पार्टी भविष्य के शिया चेहरे के रूप में भी आगे बढ़ा सकती है। ऐसी स्थिति में जडीबल के विधायक तनवीर सादिक को मंत्री बनाया जा सकता है। इससे श्रीनगर शहर को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलेगा और शिया समुदाय को भी।
इसके पीछे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कारण भी माना जा रहा है। हाल के महीनों में श्रीनगर से सांसद सैयद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। ऐसे में पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर शिया समुदाय में नया नेतृत्व विकसित करने की रणनीति पर भी काम कर सकती है।
संतुलन साधना सबसे बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान क्षेत्रीय, जातीय, धार्मिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा। जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों के बीच प्रतिनिधित्व, विभिन्न समुदायों की भागीदारी, सहयोगी दलों की अपेक्षाएं और पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार की तिथि अथवा संभावित नए मंत्रियों के नामों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल राजनीतिक हलकों में संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है।