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    “90% महिलाएं बिना ‘कमरे’ में जाए राजनीति नहीं कर सकतीं”, पप्पू यादव के बयान पर महिला आयोग का नोटिस

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 06:12 PM (IST)

    पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान को लेकर बिहार राज्य महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने उन्हें नोटिस जारी क ...और पढ़ें

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    “भारत में महिलाएं देवी कहलाती हैं, लेकिन सम्मान नहीं मिलता”, पप्पू यादव के बयान पर बवाल, महिला आयोग का नोटिस

    डिजिटल डेस्क, पूर्णिया/पटना। बिहार के पूर्णिया संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के एक बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद गहरा गया है। पप्पू यादव ने हाल ही में महिलाओं की स्थिति और राजनीति में उनकी भागीदारी को लेकर टिप्पणी की थी, जिसके बाद बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने सांसद को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है।

    महिलाओं पर बयान से बढ़ा विवाद

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पप्पू यादव ने एक बयान में कहा था कि भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी वे हकदार हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि “सिस्टम और समाज इसकी जिम्मेदारी है।”

    इसके साथ ही उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल हैं और कई बार उन्हें राजनीति में आने के लिए गलत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसी बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया।

    महिला आयोग ने लिया संज्ञान

    बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने नोटिस जारी करते हुए पप्पू यादव से पूछा है कि उन्होंने यह बयान किन परिस्थितियों में दिया और इसका आधार क्या था। आयोग ने यह भी सवाल उठाया है कि उनके बयान को महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ क्यों न माना जाए तथा उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

     

    Pappu Yadav Controversial Women Statement Bihar Commission Acts9

    तीन दिन में मांगा जवाब

    महिला आयोग ने सांसद पप्पू यादव को तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा आयोग ने यह भी पूछा है कि इस बयान के आधार पर उनकी लोकसभा सदस्यता को लेकर क्यों न सिफारिश की जाए।

    राजनीतिक हलकों में हलचल

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कई नेताओं ने इस बयान को अनुचित बताया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि बयान को संदर्भ से हटाकर देखा जा रहा है। हालांकि महिला अधिकार संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और कहा है कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों को सोच-समझकर बयान देना चाहिए।

    सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

    कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की अस्पष्ट या विवादित टिप्पणी समाज में गलत संदेश देती है।

    संगठनों ने महिला आयोग की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी पर रोक लग सके।

    पप्पू यादव के जवाब का इंतजार

    फिलहाल मामला आयोग की जांच में है और सभी की नजरें पप्पू यादव के जवाब पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि आयोग इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है और क्या यह विवाद राजनीतिक रूप से और आगे बढ़ता है या नहीं।

    “भारत में महिलाओं को देवी कहा जाता है, लेकिन उन्हें असली सम्मान नहीं मिलता। इसके लिए सिस्टम और समाज जिम्मेदार है… 90% महिलाएं बिना राजनेताओं के ‘कमरे’ में जाए राजनीति नहीं कर सकतीं।”

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    निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने महिलाओं और राजनीति को लेकर यह बयान दिया था