संत सीचेवाल ने राज्यसभा में पेश किया ऐतिहासिक प्राइवेट मेंबर बिल; चुनावी घोषणापत्र को कानूनी गारंटी का प्रस्ताव
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। यह विधेयक चुनावी घोषणापत्रों को ...और पढ़ें

राज्यसभा सांसद संत सीचेवाल।
जागरण संवाददाता, कपूरथला। भारतीय राजनीति में चुनावी वादों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्यसभा सांसद एवं प्रसिद्ध पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल राज्यसभा में पेश किया है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2025 के रूप में प्रस्तुत यह प्रस्ताव चुनावी घोषणापत्रों को कानूनी दायरे में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। संत सीचेवाल ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादे केवल भाषणों और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें पूरा करना सरकारों और राजनीतिक दलों की कानूनी जिम्मेदारी बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि वर्षों से राजनीतिक दल सत्ता में आने के लिए बड़े-बड़े वादे करते रहे हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन वादों को भुला दिया जाता है, जिससे लोकतंत्र में जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।
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चुनावी घोषणापत्र निर्वाचन आयोग को देने की मांग
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार प्रत्येक राजनीतिक दल या गठबंधन को अपना चुनावी घोषणापत्र निर्वाचन आयोग के पास अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। घोषणापत्र में किए गए वादों को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित करना होगा। इसके साथ ही हर वादे की समय-सीमा, अनुमानित व्यय, वित्तीय स्रोत और अपेक्षित परिणामों का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि सरकारों को चुनावी वादों की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करनी होगी। यह रिपोर्ट एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी, ताकि आम जनता भी वादों की स्थिति जान सके।
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वादों की निगरानी के लिए कमेटी समिति की भी रखी मांग
वादों की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो हर वर्ष अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी। विधेयक में सख्त दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हैं। वादे पूरे न करने पर पहले चेतावनी, फिर आर्थिक जुर्माने और जानबूझकर भ्रामक घोषणाओं की स्थिति में भारी जुर्माने व सार्वजनिक निंदा का प्रावधान रखा गया है।
संत सीचेवाल ने बताया कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 और 2021 के फैसलों की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह कानून चुनावी घोषणापत्र को राजनीतिक घोषणा से आगे बढ़ाकर जनता के साथ एक कानूनी अनुबंध बनाएगा।
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