'हम कश्मीर के हालात देखने नहीं आए', कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश समिति के जम्मू-कश्मीर दौरे पर तोड़ी चुप्पी
शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि विदेश मामलों की संसदीय समिति का जम्मू-कश्मीर दौरा केवल तीन निर्धारित विषयों के अध्ययन तक सीमित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ...और पढ़ें

सांसद शशि थरूर ने बताया कि विदेश समिति का फोकस कूटनीति पर, स्थानीय हालात पर नहीं।
HighLights
समिति का दौरा तीन निर्धारित विषयों तक सीमित है।
स्थानीय मुद्दों या घाटी की परिस्थितियों की समीक्षा नहीं।
पाकिस्तान, चीन संबंध और पासपोर्ट सेवाओं पर अध्ययन।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। संसद की विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने सोमवार को स्पष्ट किया कि समिति का जम्मू-कश्मीर दौरा केवल तीन निर्धारित विषयों के अध्ययन तक सीमित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समिति घाटी की मौजूदा परिस्थितियों या स्थानीय मुद्दों की समीक्षा करने नहीं आई है।
पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि उन्होंने अभी उपराज्यपाल से मुलाकात की है और अन्य पक्षों से बातचीत का अवसर नहीं मिला है। उन्होंने कहा, 'मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह दौरा कश्मीर घाटी की परिस्थितियों का आकलन करने के लिए नहीं है।'
हम विदेश मामलों संबंधी समिति
थरूर ने बताया कि समिति वर्तमान में तीन प्रमुख विषयों का अध्ययन कर रही है जिनमें पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय कूटनीतिक स्थिति की समीक्षा, भारत-चीन की सीमा और कूटनीतिक पहलुओं का आकलन करने के अलावा जम्मू-कश्मीर में पासपोर्ट कार्यालयों और सेवाओं की उपलब्धता एवं कामकाज पर चर्चा करना है। उन्होंने कहा, 'हम यहां घरेलू या स्थानीय मुद्दों की समीक्षा करने नहीं आए हैं। यह हमारा कार्यक्षेत्र नहीं है। हम विदेश मामलों संबंधी समिति हैं।'
थरूर ने समिति के दायित्व को दोहराते हुए कहा कि विदेश मामलों संबंधी संसदीय स्थायी समिति का दायित्व भारत की विदेश नीति, कूटनीतिक संबंधों तथा विदेश मंत्रालय से जुड़े विषयों की समीक्षा करना है। समिति वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के दौरे पर है, जहां वह पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों से जुड़े विषयों और क्षेत्र में पासपोर्ट सेवाओं की उपलब्धता एवं कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रही है।
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हमारा कार्यक्षेत्र स्पष्ट है और हम...
स्थानीय स्तर पर यह अटकलें थीं कि समिति का दौरा घाटी के हालात का जायजा लेने के लिए है। इस पर विराम लगाते हुए थरूर ने कहा कि समिति का फोकस पूरी तरह से विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर है। 'हमारा कार्यक्षेत्र स्पष्ट है और हम उसी के अनुरूप काम कर रहे हैं।'
समिति का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंध लगातार कूटनीतिक चर्चा में हैं। साथ ही, सीमावर्ती क्षेत्रों में पासपोर्ट सेवाओं को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता रहा है। थरूर ने संकेत दिया कि अध्ययन पूरा होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी।