'संवाद आगे बढ़े, लेकिन पाकिस्तान निभाए जिम्मेदारी', शांति पत्र पर बोले तनवीर सादिक, RSS के समर्थन का भी दावा
भारत-पाक शांति पत्र पर नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता तनवीर सादिक ने संवाद का स्वागत किया, लेकिन पाकिस्तान पर जिम्मेदारी निभाने का जोर दिया। ...और पढ़ें

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता तनवीर सादिक ने प्रमुख नागरिकों की चिट्ठी का किया समर्थन।
HighLights
100 से अधिक नागरिकों ने भारत-पाक पीएम को लिखा शांति पत्र।
तनवीर सादिक ने संवाद का स्वागत किया, पाकिस्तान पर डाली जिम्मेदारी।
सादिक ने दावा किया कि आरएसएस भी बातचीत का समर्थन करता है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। भारत और पाकिस्तान के बीच शांति, सामान्य स्थिति और संवाद बहाली की मांग को लेकर दोनों देशों के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र पर सियासी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता तनवीर सादिक ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत को कमजोर करने वाली ताकतों को हराने के लिए समान विचारधारा वाले लोगों को सशक्त करना जरूरी है।
पत्रकारों से बातचीत में तनवीर सादिक ने कहा, "जिन ताकतों ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि भारत आगे न बढ़े, उन्हें हराना होगा। अगर हमें उन ताकतों को हराना है जिन्होंने भारत में तबाही मचाई है, तो मेरा मानना है कि हमें लोगों को—उन समान विचारधारा वाले लोगों को सशक्त करना होगा जो हमेशा एक मजबूत भारत चाहते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि इस लिहाज से जिन लोगों ने भारत और पाकिस्तान से संवाद शुरू करने की अपील करते हुए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, वह "एक अच्छी और बहुत सकारात्मक बात है।" सादिक ने जोर देकर कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस हमेशा से ही बातचीत की पक्षधर रही है।
आरएसएस समेत कई समूहों ने हमारे नजरिए का समर्थन किया
तनवीर सादिक ने दावा किया कि बातचीत के मुद्दे पर अब व्यापक सहमति बन रही है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि आरएसएस और अलग-अलग समूहों के लोगों ने निश्चित रूप से हमारे दृष्टिकोण का समर्थन किया है। मुझे लगता है कि बातचीत को आगे बढ़ना चाहिए।"
खबरें और भी
हालांकि, उन्होंने संवाद की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर भी डाली। सादिक ने स्पष्ट किया, "लेकिन जैसा मैंने कहा, जिम्मेदारी पाकिस्तान पर भी है।" उनका इशारा सीमा पार से होने वाली गतिविधियों और आतंकवाद के मुद्दे की ओर था, जिसे भारत संवाद के लिए एक बड़ी बाधा मानता आया है।
क्या है नागरिकों की चिट्ठी में?
आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक जाने-माने नागरिकों, जिनमें पूर्व राजनयिक, सैन्य अधिकारी, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को एक संयुक्त पत्र लिखा है। इस पत्र में अपील की गई है कि दोनों देशों के बीच शांति बहाल की जाए, सामान्य हालात लौटाए जाएं और रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जाए।
पत्र में कहा गया है कि दोनों देशों के आम लोग दशकों से तनाव और अविश्वास का खामियाजा भुगत रहे हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाकर ही स्थायी शांति का रास्ता निकाला जा सकता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का पुराना रुख
नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की लंबे समय से वकालत करती रही है। पार्टी का मानना है कि सैन्य समाधान के साथ-साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर संवाद ही स्थायी समाधान निकाल सकता है। तनवीर सादिक का ताजा बयान भी पार्टी की इसी लाइन को आगे बढ़ाता है।
फिलहाल भारत सरकार का आधिकारिक रुख यही है कि "आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।" भारत का कहना है कि पाकिस्तान को पहले अपनी जमीन से संचालित आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा। वहीं, नागरिक समाज की इस पहल ने एक बार फिर संवाद की संभावनाओं पर बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से दोनों देशों के बीच ट्रैक-2 डिप्लोमेसी को बल मिल सकता है, भले ही आधिकारिक स्तर पर बातचीत तुरंत शुरू न हो। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद इस नागरिक अपील पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।