ब्लैक फंगस को जड़ से खत्म करेगी दवा, जीएनडीयू के प्रोफेसर ने तैयार किया फार्मूला
कोरोना काल के दौरान ज्यादा उभर कर आया ब्लैक फंगस अब बच नहीं पाएगा।

जासं, अमृतसर: कोरोना काल के दौरान ज्यादा उभर कर आया ब्लैक फंगस अब बच नहीं पाएगा, क्योंकि गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के फार्मास्युटिकल विभाग के डा. सुभीत कुमार जैन ने इसका प्रकोप खत्म करने के लिए नया फार्मूला तैयार कर लिया है। इसे भारत सरकार की ओर से पेटेंट भी प्रदान कर दिया गया है। हालांकि ब्लैक फंगस को लेकर बाजार में कई अन्य दवाइयां भी उपलब्ध हैं लेकिन वह सभी दवाइयां इतनी ज्यादा असरदार नहीं है कि ब्लैक फंगस को जड़ से खत्म कर सके।
यहां तक कि बहुत सारे ब्लैक फंगस के मरीजों की आंख तक निकालनी पड़ती है लेकिन जीएनडीयू की ओर से तैयार किया गया फार्मूला इस पर बहुत ज्यादा असरदार है और यह जड़ से खत्म करेगी। यही कारण है कि भारत सरकार ने भी इसे मंजूरी देते हुए पेटेंट प्रदान कर दिया है। जो दवा बाजार में हजारों रुपये में मिलती है, उसके मुकाबले जीएनडीयू में तैयार किए गए फार्मूले को बहुत ही कम कीमत पर बेचा जाएगा। इसके अलावा जीएनडीयू के फार्मास्युटिकल विभाग की ओर से तैयार किया गया यही फार्मूला दिमागी बुखार पर भी बेहद असरदार है। इस सफलता पर वीसी डा. जसपाल सिंह संधू, विभाग के हेड प्रो. प्रीत महिदर सिंह बेदी ने डा. जैन की इस सफलता पर खुशी जाहिर की और उन्हें बधाई भी दी। चार साल की रिसर्च के बाद मिली सफलता
डा. सुभीत कुमार जैन ने बताया कि अकसर देखने में आता था कि ब्लैक फंगस की कोई भी कारगर दवाई बाजार में उपलब्ध में नहीं है। जो दवाई उपलब्ध है, वह काफी ज्यादा महंगी है। ऐसे में उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर नया फार्मूला खोजने पर काम शुरू किया। करीब चार साल तक वह अपने फार्मूले पर काम करते रहे। इस दौरान सैकड़ों बार चूहों पर प्रयोग किया गया। हर बार प्रयोग करने पर कुछ न कुछ कमी दिखाई देती तो उसमें सुधार के लिए काम किया जाता। ऐसे में चार साल की मेहनत और रिसर्च के बाद फार्मूला तैयार किया है। डा. जैन के 130 से ज्यादा रिसर्च पत्र हो चुके प्रकाशित
डा. जैन को यूएसए की ओर से बायोलाजी में प्रकाशित साल 2021 की लिस्ट में विश्व के सबसे बेहतर वैज्ञानिकों में स्थान मिला था। वहीं डा. जैन के 130 से ज्यादा रिसर्च पेपर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं। मौजूदा समय में भी वह एंटी-कैंसर दवाइयों पर काम कर रहे हैं।
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