पौंग-भाखड़ा डैम से पानी छोड़ने से पंजाब में हड़कंप, मौसम विभाग ने दी भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 30 31 अगस्त और 1 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी है जिससे पंजाब में चिंता बढ़ गई है। फाजिल्का फिरोजपुर और तरनतारन जैसे निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर है। ब्यास नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश के कारण पौंग डैम से 1.10 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। भाखड़ा डैम से भी 54 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। मौसम विभाग ने फिर से 30,31 अगस्त और एक सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी है जिसके चलते पंजाब के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं।
आज नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट की बैठक में जब भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के अधिकारियों ने यह जानकारी रखी तो अधिकारी काफी चिंतित दिखाई दिए क्योंकि अभी तक पंजाब के निचले इलाकों से पानी नहीं निकल पा रहा है।
खासतौर पर फाजिल्का, फिरोजपुर, तरनतारन आदि इलाकों में स्थिति काफी बिगड़ी हुई है। दरअसल पंजाब के लिए सबसे बड़ी चिंता इस बात की बनी हुई है कि ब्यास नदी के कैचमेंट एरिया में बरसात हो रही है और ब्यास नदी पर बने हुए पौंग डैम में और पानी को स्टोर करने की क्षमता नहीं है।
इसलिए यह जगह बनाने के लिए 1.10 लाख क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है जबकि पिछले दो दिन से साठ हजार क्यूसिक पानी आ रहा है।
यानी 50 क्यूसिक पानी अतिरिक्त छोड़कर डैम में जगह बनाई जा रही है ताकि अगर पौंग के कैचमेंट एरिया में अगर एकदम से ज्यादा बरसात होती है तो डैम से ज्यादा पानी छोड़ने से बचा जा सके।
बीबीएमबी के अधिकारियों ने बताया कि अगर कैचमेंट एरिया में बरसात ज्यादा हो जाती है 1.10 लाख क्यूसिक से ज्यादा पानी छोड़ना पड़ेगा।पौंग से अधिकतर 2.18 लाख क्यूसिक तक पानी छोड़ा जा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि भाखड़ा में अभी नौ फुट की जगह है इसलिए यहां से 54 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी की कोशिश है कि सतलुज से इतना ही पानी रिलीज किया जाए।
काबिले गौर है कि अगर इतना ही पानी छोड़ा जाता रहा तो ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी क्योंकि सतलुज नदी में दो लाख क्यूसिक तक पानी चल सकता है लेकिन दिक्कत यह है कि अगर पहाडों के साथ साथ मैदानी इलाकों में भी भारी बारिश हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
बैठक में मौजूद एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि रावी नदी का हाल भी ज्यादा अच्छा नहीं है। पिछले दो दिनों से बरसात न होने के कारण पानी की आवक कम हुई है और जिन क्षेत्रों में पानी भर गया था उनमें पानी निकल गया है।
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