जालंधर के गुरिंदरवीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम से बाहर, 100 मीटर रेस में पदक जीतने का टूटा सपना
जालंधर के गुरिंदरवीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की 100 मीटर रेस के फाइनल में जगह नहीं बना पाए, जिससे पदक जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया। ...और पढ़ें
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जालंधर के गुरिंदरवीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम से बाहर। फाइल फोटो
HighLights
गुरिंदरवीर सिंह 100 मीटर रेस फाइनल से बाहर।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुरिंदरवीर का पदक सपना अधूरा।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स को लगा बड़ा झटका।
जागरण संवाददाता, जालंधर। कॉमनवेल्थ गेम्स में जालंधर के गुरिंदरवीर सिंह का 100 मीटर रेस में पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया है। गुरिंदरवीर ने 10.39 सेकेंड का समय निकाल पाया, जिसके चलते वह फाइनल में क्वालिफाई नहीं कर पाया।
बता दें कि गुरिंदरवीर सिंह मई में हुई नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में 10.09 सेकेंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया था। देशवासियों को गुरिविंदर सिंह से पदक की उम्मीद थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में एथलेटिक्स कॉम्पिटिशन के पहले दिन पुरुषों की 100 मीटर रेस में भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुरिंदरवीर सिंह हीट्स से आगे नहीं बढ़ पाए। 11 हीट्स में, भारतीय स्प्रिंटर को 73 एथलीटों में 28वें स्थान पर रखा गया। सबसे तेज रहे 17 ही अगले राउंड में आगे बढ़ पाए। गुरिंदरवीर 10.24 सेकंड के जरूरी क्वालीफिकेशन समय से 0.15 सेकंड पीछे रह गए।
गुरिंदरवीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर
हीट 4 में हासिल किया दूसरा नंबर अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे 25 साल के गुरिंदरवीर ने 10.39 सेकंड का समय निकालकर हीट 4 में जमैका के रोहन वॉटसन के पीछे दूसरा स्थान हासिल किया जिन्होंने 10.13 सेकंड में लाइन पार की। गुरिंदरवीर बाकी रेसर्स से आगे रहे लेकिन उनका टाइम सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए काफी नहीं था।
लेन पांच से दौड़ते हुए गुरिंदरवीर ने अच्छी शुरुआत की और रेस के शुरुआती दौर में वॉटसन के साथ बराबरी की, इससे पहले कि जमैका के इस धावक, जिनका निजी श्रेष्ठ प्रदर्शन 9.91 सेकंड है, ने आखिरी मीटर में तेजी से दौड़कर जीत पक्की कर ली। रेस 1.9 मीटर/सेकंड की वैध टेलविंड के साथ हुई।
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नेशनल रिकॉर्ड भी गुरिंदर के नाम
ग्लासगो में गुरिंदरवीर ने जो मोमेंटम बनाया था उसे देखते हुए यह नतीजा हैरान करने वाला था। मई में, पंजाब के इस स्प्रिंटर ने रांची में फेडरेशन कप में भारतीय स्प्रिंटिंग इतिहास को फिर से लिखा था, और 10.09 सेकंड के शानदार नेशनल रिकॉर्ड के साथ 10.10 सेकंड का बैरियर तोड़ने वाले पहले भारतीय पुरुष बने थे।
उनकी रिकॉर्ड तोड़ने वाली दौड़ में सबसे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में 10.17 सेकंड का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा और अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पिछले मार्क को पीछे छोड़ दिया और फाइनल में इसे और बेहतर करके 10.09 सेकंड कर लिया। इसी प्रदर्शन के बाद उनसे कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक की उम्मीद बढ़ गई थी लेकिन उनका डेब्यू निराशाजनक रहा।